India Pakistan Match: ऑपरेशन सिंदूर के बाद पहली बार भारत-पाकिस्तान भिड़ंत, पहलगाम पीड़ित की बेटी की भावुक मांग

India Pakistan Match: पहलगाम आतंकवादी हमले और ऑपरेशन सिंदूर के बाद पहली बार भारत और पाकिस्तान की क्रिकेट टीमें दुबई में आमने-सामने होंगी. लेकिन मुकाबला शुरू होने से पहले भावनाएं उबाल मार रही हैं. विपक्ष से लेकर बॉलीवुड स्टार और आम लोग मैच रद्द करने की मांग कर रहे हैं. विपक्ष ने तो मैच को लेकर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर भी हमला बोला. भारत-पाकिस्तान मैच को लेकर पहलगाम आतंकवादी हमले के पीड़ित की बेटी ने भी भावुक मांग कर दी है.

India Pakistan Match: पहलगाम आतंकी हमले में जान गंवाने वाले संतोष जगदाले की बेटी असावरी जगदाले ने एशिया कप में भारत-पाकिस्तान के बीच क्रिकेट मैच के बहिष्कार का आह्वान किया है.

भारत-पाकिस्तान सैन्य संघर्ष के बाद पहली बार भारत-पाकिस्तान मैच

भारत और पाकिस्तान की क्रिकेट टीमें सीमा पर सैन्य संघर्ष बढ़ने के बाद से पहली बार आमने-सामने होंगी. पहलगाम में 22 अप्रैल को आतंकवादी हमले के जवाब में भारत ने पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया था. सरकार की नयी खेल नीति के अनुसार भारत पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय मुकाबले नहीं खेलेगा, लेकिन एशिया कप और आईसीसी प्रतियोगिताओं जैसे बहुपक्षीय टूर्नामेंट में उनका सामना करना जारी रखेगा.

असावरी जगदाले ने क्या मांग की?

असावरी जगदाले ने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि रविवार का मैच नहीं होना चाहिए. पांच महीने पहले ही पहलगाम हमले में 26 लोगों की जान गई थी और इतना कुछ होने के बाद भी अगर बीसीसीआई को लगता है कि उन्हें मैच कराना चाहिए तो यह गलत है.’’ उन्होंने कहा कि मैच की अनुमति देना पीड़ितों के परिवारों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ करना होगा. असावरी ने कहा, ‘‘मुझे उन लोगों के लिए गहरी शर्म महसूस हो रही है जो खेलने के लिए तैयार हैं, जो खेल का आयोजन कर रहे हैं, और जो इस शाम को जयकारे लगा रहे हैं, वे पहलगाम हमले, सैनिकों के बलिदान और वर्षों से हुए ऐसे अनगिनत हमलों को भूल रहे हैं.’’

असावरी के पिता को आतंकवादियों ने मार दी थी गोली

असावरी उस वक्त अपने माता-पिता के साथ बैसरन घाटी में थी जब आतंकवादियों ने उसके पिता और उनके पारिवारिक मित्र कौस्तुभ गणबोटे की गोली मारकर हत्या कर दी.

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By Arbindkumar mishra

अरबिंद कुमार मिश्रा मुख्यधारा की पत्रकारिता में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले एक वरिष्ठ पत्रकार और लेखक हैं. वर्तमान में, वह प्रभात खबर डॉट कॉम (Prabhat Khabar) में सीनियर कंटेंट राइटर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. अरबिंद नेशनल, इंटरनेशनल और स्पोर्ट्स कैटेगरी में अपनी लेखनी के लिए जाने जाते हैं. गहरी रिसर्च पर आधारित स्पेशल स्टोरीज, रिपोर्टिंग और जटिल मुद्दों पर आसान भाषा में 'एक्सप्लेनर' लिखना उनकी मुख्य यूएसपी (USP) है.

झारखंड की समृद्ध संस्कृति और लोक परंपराओं में उनकी गहरी रुचि है. अपनी उत्कृष्ट और सरोकार से जुड़ी रिपोर्टिंग के लिए उन्हें संस्थान स्तर पर कई बार सम्मानित और पुरस्कृत भी किया जा चुका है.

करियर का सफरनामा

अरबिंद ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत देश की प्रतिष्ठित बहुभाषी न्यूज एजेंसी 'हिंदुस्थान समाचार' से बतौर रिपोर्टर की थी. इसके बाद उन्होंने प्रसार भारती के अंग दूरदर्शन और आकाशवाणी के साथ भी काम किया, जहां उन्होंने एंकरिंग, वॉइस-ओवर और रिपोर्टिंग के गुर सीखे. साल 2011 में वह 'प्रभात खबर डॉट कॉम' से जुड़े और तब से लगातार डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.

प्रमुख उपलब्धियां और ग्राउंड रिपोर्टिंग

खेल पत्रकारिता और जमीनी रिपोर्टिंग में अरबिंद का योगदान उल्लेखनीय रहा है. उनकी कुछ सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हैं:

34वें राष्ट्रीय खेल: झारखंड में आयोजित ऐतिहासिक 34वें नेशनल गेम्स की बेहतरीन और व्यापक ग्राउंड रिपोर्टिंग.

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट: रांची के जेएससीए (JSCA) स्टेडियम में आयोजित कई इंटरनेशनल क्रिकेट मैचों को करीब से कवर किया.

पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप (2018): भुवनेश्वर में आयोजित वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले की शानदार स्पोर्ट्स रिपोर्टिंग.

पंचायतनामा: प्रभात खबर के इस खास विंग के लिए ग्रामीण इलाकों का दौरा कर कई प्रेरक 'सक्सेस स्टोरीज' लिखीं.

शैक्षणिक योग्यता (Education & Credentials)

UGC NET: साल 2019 में यूजीसी नेट (UGC NET) की परीक्षा उत्तीर्ण की.

बैचलर ऑफ जर्नलिज्म (BJMC): रांची विश्वविद्यालय से साल 2011 में पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की.

एम.ए. (नागपुरी भाषा): रांची विश्वविद्यालय के 'जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग' से साल 2009 में नागपुरी भाषा में स्नातकोत्तर (MA) की डिग्री हासिल की.

लेखन शैली और विशेषज्ञता: एक्सप्लेनर, रिसर्च बेस्ड स्टोरीज, स्पोर्ट्स जर्नलिज्म, इंटरनेशनल अफेयर्स और झारखंड की लोक-संस्कृति.

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