Richest Cricket Board: क्रिकेट अब सिर्फ मैदान पर चौके-छक्कों और रिकॉर्ड्स का खेल नहीं रह गया है, बल्कि यह दुनिया के सबसे बड़े स्पोर्ट्स बिजनेस में शामिल हो चुका है. खासकर भारतीय उपमहाद्वीप में क्रिकेट की लोकप्रियता ने इसे अरबों डॉलर का बाजार बना दिया है. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर दुनिया का सबसे अमीर क्रिकेट बोर्ड कौन सा है और बाकी बोर्ड उसकी तुलना में कहां खड़े हैं?
लिस्ट में टॉप पर भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड बिजनेस टूडे की रिपोर्ट में सामने आए अनुमानित आंकड़ों के मुताबिक, भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) दुनिया का सबसे अमीर क्रिकेट बोर्ड है. बीसीसीआई की अनुमानित नेटवर्थ करीब 2.2 अरब डॉलर यानी लगभग 18,760 करोड़ रुपये बताई गई है. दूसरे नंबर पर मौजूद क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया की अनुमानित नेटवर्थ करीब 79 मिलियन डॉलर है. इस तरह दोनों बोर्डों की अनुमानित नेटवर्थ में काफी बड़ा अंतर है.
IPL ने BCCI को बनाया आर्थिक महाशक्ति
बीसीसीआई की कमर्शियल ताकत में इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) की सबसे अहम भूमिका है. आईपीएल ने भारत में क्रिकेट को सिर्फ खेल नहीं, बल्कि एक बड़े स्पोर्ट्स-एंटरटेनमेंट बिजनेस में बदल दिया है. 2023 से 2027 के चक्र के लिए आईपीएल के मीडिया राइट्स 6.2 अरब डॉलर से ज्यादा में बेचे गए थे. इसके अलावा बीसीसीआई को इंटरनेशनल क्रिकेट, स्पॉन्सरशिप, टिकट बिक्री और अन्य कमर्शियल गतिविधियों से भी आय होती है. महिला क्रिकेट के लिए शुरू की गई विमेंस प्रीमियर लीग (WPL) ने भी बीसीसीआई के कमर्शियल पोर्टफोलियो में एक नई बड़ी संपत्ति जोड़ी है.
क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया दूसरे नंबर पर
इस सूची में क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया 79 मिलियन डॉलर की अनुमानित नेटवर्थ के साथ दूसरे स्थान पर है. ऑस्ट्रेलिया के क्रिकेट बिजनेस में इंटरनेशनल क्रिकेट के अलावा बिग बैश लीग (BBL) की भी अहम भूमिका है. ब्रॉडकास्टिंग राइट्स, स्पॉन्सरशिप, घरेलू क्रिकेट और टी20 प्रतियोगिताओं से होने वाली आय क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया के प्रमुख कमर्शियल स्रोतों में शामिल है. हालांकि अनुमानित नेटवर्थ के मामले में वह बीसीसीआई से काफी पीछे है.
ECB तीसरे और PCB चौथे नंबर पर
| रैंक | क्रिकेट बोर्ड | अनुमानित नेटवर्थ |
| 1 | बीसीसीआई (भारत) | 2.2 अरब डॉलर (₹18,760 करोड़) |
| 2 | क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया | 79 मिलियन डॉलर (₹674 करोड़) |
| 3 | ईसीबी (इंग्लैंड और वेल्स) | 59 मिलियन डॉलर (₹503 करोड़) |
| 4 | पीसीबी (पाकिस्तान) | 55 मिलियन डॉलर (₹469 करोड़) |
| 5 | बीसीबी (बांग्लादेश) | 51 मिलियन डॉलर (₹435 करोड़) |
| 6 | क्रिकेट साउथ अफ्रीका | 47 मिलियन डॉलर (₹401 करोड़) |
| 7 | जिम्बाब्वे क्रिकेट | 38 मिलियन डॉलर (₹324 करोड़) |
| 8 | श्रीलंका क्रिकेट | 20 मिलियन डॉलर (₹171 करोड़) |
| 9 | क्रिकेट वेस्टइंडीज | 15 मिलियन डॉलर (₹128 करोड़) |
| 10 | न्यूजीलैंड क्रिकेट | 9 मिलियन डॉलर (₹77 करोड़) |
इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ECB) करीब 59 मिलियन डॉलर की अनुमानित नेटवर्थ के साथ तीसरे स्थान पर है. इंग्लैंड के इंटरनेशनल मैच, घरेलू क्रिकेट, मीडिया राइट्स और स्पॉन्सरशिप बोर्ड की कमाई के प्रमुख स्रोत हैं. इसके अलावा द हंड्रेड भी इंग्लैंड के क्रिकेट बिजनेस का महत्वपूर्ण हिस्सा है. वहीं पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) 55 मिलियन डॉलर की अनुमानित नेटवर्थ के साथ चौथे नंबर पर है. पाकिस्तान सुपर लीग (PSL), इंटरनेशनल क्रिकेट, ब्रॉडकास्टिंग राइट्स, स्पॉन्सरशिप और टिकट बिक्री PCB के प्रमुख कमर्शियल स्रोत हैं.
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पाकिस्तान-बांग्लादेश के बीच सिर्फ 4 मिलियन डॉलर का अंतर
बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) 51 मिलियन डॉलर की अनुमानित नेटवर्थ के साथ पांचवें स्थान पर है. बांग्लादेश प्रीमियर लीग (BPL), मीडिया राइट्स, स्पॉन्सरशिप और टिकट बिक्री से बोर्ड को कमाई होती है. PCB और BCB की अनुमानित नेटवर्थ में सिर्फ 4 मिलियन डॉलर का अंतर है. इसलिए टॉप-10 में चौथे और पांचवें स्थान के बीच काफी करीबी मुकाबला देखने को मिलता है.
दक्षिण अफ्रीका और जिम्बाब्वे भी टॉप-10 में
क्रिकेट साउथ अफ्रीका (CSA) 47 मिलियन डॉलर की अनुमानित नेटवर्थ के साथ छठे स्थान पर है. इंटरनेशनल क्रिकेट, ब्रॉडकास्टिंग राइट्स, स्पॉन्सरशिप और घरेलू प्रतियोगिताएं उसकी आय के प्रमुख स्रोतों में शामिल हैं. इसके बाद जिम्बाब्वे क्रिकेट 38 मिलियन डॉलर की अनुमानित नेटवर्थ के साथ सातवें नंबर पर है.
क्रिकेट बोर्डों की कमाई कैसे होती है?
आज क्रिकेट बोर्डों की आर्थिक स्थिति सिर्फ इंटरनेशनल मैचों पर निर्भर नहीं है. मीडिया और डिजिटल राइट्स, स्पॉन्सरशिप, टिकट बिक्री, स्टेडियम विज्ञापन, मर्चेंडाइजिंग और फ्रेंचाइजी लीग उनकी आय के प्रमुख स्रोत बन चुके हैं. खास तौर पर टी20 लीग ने क्रिकेट की अर्थव्यवस्था को काफी बदल दिया है. भारत में IPL, ऑस्ट्रेलिया में BBL, पाकिस्तान में PSL, बांग्लादेश में BPL, वेस्टइंडीज में CPL और श्रीलंका में LPL ने क्रिकेट बोर्डों को अतिरिक्त कमर्शियल प्लेटफॉर्म दिए हैं. इसके अलावा ICC से मिलने वाला राजस्व भी बोर्डों की आर्थिक स्थिति में अहम भूमिका निभाता है.
