Manu Bhaker: दादी को अंतिम विदाई देते हुए भावुक हुईं मनु, पोस्ट में लिखा- ‘आप हमेशा दिलों में रहेंगी’

स्टार निशानेबाज मनु भाकर अपने दादी दया कौर के निधन से बेहद भावुक हैं. भोपाल में ट्रेनिंग कैंप छोड़कर पैतृक गांव पहुंचीं मनु ने दादी को अंतिम विदाई दी. दादी की पार्थिव देह को कंधा देते हुए मनु की आंखें नम थीं.

Manu Bhaker Post: पेरिस ओलिंपिक में भारत का नाम रोशन कManu Bhaker: दादी को अंतिम विदाई देते हुए भावुक हुई मनु, पोस्ट में लिखा- ‘आप हमेशा दिलों में रहेंगी’रने वाली स्टार निशानेबाज मनु भाकर बुधवार को बेहद भावुक नजर आईं. 84 वर्षीय दादी दया कौर के निधन के बाद मनु भोपाल में चल रहा ट्रेनिंग कैंप छोड़कर अपने पैतृक गांव गोरिया पहुंचीं और दादी को अंतिम विदाई दी. दया कौर का मंगलवार को रोहतक के एक निजी अस्पताल में निधन हुआ था. दादी की अंतिम यात्रा के दौरान मनु ने उनके पार्थिव शरीर को कंधा दिया. दादी को अंतिम विदाई देने के बाद मनु भाकर ने सोशल मीडिया पर एक भावुक पोस्ट साझा कर अपना दर्द बयां किया.

दादी की खबर मिलते ही ट्रेनिंग कैंप छोड़ गांव पहुंचीं मनु

दया कौर को सीने में दर्द की शिकायत के बाद रोहतक के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था. वह उम्र संबंधी स्वास्थ्य समस्याओं से भी जूझ रही थीं. मंगलवार को इलाज के दौरान उनका निधन हो गया. दादी के निधन की खबर मिलते ही भोपाल में एशियन गेम्स की तैयारी कर रही मनु तुरंत अपने पैतृक गांव के लिए रवाना हो गईं.

परिवार के मुताबिक, मनु और उनकी दादी के बीच खास लगाव था. दया कौर अपनी पोती को बेहद प्यार करती थीं और मनु की उपलब्धियों को लेकर हमेशा उत्साहित रहती थीं. वह मनु के खेल सफर को करीब से देखती थीं और उनकी सफलता पर गर्व महसूस करती थीं.

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इंस्टाग्राम पोस्ट पर छलका मनु का दर्द

दादी दया कौर को अंतिम विदाई देने के बाद मनु भाकर ने सोशल मीडिया पर एक बेहद भावुक पोस्ट भी साझा की. उन्होंने अपनी दादी को श्रद्धांजलि देते हुए लिखा कि भारी मन से उन्होंने उन्हें अंतिम प्रणाम किया.

मनु ने अपनी पोस्ट में लिखा, 'बहुत भारी दिल के साथ मैंने अपनी दादी को अंतिम श्रद्धांजलि दी. हवन और अन्य अंतिम संस्कार की रस्में 18 सितंबर को गोरिया गांव में होंगी. दादी जी, आप हमेशा हमारे दिलों में रहेंगी.'

पोती की ओलिंपिक सफलता की गवाह बनी थीं दया कौर

पेरिस ओलिंपिक 2024 में मनु भाकर ने शानदार प्रदर्शन करते हुए दो कांस्य पदक जीते थे. वह एक ही ओलिंपिक में दो पदक जीतने वाली आजाद भारत की पहली भारतीय एथलीट बनी थीं.

मनु की इस ऐतिहासिक उपलब्धि को उनकी दादी दया कौर ने गांव से ही देखा था. उन्होंने पोती की सफलता पर खुशी जताई थी. रिपोर्टों के मुताबिक, दया कौर मनु के जीवन और करियर से काफी जुड़ी हुई थीं.

मनु के लिए दादी का जाना इसलिए भी बेहद भावुक पल है, क्योंकि वह उनके करियर की कई बड़ी उपलब्धियों की गवाह रही थीं. उनकी मौजूदगी मनु के लिए परिवार के साथ-साथ भावनात्मक सहारे का भी हिस्सा थी.

मनु की शूटिंग तैयारियों पर पड़ा असर

दादी के निधन के बाद मनु भाकर की शूटिंग से जुड़ी गतिविधियां फिलहाल प्रभावित हुई हैं. वह इस मुश्किल समय में अपने परिवार के साथ हैं. भारतीय निशानेबाजी टीम को एशियन गेम्स 2026 के लिए 15 सितंबर को रवाना होना है. ऐसे में मनु की टीम के साथ आगे की यात्रा और ट्रेनिंग को लेकर स्थिति बाद में स्पष्ट होगी.

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लेखक के बारे में

By अभिजीत कुमार

अभिजीत कुमार युवा पत्रकार हैं, जिन्हें खेल और खासकर क्रिकेट की दुनिया को करीब से समझने और उसकी अनकही कहानियों को पाठकों तक पहुंचाने का जुनून है. उन्होंने भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), ढेंकानाल से पत्रकारिता एवं जनसंचार की पढ़ाई की है. अपने पेशेवर सफर में उन्होंने रिपोर्टिंग, सब-एडिटिंग, पेज डिजाइन और डिजिटल कंटेंट के क्षेत्र में काम किया है.

वर्तमान में वह स्पोर्ट्स डेस्क पर कार्यरत हैं, जहां खेल जगत से जुड़ी खबरों के लेखन, संपादन और प्रस्तुतीकरण की जिम्मेदारी संभालते हैं. क्रिकेट उनके लिए सिर्फ एक खेल नहीं, बल्कि आंकड़ों, रोमांच, संघर्ष और भावनाओं से जुड़ी कहानियों की दुनिया है. खिलाड़ियों के प्रदर्शन से लेकर मैदान के पीछे की दिलचस्प घटनाओं तक, वह हर कहानी को सरल, सटीक और रोचक अंदाज में पेश करने की कोशिश करते हैं.

उनका मानना है कि एक अच्छी स्पोर्ट्स स्टोरी सिर्फ खबर नहीं बताती, बल्कि पाठक को उस पल का हिस्सा महसूस कराती है. यही सोच उनके लेखन की पहचान है और यही वजह है कि उनके आर्टिकल्स में खबर के साथ कहानी, संदर्भ और क्रिकेट का जुनून भी नजर आता है.

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