नयी दिल्ली : उच्चतम न्यायालय ने बीसीसीआई के मुख्य वित्तीय अधिकारी (सीएफओ) संतोष रांगनेकर को हाल में धमकी देने के आरोपों पर बोर्ड के कोषाध्यक्ष अनिरुद्ध चौधरी से जवाब मांगा है. प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति एएम खानविलकर और न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड की पीठ ने चौधरी को दो हफ्तों के भीतर सीएफओ के आरोपों पर जवाब देने को कहा है.
बीसीसीआई कोषाध्यक्ष की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता पुनीत बाली ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि उन्होंने कभी सीएफओ को धमकी नहीं दी. न्याय मित्र के रुप में पीठ की सहायता कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल सुब्रमण्यम ने कहा कि प्रशासकों की समिति (सीओए) के प्रमुख विनोद राय को सीएफओ का ईमेल मिला जिसमें आरोप लगाया गया है कि चौधरी ने तीन मौकों पर उन्हें धमकी दी.
उच्चतम न्यायालय ने साथ ही सीओए को एक चार्ट दाखिल करने को कहा है जिसमें बीसीसीआई के मसौदा संविधान पर प्रतिक्रिया और सुझाव हों. इस मामले की सुनवाई अगले साल जनवरी के दूसरे हफ्ते में तय की गई है. उच्चतम न्यायालय द्वारा नियुक्त सीओए ने सीलबंध लिफाफे में 11 सितंबर को उसे मसौदा संविधान सौंपा था.
इस बीच क्रिकेट एसोसिएशन आफ बिहार ने अपने सचिव आदित्य वर्मा के जरिये अपनी उस याचिका का वापस लेना चाहा जिसमें सीओए को यह निर्देश देने को कहा गया था कि राज्य क्रिकेट संस्था को इस आधार पर सदस्यता देने पर विचार किया जाए कि इतनी बड़ी जनसंख्या प्रतिनिधित्व के बिना नहीं रह सकती.
वर्मा ने कहा कि क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बिहार अब राज्य क्रिकेट संस्था को मान्यता देने के लिए सीओए से संपर्क करेगा जिससे कि युवाओं को राज्य और राष्ट्र का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिल सके.
