टीम इंडिया के कोच ने कहा- रोहित और कोहली के फॉर्म पर सवाल उठाना जल्दबाजी, अभी उनमें काफी क्रिकेट शेष

Rohit and Kohli form : ऑस्ट्रेलिया के साथ खेले गए पहले वनडे मैच में ना सिर्फ भारत को हार मिली बल्कि टीम इंडिया के दिग्गज क्रिकेटर्स रोहित शर्मा और विराट कोहली के प्रदर्शन पर भी सवाल खड़े हो गए है, जो महज 8 और 0 रन पर आउट हुए थे.

Rohit and Kohli form : ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेले जा रहे पहले वनडे में रोहित शर्मा और विराट कोहली का प्रदर्शन उम्मीद के अनुरूप नहीं रहा, इससे एक ओर जहां उनके परफार्मेंस पर सवाल उठ रहे हैं, वहीं भारत के बल्लेबाजी कोच सीतांशु कोटक उनके फॉर्म को लेकर चिंतित नहीं हैं. सीतांशु कोटक का मानना है कि ये सीनियर खिलाड़ी अच्छी लय में हैं और अगले दो मैचों में अच्छा प्रदर्शन करेंगे. भारत पर्थ में पहला मैच सात विकेट से हार गया था और अब वह गुरुवार को यहां श्रृंखला का दूसरा मैच खेलेगा.

पर्थ में रोहित के आठ रन और कोहली के शून्य पर आउट होने के बारे में सीतांशु कोटक ने कहा कि मुझे नहीं लगता कि रोहित और कोहली की बल्लेबाजी कमजोर है. वे आईपीएल में खेले थे और उनकी तैयारी काफी अच्छी रही है. मुझे लगता है कि दोनों के पास काफी अनुभव है और उम्मीद की जानी चाहिए कि आने वाले मैचों में ये दोनों स्टार खिलाड़ी बेहतरीन प्रदर्शन करेंगे. उन्होंने कहा कि कोई भी खिलाड़ी हर मैच में नहीं चल पाता है, ऐसे में उनके फॉर्म पर सवाल उठाना जल्दबाजी होगी. कोटक ने कहा -मुझे लगता है कि वे दोनों बहुत अच्छी लय में दिख रहे हैं. उन्होंने कल वाकई अच्छी बल्लेबाजी की.

सीतांशु कोटक ने कहा कि हम उनकी तैयारियों और उनकी फिटनेस की स्थिति से अच्छी तरह वाकिफ थे. वे कभी-कभी राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी जाते हैं. हमें वहां से अपडेट और वीडियो मिलते हैं. वे क्या कर रहे हैं, उनकी अभ्यास दिनचर्या, फिटनेस संबंधी काम इन सब की हमें जानकारी थी. अगर जरूरी ना हो तो सीनियर खिलाड़ियों के मामले में हस्तक्षेप नहीं किया जाता है. पहले वनडे मैच में ऑस्ट्रेलिया ने भारत को 7 विकेट से हरा दिया था, इसकी वजह बारिश भी हो सकती है क्योंकि मैच 26-26 ओवर का और कई बार बाधित भी हुआ था.

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Author: Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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