‘मुझे कभी गेंदबाज नहीं बनना चाहिए था…’ WTC फाइनल में ड्रॉप किये जाने के बाद छलका आर अश्विन का दर्द

टीम इंडिया के सीनियर स्पिनर रविचंद्रन अश्विन को वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप फाइनल के लिए प्लेइंग इलेवन में शामिल नहीं किया गया. भारत वह मुकाबला ऑस्ट्रेलिया से हार गया. मैच के कुछ दिनों के बाद अश्विन का बयान सामने आया है, जिसमें उन्होंने गेंदबाज बनने पर अफसोस जताया है.

विश्व टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल से ड्रॉप किये जाने के कुछ दिनों बाद रविचंद्रन अश्विन ने कहा कि उन्हें बल्लेबाज के बजाय गेंदबाज बनने पर पछतावा हो रहा है. द इंडियन एक्सप्रेस को दिये एक इंटरव्यू में उन्होंने आधुनिक समय के क्रिकेटर के अकेलेपन के बारे में भी बात की. उनका मानना है कि टीम के साथी अब दोस्त नहीं बल्कि केवल सहकर्मी होते जा रहे हैं. उन्होंने बताया कि उनपर ‘ओवरथिंकर’ का लेबल लगाकर नेतृत्व से भी वंचित किया गया.

सचिन को देख गेंदबाज बनें अश्विन

अपने बचपन के दिनों को याद करते हुए रविचंद्रन अश्विन ने कहा कि एक दिन, मैं भारत और श्रीलंका का मैच देख रहा था और भारत की गेंदबाजी चरमरा गयी थी. मेरे पसंदीदा सचिन तेंदुलकर थे, उन्होंने बल्ले से जो भी रन बनाये थे गेंदबाजी में उस रन को लुटा रहे थे. तब मैंने सोचा कि मुझे गेंदबाज होना चाहिए. क्या मैं मौजूदा गेंदबाजों से बेहतर नहीं हो सकता? यह सोचने का बहुत ही बचकाना तरीका है, लेकिन मैंने ऐसा ही सोचा और इसलिए मैंने ऑफ स्पिन गेंदबाजी शुरू की. यहीं से मेरी गेंदबाजी की शुरुआत हुई.

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गेंदबाज बनने पर हो रहा है पछतावा

अश्विन ने स्पष्ट तौर पर कहा, ‘कल जब मैं संन्यास लूंगा, तो सबसे पहले मुझे इस बात का पछतावा होगा कि मैं इतना अच्छा बल्लेबाज था. मुझे कभी गेंदबाज नहीं बनना चाहिए था. डब्ल्यूटीसी फाइनल से बाहर किया जाना सिर्फ एक बाधा है, मैं आगे बढ़ूंगा क्योंकि मैं इससे गुजर चुका हूं. जब कोई आपको पहली बार नीचे गिराता है, तो आपके पास घुटने के बल चलने वाली प्रतिक्रिया होती है.

अश्विन का उड़ाया जाता था मजाक

अश्विन ने कहा कि उनकी ईमानदारी का ‘ओवरथिंकिंग’ के रूप में मजाक उड़ाया गया और उन्हें नेतृत्व के अवसरों से वंचित किया गया. उन्होंने कहा, ‘बहुत से लोगों ने मेरी मार्केटिंग की और मुझे एक ओवरथिंकर के रूप में परिभाषित किया गया. यह (ओवरथिंकर लेबल) मेरे खिलाफ काम करने के लिए बनाया गया था. उन्होंने स्वीकार किया कि बार-बार गिराये जाने और उनके बारे में नकारात्मक धारणाओं ने उन्हें काफी दर्द दिया. लेकिन मुझे बहुत खुशी है कि मैंने एक नये खुद की खोज की. उन्होंने कहा कि लेकिन मैं पहले की तुलना में बहुत अधिक कूल हो गया हूं. मैं पहले से कहीं ज्यादा आराम से रह रहा हूं.

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By Amleshnandan sinha

अमलेश नंदन सिन्हा प्रभात खबर डिजिटल में वरिष्ठ पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता में 20 से अधिक वर्षों का अनुभव है. रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई करने के बाद से इन्होंने कई समाचार पत्रों के साथ काम किया. इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत रांची एक्सप्रेस से की, जो अपने समय में झारखंड के विश्वसनीय अखबारों में से एक था. एक दशक से ज्यादा समय से ये डिजिटल के लिए काम कर रहे हैं. झारखंड की खबरों के अलावा, समसामयिक विषयों के बारे में भी लिखने में रुचि रखते हैं. विज्ञान और आधुनिक चिकित्सा के बारे में देखना, पढ़ना और नई जानकारियां प्राप्त करना इन्हें पसंद है.

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