MCA Equal Pay Contract 2026: मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन (MCA) ने घरेलू क्रिकेट को लेकर एक ऐसी पहल की है, जिसका असर सिर्फ मुंबई के खिलाड़ियों तक सीमित नहीं रह सकता. MCA ने पहली बार पुरुष और महिला क्रिकेटरों के लिए सालाना रिटेनर कॉन्ट्रैक्ट शुरू किए हैं. इसके साथ ही वह ऐसा करने वाला देश का पहला राज्य क्रिकेट संघ बन गया है.
BCCI कॉन्ट्रैक्ट से बाहर खिलाड़ियों को मिलेगा आर्थिक सहारा
इस योजना का सबसे बड़ा फायदा उन खिलाड़ियों को होगा, जो BCCI के सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट में शामिल नहीं हैं या उसके टारगेट ग्रुप का हिस्सा नहीं हैं. कुल 22 खिलाड़ियों को कॉन्ट्रैक्ट दिया गया है, जिनमें 14 पुरुष और 8 महिला खिलाड़ी हैं. MCA ने खिलाड़ियों को तीन ग्रेड में बांटा है. ग्रेड A के खिलाड़ियों को सालाना ₹12 लाख, ग्रेड B को ₹8 लाख और ग्रेड C को ₹6 लाख मिलेंगे. खास बात यह है कि पुरुष और महिला खिलाड़ियों के लिए रकम में कोई अंतर नहीं रखा गया है.
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सिद्धेश लाड और शम्स मुलानी को सबसे ज्यादा रकम
पुरुषों में सिद्धेश लाड और शम्स मुलानी को ग्रेड A में जगह मिली है. मोहित अवस्थी, आकाश आनंद और हार्दिक तामोरे ग्रेड B में हैं. सैराज पाटिल और हिमांशु सिंह समेत आठ खिलाड़ियों को ग्रेड C में रखा गया है. महिला खिलाड़ियों में हुमैरा काजी और वृशाली भगत ग्रेड A में हैं. सनिका चालके को ग्रेड B, जबकि फातिमा जाफर समेत पांच खिलाड़ियों को ग्रेड C में जगह मिली है.
रिटेनर के साथ मैच फीस और इंसेंटिव भी
खिलाड़ियों को सिर्फ सालाना रिटेनर ही नहीं मिलेगा. MCA के मुताबिक उन्हें मैच फीस, डेली अलाउंस और प्रदर्शन के आधार पर इंसेंटिव भी दिए जाएंगे. यानी घरेलू सीजन में अच्छा प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों की कुल कमाई इससे और बढ़ सकती है.
अजिंक्य रहाणे के नाम पर स्कॉलरशिप फंड
MCA ने पूर्व भारतीय बल्लेबाज अजिंक्य रहाणे के सम्मान में स्कॉलरशिप फंड भी शुरू किया है. इसका मकसद जमीनी स्तर के क्रिकेटरों को आगे बढ़ने में मदद करना है. MCA के मुताबिक पूर्व अध्यक्ष शरद पवार ने भी इस फंड में योगदान दिया है.
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घरेलू क्रिकेट को प्राथमिकता देने की बढ़ती मांग
घरेलू क्रिकेटरों की आर्थिक स्थिति को लेकर लंबे समय से चर्चा होती रही है. BCCI ने भी टेस्ट क्रिकेट को प्राथमिकता देने के लिए अपने सेंट्रली कॉन्ट्रैक्ट वाले पुरुष खिलाड़ियों के लिए अलग इंसेंटिव स्कीम शुरू की है. ऐसे में MCA का यह कदम खास माना जा रहा है, क्योंकि राज्य स्तर पर पहली बार पुरुष और महिला घरेलू खिलाड़ियों को नियमित सालाना आर्थिक सुरक्षा देने की व्यवस्था शुरू हुई है. इससे दूसरे राज्य क्रिकेट संघों पर भी अपने घरेलू खिलाड़ियों के लिए ऐसी योजनाएं शुरू करने की उम्मीद बढ़ सकती है.
