IPL Trade: आईपीएल 2026 समाप्त हुए अभी ज्यादा समय नहीं हुआ है, लेकिन अगले सीजन से पहले ही एक बड़ा खिलाड़ी ट्रेड चर्चा का विषय बन गया है. लखनऊ सुपर जायंट्स (LSG) और दिल्ली कैपिटल्स (DC) के बीच हुए हाई-प्रोफाइल सौदे में ऋषभ पंत और कुलदीप यादव ने अपनी-अपनी फ्रेंचाइजी बदल ली है.
इस ट्रेड के तहत ऋषभ पंत एक बार फिर दिल्ली कैपिटल्स की जर्सी में नजर आएंगे, जबकि भारतीय स्पिनर कुलदीप यादव अब लखनऊ सुपर जायंट्स का प्रतिनिधित्व करेंगे. इसे आईपीएल इतिहास के सबसे बड़े खिलाड़ी आदान-प्रदान में से एक माना जा रहा है.
दो साल फिर पंत की घर वापसी
ऋषभ पंत ने 2016 से 2024 तक दिल्ली कैपिटल्स के लिए खेलते हुए खुद को टीम के सबसे अहम खिलाड़ियों में शामिल किया था. इस दौरान उन्होंने फ्रेंचाइजी के लिए 111 मैच खेले, जो किसी भी खिलाड़ी द्वारा दिल्ली के लिए सबसे ज्यादा मैचों का रिकॉर्ड है. पंत ने टीम की कप्तानी भी संभाली और 2021 से 2024 के बीच 43 मुकाबलों में नेतृत्व किया. अब वह एक बार फिर उसी फ्रेंचाइजी का हिस्सा बन गए हैं, जहां से उनकी आईपीएल यात्रा ने नई ऊंचाइयों को छुआ था.
27 करोड़ से घटकर 15 करोड़ हुई सैलरी
आईपीएल 2025 मेगा ऑक्शन में लखनऊ सुपर जायंट्स ने ऋषभ पंत को 27 करोड़ रुपये की रिकॉर्ड बोली लगाकर खरीदा था. यह आईपीएल इतिहास की सबसे बड़ी बोली थी. 2026 सीजन के लिए भी उन्हें इसी रकम पर रिटेन किया गया था. हालांकि दिल्ली कैपिटल्स में वापसी के बाद उनकी सैलरी में बड़ी कमी आई है. ट्रेड के तहत पंत अब 15 करोड़ रुपये की कीमत पर दिल्ली टीम का हिस्सा बने हैं.
कुलदीप यादव को मिला नया ठिकाना
दूसरी ओर, कुलदीप यादव का दिल्ली कैपिटल्स के साथ पांच सीजन का सफर समाप्त हो गया है. 2022 में फ्रेंचाइजी से जुड़ने के बाद उन्होंने 65 मैचों में 72 विकेट लेकर खुद को लीग के सबसे प्रभावी स्पिनरों में स्थापित किया. हाल के समय में उनका प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा, लेकिन भारतीय टीम के प्रमुख व्हाइट-बॉल गेंदबाजों में शामिल कुलदीप अब 13.50 करोड़ रुपये की अपनी मौजूदा फीस के साथ लखनऊ सुपर जायंट्स के लिए खेलेंगे.
कप्तानी विवाद के बाद अलग हुए पंत?
ऋषभ पंत का लखनऊ से अलग होना केवल एक सामान्य ट्रेड नहीं माना जा रहा है. आधिकारिक तौर पर कहा गया कि उन्होंने कप्तानी छोड़ने का फैसला किया था, लेकिन रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि टीम के खराब प्रदर्शन के बाद फ्रेंचाइजी प्रबंधन ने नेतृत्व में बदलाव का मन बना लिया था. बताया जाता है कि टीम के नतीजों के लिए पंत को काफी हद तक जिम्मेदार ठहराया गया और उन्हें मैनेजमेंट का पूरा समर्थन भी नहीं मिला. इसी वजह से दोनों पक्षों के रास्ते अलग हुए और आखिरकार दिल्ली कैपिटल्स में उनकी वापसी का रास्ता साफ हो गया.
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