Jacob Martin: पूर्व भारतीय क्रिकेटर और वडोदरा निवासी जैकब मार्टिन को 22 साल पुराने आपराधिक मामले में पटियाला हाउस कोर्ट ने सभी आरोपों से बरी कर दिया है. यह मामला 2004 में दर्ज FIR से जुड़ा था. मार्टिन पर IPC की धारा 420, 468, 471 और 120B के साथ पासपोर्ट एक्ट की धारा 12 के तहत आरोप लगाए गए थे.
फर्जी UK इमिग्रेशन स्टांप से जुड़ा था मामला
मामला उस समय सामने आया था, जब 2004 में इंग्लैंड खेलने गई एक टीम का एक सदस्य तय समय से ज्यादा UK में रुक गया था. मार्टिन के मुताबिक, उस खिलाड़ी ने वहां फर्जी इमिग्रेशन स्टांप लगवाया और भारत लौटने पर IGI एयरपोर्ट पर पकड़ा गया. इसके बाद हुई जांच में मार्टिन का नाम भी मामले से जोड़ दिया गया.
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कोर्ट में आरोप साबित नहीं हो सके
अदालत में मार्टिन के खिलाफ फर्जी दस्तावेज, यात्रा की व्यवस्था और पैसों के लेन-देन से जुड़े आरोपों को साबित करने के लिए ठोस सबूत नहीं मिले. कोर्ट ने यह भी कहा कि उनके वित्तीय लेन-देन या अजवा स्पोर्ट्स क्लब पर उनके मालिकाना हक या नियंत्रण को लेकर कोई विश्वसनीय सबूत नहीं था. कई गवाह भी आरोपों की पुष्टि नहीं कर सके.
‘FIR में मेरा नाम तक नहीं था’
मीडिया से बातचीत में मार्टिन ने कहा कि मूल FIR में उनका नाम नहीं था. उनका दावा है कि जांच के दौरान उनका नाम इसलिए जोड़ा गया, क्योंकि वह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर थे और उनका प्रोफाइल बड़ा था. उन्होंने कहा कि इस मामले की वजह से उन्हें लंबे समय तक तनाव झेलना पड़ा.
‘रेलवे की नौकरी भी चली गई’
मार्टिन ने बताया कि 22 साल तक चले इस मामले के कारण उन्हें रेलवे की नौकरी गंवानी पड़ी और BCCI की ओर से भी उन्हें कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला. अब अदालत से बरी होने के बाद उन्होंने इसे अपनी जिंदगी का बड़ा मोड़ बताया है. जैकब मार्टिन भारत के लिए 10 वनडे खेल चुके हैं. दाएं हाथ के इस बल्लेबाज ने 10 मैचों में 158 रन बनाए थे.
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