Harmanpreet Kaur biggest tension: पहली बार टी20 वर्ल्ड कप जीतने का सपना देख रही मौजूदा वनडे चैंपियन भारतीय टीम का सफर उतार-चढ़ाव भरा नजर आ रहा है. हरमनप्रीत कौर की कप्तानी में भारत ने पाकिस्तान और नीदरलैंड को करारी शिकस्त देकर टूर्नामेंट की शानदार शुरुआत की थी. मगर जैसे ही उसका सामना दक्षिण अफ्रीका जैसी मजबूत टीम से हुआ, भारत को हार झेलनी पड़ी. भले ही टीम इंडिया की सेमीफाइनल की राह अभी आसान दिख रही हो, लेकिन तेज गेंदबाजों के लचर प्रदर्शन ने खिताब जीतने की उसकी तैयारियों पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं.
बेअसर पेस अटैक ने बढ़ाईं मुश्किलें
इंग्लैंड में जारी विमेंस टी20 वर्ल्ड कप 2026 में भारतीय टीम दोहरे संकट से जूझ रही है. एक तरफ कप्तान हरमनप्रीत कौर की आउट-ऑफ-फॉर्म बैटिंग के चलते पूरी बल्लेबाजी लाइन-अप दबाव में है, तो दूसरी तरफ तेज गेंदबाजों का लचर प्रदर्शन भी चिंता का सबब बना हुआ है. पेसर्स के बेअसर होने के कारण गेंदबाजी का पूरा बोझ सिर्फ स्पिनर्स को उठाना पड़ रहा है.
विमेंस टी20 वर्ल्ड कप में स्पिनर्स के भरोसे टीम इंडिया
भारतीय टीम ने इस वर्ल्ड कप में अब तक 3 मैच खेले हैं, जहाँ गेंदबाजी का पूरा भार दीप्ति शर्मा और श्री चरणी समेत स्पिनर्स की टुकड़ी ने उठा रखा है. टीम ने क्रांति गौड़, अरुंधति रेड्डी और नंदनी शर्मा के रूप में तीन तेज गेंदबाजों का इस्तेमाल तो किया, लेकिन वे गेंदबाजी में वो संतुलन पैदा करने में नाकाम रहे जो बाकी टीमों में दिख रहा है. आंकड़े बताते हैं कि भारतीय तेज गेंदबाजों ने इस टूर्नामेंट में कुल 15.1 ओवर फेंके हैं, जिसमें उन्हें सिर्फ 2 सफलताएं मिली हैं. हालांकि, ये दोनों विकेट नंदनी शर्मा को नीदरलैंड के खिलाफ मिले थे. वहीं दूसरी तरफ, स्पिनर्स ने अकेले दम पर 21 विकेट झटके हैं. साफ है कि टीम इंडिया पूरी तरह स्पिन फ्रेंडली रणनीति पर चल रही है, लेकिन तेज गेंदबाजों का यह फ्लॉप शो आगे भारी पड़ सकता है.
क्यों दूसरी टीमों से पीछे छूट रही है टीम इंडिया
खिताबी रेस में शामिल दूसरी टीमों और भारत के बीच का यह अंतर आंकड़ों से और साफ हो जाता है. ऑस्ट्रेलिया को ही लें, तो उसके कुल 27 विकेटों में से 14 स्पिनर्स और 13 तेज गेंदबाजों ने लिए हैं, जो एक बेहतरीन संतुलन को दर्शाता है. इंग्लैंड की कहानी भी ऐसी ही है, जहां 4 मैचों में स्पिनर्स ने 19 और पेसर्स ने 11 विकेट बांटे हैं. दूसरी तरफ, दक्षिण अफ्रीका का रुख भारत से बिल्कुल विपरीत है, जिसके तेज गेंदबाजों ने अकेले ही 20 में से 17 विकेट झटके हैं. ऐसे में जाहिर है कि सिर्फ स्पिन के भरोसे खिताब नहीं जीता जा सकता; टीम इंडिया को टूर्नामेंट में आगे बढ़ने के लिए अपने पेस अटैक पर भरोसा जताना ही होगा और गेंदबाजों को भी अपनी लाइन-लेंथ सुधारनी होगी.
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