फीफा विश्व कप 2026 के सेमीफाइनल मुकाबलों से पहले जर्मनी के महान गोलकीपर ओलिवर कान ने फ्रांस को खिताब जीतने का सबसे मजबूत दावेदार बताया है. उनके अनुसार फ्रांसीसी टीम के पास संतुलित संयोजन, मजबूत बेंच स्ट्रेंथ और अलग-अलग परिस्थितियों में मैच जीतने की क्षमता है, जो उसे बाकी दावेदारों से थोड़ा आगे खड़ा करती है.
फ्रांस का सामना पहले सेमीफाइनल में 15 जुलाई को डलास में स्पेन से होगा. विश्व कप के नॉकआउट चरण में दोनों टीमें दूसरी बार आमने-सामने होंगी. इससे पहले 2006 विश्व कप के राउंड ऑफ-16 में फ्रांस ने स्पेन को 3-1 से हराया था.
जी5 से बात करते हुए ओलिवर कान ने क्या कहा?
'जी5' से बातचीत में कान ने कहा, “अगर अब तक के प्रदर्शन के आधार पर किसी एक टीम को चुनना हो, तो मैं फ्रांस का नाम लूंगा. टीम में बेहतरीन संतुलन है, खिलाड़ियों की गहराई है और वे अलग-अलग तरीकों से मुकाबले जीत सकते हैं. हालांकि, सेमीफाइनल में पहुंची चारों टीमों के बीच अंतर बहुत कम है और इनमें से कोई भी विश्व कप जीत सकती है.”
कान ने स्पेन और फ्रांस के बीच होने वाले मुकाबले को टूर्नामेंट की सबसे दिलचस्प रणनीतिक भिड़ंत बताया. उनके मुताबिक स्पेन की ताकत गेंद पर नियंत्रण और लगातार आक्रमण है, जबकि फ्रांस तेज पलटवार के जरिए विरोधी टीम को नुकसान पहुंचाने में माहिर है.
मिडफील्ड की जंग तय कर सकती है मैच का नतीजा
उन्होंने कहा कि मुकाबले का नतीजा काफी हद तक मिडफील्ड की लड़ाई पर निर्भर करेगा. “सिर्फ दबाव बनाना काफी नहीं होगा. सही समय पर प्रेसिंग करना और विपक्षी टीम को मिडफील्ड से खेलने से रोकना बेहद अहम होगा. जो टीम इस क्षेत्र पर नियंत्रण बनाए रखेगी, उसकी जीत की संभावना अधिक होगी.”
स्पेन को सलाह देते हुए कान ने कहा कि फ्रांस के मजबूत डिफेंस को तोड़ने के लिए धैर्य और सटीक पासिंग की जरूरत होगी. साथ ही स्पेन को अपने रक्षात्मक संतुलन का भी ध्यान रखना होगा, क्योंकि फ्रांस दुनिया की सबसे खतरनाक काउंटर-अटैकिंग टीमों में से एक है.
आधुनिक फुटबॉल में बदल चुकी है गोलकीपर की भूमिका
अपने गोलकीपिंग अनुभव का जिक्र करते हुए कान ने आधुनिक फुटबॉल में गोलकीपर की बदलती भूमिका पर भी प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि आज का गोलकीपर सिर्फ शॉट रोकने वाला खिलाड़ी नहीं, बल्कि हमलों की शुरुआत करने वाला और टीम की संरचना को नियंत्रित करने वाला अहम हिस्सा भी है.
कान ने कहा, “आज के दौर में गोलकीपर पहले अटैकर और आखिरी डिफेंडर दोनों की भूमिका निभाता है. उसका एक सही फैसला या एक गलती पूरे मैच का रुख बदल सकती है. बड़ी टीमें दबाव की परिस्थितियों में भी अपने गेम प्लान पर कायम रहती हैं और भावनाओं पर नियंत्रण रखते हुए सही फैसले लेती हैं.”
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