IND vs ENG: इंजीनियर और लॉयड के नाम पर स्टैंड, लंकाशर काउंटी क्रिकेट क्लब ने किया सम्मान, फैंस खुश

IND vs ENG: भारत और इंग्लैंड के बीच खेले जा रहे चौथे टेस्ट मैच के पहले दिन एक ऐतिहासिक पल सामने आया, जब लंकाशर काउंटी क्रिकेट क्लब ने अपने दो दिग्गज पूर्व खिलाड़ियों भारत के पूर्व विकेटकीपर फारुख इंजीनियर और वेस्टइंडीज के महान कप्तान क्लाइव लॉयड के नाम पर ओल्ड ट्रैफर्ड स्टेडियम के स्टैंड्स का नामकरण कर उन्हें सम्मानित किया.

IND vs ENG: भारत और इंग्लैंड के बीच खेले जा रहे चौथे टेस्ट मैच के पहले दिन एक ऐतिहासिक पल सामने आया, जब लंकाशर काउंटी क्रिकेट क्लब ने अपने दो दिग्गज पूर्व खिलाड़ियों भारत के पूर्व विकेटकीपर फारुख इंजीनियर और वेस्टइंडीज के महान कप्तान क्लाइव लॉयड के नाम पर ओल्ड ट्रैफर्ड स्टेडियम के स्टैंड्स का नामकरण कर उन्हें सम्मानित किया.

IND vs ENG: फारुख इंजीनियर लंकाशर का गौरव

87 वर्षीय फारुख इंजीनियर ने 1968 से 1976 तक लंकाशर के लिए क्रिकेट खेला और इस दौरान क्लब के लिए 175 प्रथम श्रेणी मैच खेले. उन्होंने इन मुकाबलों में 5,942 रन बनाए, 429 कैच पकड़े और 35 स्टंपिंग की. उनका लंकाशर में शामिल होना क्लब के लिए एक ‘टर्निंग पॉइंट’ साबित हुआ. इंजीनियर की भूमिका उस समय बेहद निर्णायक रही, जब क्लब ने अपने 15 साल के खिताबी सूखे को समाप्त करते हुए 1970 से 1975 के बीच चार बार जिलेट कप जीता.

बावजूद इसके कि उन्होंने मुंबई के ब्रेबोर्न स्टेडियम में कई यादगार प्रदर्शन किए, भारतीय घरेलू मैदान पर उनके नाम पर कोई स्टैंड नहीं है. इस वजह से ओल्ड ट्रैफर्ड स्टेडियम में यह सम्मान मिलना भारतीय क्रिकेट प्रेमियों के लिए गर्व का विषय बन गया है.

वेस्टइंडीज के महान कप्तान, लंकाशर के अभिन्न हिस्सा

दूसरी ओर, वेस्टइंडीज को दो बार विश्व कप जिताने वाले कप्तान क्लाइव लॉयड 1970 के दशक की शुरुआत में बतौर विदेशी खिलाड़ी लंकाशर में शामिल हुए थे. लॉयड का क्लब के साथ लगभग दो दशक लंबा जुड़ाव रहा, जिसमें उन्होंने टीम के प्रदर्शन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया. उनका यह योगदान आज भी क्लब की यादों में अमिट है.

ओल्ड ट्रैफर्ड में गूंजा भारतीय नाम

यह सम्मान दर्शाता है कि कैसे लंकाशर क्लब ने न केवल अपने खिलाड़ियों की उपलब्धियों को पहचाना, बल्कि उन्हें स्थायी रूप से याद रखने का निर्णय लिया. फारुख इंजीनियर और क्लाइव लॉयड के नाम पर स्टैंड बनाना, क्रिकेट इतिहास के इन दो महान खिलाड़ियों के योगदान की सार्वजनिक और भावनात्मक स्वीकृति है.

मैनचेस्टर बना फारुख इंजीनियर का घर

संन्यास के बाद इंजीनियर ने मैनचेस्टर को ही अपना स्थायी निवास बना लिया है. आज भी वे क्रिकेट के चर्चित कार्यक्रमों और विश्लेषणों में सक्रिय रहते हैं. इस सम्मान के दौरान स्टेडियम में मौजूद रहकर उन्होंने इस पल को बेहद “भावुक और अविस्मरणीय” बताया.

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By Aditya kumar varshney

आदित्य वार्ष्णेय एक अनुभवी खेल पत्रकार हैं, जो वर्तमान में कंटेंट राइटर के रूप में प्रभात खबर के साथ जुड़े हुए हैं. वह पिछले 5 सालों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और स्पोर्ट्स बीट में गहरी पकड़ रखते हैं. आप क्रिकेट, फुटबॉल हॉकी, टेनिस और चेस जैसे खेलों पर लिखना पसंद करते हैं. आप मैच रिपोर्ट, विश्लेषणात्मक लेख, फीचर स्टोरी और एक्सप्लेनर आधारित कंटेंट तैयार करते हैं. आपने प्रभात खबर से पहले भारत समाचार में असिस्टेंट प्रोड्यूसर (आउटपुट विभाग) के रूप में काम किया है, वहीं स्टार स्पोर्ट्स में असिस्टेंट प्रोड्यूसर (क्रिकेट, हिंदी फीड) के तौर पर भी काम कर चुके हैं. आपके पास ब्रॉडकास्ट और डिजिटल दोनों प्लेटफॉर्म का मजबूत अनुभव है.
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