पेले से लेकर गावी तक…फीफा वर्ल्ड कप में सबसे उम्र में गोल करने वाले टॉप-5 खिलाड़ियों की लिस्ट

FIFA World Cup के इतिहास में कई युवा खिलाड़ियों ने अपने शानदार प्रदर्शन से दुनिया का ध्यान खींचा है. सबसे कम उम्र में गोल करने का रिकॉर्ड पेले के नाम दर्ज है, जिन्होंने सिर्फ 17 साल की उम्र में गोल कर लंबे समय तक यह उपलब्धि अपने नाम रखी है.

FIFA World Cup: फीफा वर्ल्ड कप 2026 की शुरुआत 11 जून से होगी, जिसमें कुल 48 टीमें हिस्सा लेंगी. यह टूर्नामेंट संयुक्त रूप से अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको की मेजबानी में खेला जाएगा. दुनियाभर के फुटबॉल फैंस इस ऐतिहासिक टूर्नामेंट का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, जहां हर खिलाड़ी का सपना अपने देश के लिए गोल करना होता है. ऐसे में फीफा वर्ल्ड कप के इतिहास में सबसे कम उम्र में गोल करने का रिकॉर्ड पेले ने अपने नाम किया था.

पेले ने महज 17 साल में ही फीफा वर्ल्ड कप गोल करके इतिहास रच दिया था. वर्ल्ड कप के लंबे इतिहास में ऐसे बहुत कम खिलाड़ी रहे हैं जिन्होंने इतनी कम उम्र में इस बड़े मंच पर गोल करने का कारनामा किया हो. पेले इस सूची में पहले स्थान पर हैं और उनका यह रिकॉर्ड आज भी फुटबॉल जगत में खास पहचान रखता है. आइए जानते हैं फीफा वर्ल्ड कप इतिहास में सबसे कम उम्र में गोल करने वाले टॉप-5 खिलाड़ियों की लिस्ट…

पेले (17 साल, 239 दिन)

पेले फीफा वर्ल्ड कप इतिहास में सबसे कम उम्र में गोल करने वाले खिलाड़ी हैं और वह ऐसा करने वाले इकलौते खिलाड़ी हैं जिन्होंने 17 साल 239 में यह उपलब्धि हासिल की. ब्राजील के इस स्टार खिलाड़ी ने 1958 फीफा वर्ल्ड कप के क्वार्टर फाइनल में वेल्स के खिलाफ यह रिकॉर्ड बनाया था. पेले का वह टूर्नामेंट ऐतिहासिक बन गया था. उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में छह गोल किए, जिसमें सेमीफाइनल में हैट्रिक और फाइनल में स्वीडन के खिलाफ दो गोल शामिल थे. महज 17 साल की उम्र में उन्होंने ब्राजील को पहला वर्ल्ड कप खिताब दिलाने में अहम भूमिका निभाई. उनका यह रिकॉर्ड सात दशक बाद भी कायम है.

मैनुअल रोसास (18 साल, 93 दिन)

मेक्सिको के मैनुअल रोसास फीफा वर्ल्ड कप इतिहास के दूसरे सबसे युवा गोल स्कोरर हैं. पेले से पहले 28 साल तक यह रिकॉर्ड उनके नाम था. उन्होंने 1930 वर्ल्ड कप में अर्जेंटीना के खिलाफ यह उपलब्धि हासिल की थी. रोसास ने उसी टूर्नामेंट में एक और अनोखा रिकॉर्ड भी बनाया था. उन्होंने वर्ल्ड कप इतिहास का पहला आत्मघाती (खुद को चोट पहुंचाने वाला) गोल भी किया था. हालांकि टूर्नामेंट में मेक्सिको का प्रदर्शन खास नहीं रहा, लेकिन उन्होंने अपने पहले वर्ल्ड कप अभियान में दो गोल किए थे.

गावी (18 साल, 110 दिन)

स्पेन के मिडफील्डर गावी ने 2022 फीफा वर्ल्ड कप में कोस्टा रिका के खिलाफ गोल कर इतिहास रच दिया था. उन्होंने शानदार वॉली गोल किया, जिसकी मदद से स्पेन ने 7-0 की बड़ी जीत दर्ज की. इसके साथ ही वह वर्ल्ड कप इतिहास के सबसे युवा गोल स्कोररों की सूची में शामिल हो गए. गावी ने अपने पहले वर्ल्ड कप अभियान में एक गोल किया और स्पेन के सभी चार मुकाबलों में खेले थे.

माइकल ओवेन (18 साल, 190 दिन)

इंग्लैंड के स्ट्राइकर माइकल ओवेन ने 1998 फीफा वर्ल्ड कप में दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा था. उन्होंने अपना पहला वर्ल्ड कप गोल रोमानिया के खिलाफ किया था. इसके बाद अर्जेंटीना के खिलाफ राउंड ऑफ-16 में शानदार गोल कर अपनी अलग पहचान बनाई. ओवेन का पहला वर्ल्ड कप शानदार रहा था. उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में दो गोल किए और अपने प्रदर्शन से दुनिया के उभरते सितारों में जगह बना ली थी.

निकोलाए कोवाक्स (18 साल, 197 दिन)

रोमानिया के फॉरवर्ड निकोलाए कोवाक्स इस सूची में पांचवें स्थान पर हैं. उन्होंने 1930 फीफा वर्ल्ड कप में पेरू के खिलाफ यह उपलब्धि हासिल की थी. शुरुआती वर्ल्ड कप दौर में उनका नाम भी प्रमुख खिलाड़ियों में शामिल रहा था. कोवाक्स ने अपने पहले वर्ल्ड कप अभियान में एक गोल किया था और टूर्नामेंट में रोमानिया की ओर से अहम योगदान दिया था.

मृणाल कुमार पांडेय

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Published by: Ujjawal Sinha

उज्जवल कुमार सिन्हा खेल पत्रकारिता के क्षेत्र में 6 वर्षों से अधिक अनुभव रखते हैं. वर्तमान में वह प्रभात खबर में स्पोर्ट्स सेक्शन को लीड कर रहे हैं और विभिन्न खेलों से जुड़ी खबरों की योजना, संपादन और प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. उन्होंने अपने करियर में मुख्य रूप से डेस्क पर काम करते हुए एक्सक्लूसिव कंटेंट और स्पेशल स्टोरीज पर फोकस किया है. इस दौरान उन्होंने प्रो कबड्डी लीग और रणजी ट्रॉफी के मैच भी कवर किए हैं. प्रभात खबर से पहले वह नवभारत, CricTracker, जनसत्ता, स्पोर्ट्स तक और एपीएन न्यूज जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम कर चुके है. शिक्षा के क्षेत्र में उन्होंने सेंट जेवियर्स यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन में स्नातक और सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ बिहार से जर्नलिज्म में मास्टर्स किया है. पत्रकारिता के साथ-साथ उज्ज्वल का खेल से व्यक्तिगत जुड़ाव भी रहा है. वह क्रिकेट के खिलाड़ी रह चुके हैं और बिहार के लिए स्टेट कैंप में हिस्सा ले चुके हैं, जिससे उनकी समझ और लेखन को अतिरिक्त मजबूती मिलती है.

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