Gautam Gambhir: भारतीय क्रिकेट टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर के लिए 2026 का साल अब तक कामयाबी और सवालों, दोनों से भरा रहा है. उनकी कोचिंग में भारत ने चैंपियंस ट्रॉफी 2025 और टी-20 वर्ल्ड कप 2026 जैसे बड़े खिताब जीते हैं. लेकिन दूसरी तरफ इंग्लैंड और आयरलैंड के खिलाफ टी-20 सीरीज में टीम के प्रदर्शन ने रणनीति और टीम कॉम्बिनेशन पर सवाल भी खड़े किए हैं.
टी-20 में ‘हाई रिस्क, हाई रिवॉर्ड’ का फॉर्मूला
गंभीर की टी-20 सोच काफी साफ है कि
डरकर नहीं, दबाव बनाकर क्रिकेट खेलना. 2026 वर्ल्ड कप में यही रणनीति भारत के काम आई और टीम चैंपियन बनी. गंभीर का मानना है कि टी-20 में जरूरत से ज्यादा संभलकर खेलने से बड़ा स्कोर बनाना मुश्किल होता है. लेकिन यही रणनीति हर मैच में काम करे, यह जरूरी नहीं. इंग्लैंड के खिलाफ भारत को 125 रन की बड़ी हार झेलनी पड़ी तो गंभीर ने खुद माना कि बल्लेबाजों को परिस्थितियों को बेहतर तरीके से पढ़ने और जरूरत के हिसाब से खेल बदलने की जरूरत है.
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वर्ल्ड चैंपियन टीम में भी बदलाव की चुनौती
टी-20 वर्ल्ड कप जीतने वाली टीम और उसके बाद मैदान पर उतरने वाली टीम में कई बदलाव देखने को मिले. नए खिलाड़ियों को मौका देना जरूरी है, लेकिन सवाल यह है कि उन्हें किस भूमिका में और किस समय उतारा जाए. संजू सैमसन जैसे खिलाड़ियों के बाहर होने और युवा वैभव सूर्यवंशी को मौका देने जैसे फैसलों पर भी बहस हुई. गंभीर के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि युवा खिलाड़ियों को मौका देते हुए अनुभवी खिलाड़ियों का संतुलन न बिगड़े.
वनडे में तस्वीर थोड़ी अलग है
टी-20 के मुकाबले वनडे क्रिकेट में रणनीति ज्यादा लंबी होती है. यहां शुरुआती 10 ओवरों की आक्रामक बल्लेबाजी के साथ बीच के ओवरों में विकेट बचाना और आखिरी ओवरों में तेजी लाना भी जरूरी है. भारत अभी वनडे में सही संयोजन तलाश रहा है और 2027 वर्ल्ड कप को देखते हुए यह काम और अहम हो गया है.
खिलाड़ियों की भूमिका तय करना सबसे बड़ा काम
गंभीर के सामने अब सिर्फ मैच जिताने की चुनौती नहीं है, बल्कि ऐसी टीम तैयार करने की जिम्मेदारी भी है जो अलग-अलग परिस्थितियों में अपनी रणनीति बदल सके. टी-20 में जहां जोखिम लेना फायदेमंद हो सकता है, वहीं वनडे में हर गेंद पर हमला करना उल्टा भी पड़ सकता है. यानी गंभीर को अपनी आक्रामक सोच छोड़नी नहीं है, बल्कि उसे हालात के मुताबिक ढालना है. आने वाले महीनों में यही तय करेगा कि उनकी रणनीति सिर्फ टी-20 की कामयाबी तक सीमित रहती है या वनडे में भी भारत को एक मजबूत और स्थिर टीम दे पाती है.
