पेनल्टी शूटआउट में कैसे तय होती है जीत-हार? जानिए फुटबॉल के अहम नियम

फुटबॉल में पेनल्टी शूटआउट वह निर्णायक पल होता है जब मैच 90 मिनट और अतिरिक्त समय के बाद भी बराबरी पर रहता है. इस स्थिति में दोनों टीमों को 5-5 पेनल्टी किक दी जाती हैं और ज्यादा गोल करने वाली टीम विजेता बनती है.

Penalty Shootout Rules: फीफा वर्ल्ड कप 2026 की शुरुआत 11 जून से होगी. इस वर्ल्ड कप में कुल 48 टीमें हिस्सा लेंगी. अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको की संयुक्त मेजबानी में होने वाले इस टूर्नामेंट पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं. फुटबॉल फैंस के बीच इस वर्ल्ड कप को लेकर जबरदस्त उत्साह है. इस खेल में पेनल्टी शूटआउट का बड़ा महत्व है.

फुटबॉल में पेनल्टी शूटआउट वह पल होता है जहां करोड़ों फैंस की धड़कनें थम जाती हैं. कई बार पूरे टूर्नामेंट का फैसला सिर्फ एक किक तय करती है. फीफा वर्ल्ड कप इतिहास में कई बड़े चैंपियन इसी शूटआउट में जीते और हारे हैं.

आइए जानते हैं कि पेनल्टी शूटआउट कब लागू होता है, इसके नियम क्या होते हैं और यह फुटबॉल का सबसे तनावपूर्ण लेकिन रोमांचक हिस्सा क्यों माना जाता है. इस खबर में आपको पेनल्टी शूटआउट से जुड़ी हर जरूरी जानकारी मिलेगी.

बराबरी के बाद शुरू होता है असली मुकाबला

फुटबॉल मैच में अगर निर्धारित 90 मिनट और अतिरिक्त समय (Extra Time) के बाद भी स्कोर बराबर रहता है, तो विजेता तय करने के लिए पेनल्टी शूटआउट कराया जाता है. यह मुकाबले का वह दौर होता है जहां खिलाड़ियों पर सबसे ज्यादा दबाव होता है, क्योंकि यहां एक छोटी सी गलती भी पूरी टीम की हार की वजह बन सकती है.

क्या होता है 5-5 शॉट का नियम?

पेनल्टी शूटआउट की शुरुआत में दोनों टीमों को 5-5 पेनल्टी किक दी जाती हैं. शूटआउट शुरू होने से पहले रेफरी टॉस कराता है, जिससे तय होता है कि कौन-सी टीम पहले पेनल्टी लेगी. दोनों टीमें बारी-बारी से एक-एक शॉट लेती हैं और अंत में जिस टीम के ज्यादा गोल होते हैं, वही विजेता बनती है. अगर किसी टीम ने शुरुआती 3 शॉट में 3 गोल कर दिए और दूसरी टीम अपने 3 में से तीनों मिस कर दे, तो मुकाबला वहीं खत्म हो सकता है क्योंकि दूसरी टीम की वापसी संभव नहीं रहती.

पेनल्टी किक लेने वाला खिलाड़ी कैसे शॉट मारता है?

पेनल्टी लेने वाला खिलाड़ी गेंद को पेनल्टी स्पॉट पर रखता है और रेफरी की सीटी बजने के बाद शॉट लेता है। इसके लिए पेनल्टी लेने वाले खिलाड़ी को गेंद एक स्पॉट पर रखना होता है और वहां से गोल मारना होता है. खिलाड़ी रन-अप लेकर शॉट मार सकता है. एक बार शॉट मारने के बाद खिलाड़ी गेंद को लगातार दूसरी बार नहीं छू सकता. केवल वही खिलाड़ी शूटआउट में हिस्सा ले सकते हैं, जो मैच खत्म होने तक मैदान पर मौजूद हों.

क्या होता है फेक शॉट?

फुटबॉल में फेक शॉट का नियम अक्सर लोगों को भ्रमित करता है. अगर खिलाड़ी रन-अप के दौरान शरीर की मूवमेंट, धीमी चाल या हल्का रुककर गोलकीपर को भ्रमित करता है, तो यह नियमों के दायरे में माना जाता है. लेकिन अगर खिलाड़ी गेंद के बिल्कुल पास पहुंचने के बाद शॉट मारने का नाटक करे, अचानक रुक जाए या किक के समय गलत तरीके से छल करने की कोशिश करे, तो इसे नियमों का उल्लंघन माना जा सकता है. ऐसी स्थिति में खिलाड़ी को येलो कार्ड दिया जा सकता है. अगर गेंद गोल में चली भी जाए, तो रेफरी गोल रद्द कर सकता है.

गोलकीपर के लिए क्या नियम होते हैं?

पेनल्टी शूटआउट में गोलकीपर की भूमिका बेहद अहम होती है और उसके लिए भी सख्त नियम बनाए गए हैं. गोलकीपर को गोल लाइन पर खड़ा रहना होता है. शॉट लगने तक उसका कम से कम एक पैर गोल लाइन को छू रहा हो या उसके ऊपर होना चाहिए. गोलकीपर दाएं-बाएं मूव कर सकता है. लेकिन शॉट लगने से पहले वह आगे नहीं बढ़ सकता. अगर गोलकीपर समय से पहले आगे आ जाता है और इससे उसे फायदा मिलता है, तो रेफरी दोबारा किक करवाने का फैसला ले सकता है.

बाकी खिलाड़ी कहां रहते हैं?

जो खिलाड़ी उस समय पेनल्टी नहीं ले रहे होते, उन्हें सेंटर सर्कल के आसपास इंतजार करना पड़ता है. शॉट लगने से पहले वे पेनल्टी एरिया में प्रवेश नहीं कर सकते. किक के दौरान किसी तरह का हस्तक्षेप नहीं कर सकते.

5 शॉट के बाद भी स्कोर बराबर रहा तो क्या होता है?

अगर दोनों टीमों के 5-5 शॉट के बाद भी स्कोर बराबर रहता है, तो मुकाबला “सडन डेथ” में चला जाता है। ऐसे में दोनों टीमों को एक-एक अतिरिक्त मौका मिलता है. अगर एक टीम गोल कर देती है और दूसरी चूक जाती है, तो मुकाबला तुरंत खत्म हो जाता है.

पेनल्टी शूटआउट सिर्फ तकनीक का नहीं, बल्कि मानसिक मजबूती का भी खेल है. यहां एक खिलाड़ी कुछ सेकंड में हीरो भी बन सकता है और खलनायक भी. यही वजह है कि फुटबॉल का यह हिस्सा दुनिया के सबसे रोमांचक खेल क्षणों में गिना जाता है.

मृणाल कुमार पांडेय

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