सचिन तेंदुलकर के आउट होने पर फूट-फूट कर रोता था यह स्‍टार क्रिकेटर

हनुमा विहारी (Hanuma Vihari) ने सचिन (Sachin Tendulkar) से जुड़ा एक किस्‍सा शेयर किया. उन्‍होंने बताया, उन्‍हें सचिन की बल्‍लेबाजी देखना काफी अच्‍छा लगता था. विहारी उस पल को याद करते हुए बताते हैं कि सचिन तेंदुलकर के आउट होते ही वह गुस्‍से में टीवी बंद कर दिया कर देते थे और फूट-फूटकर रोने लगते थे.

नयी दिल्‍ली : टीम इंडिया के पूर्व महान खिलाड़ी और भारत रत्‍न सचिन तेंदुलकर ऑल टाइम लोगों के पसंदीदा क्रिकेटर हैं. उनके नाम दर्जनों रिकॉर्ड आज भी दर्ज हैं. कई रिकॉर्ड तो ऐसे हैं जिसे अब तक कोई क्रिकेटर नहीं तोड़ पाया है. टीम इंडिया के युवा क्रिकेटर हनुमा विहारी ने सचिन तेंदुलकर को अपना रोल मॉडल बताया. विहारी ने अपने क्रिकेट कैरियर में सचिन के महत्‍व को भी बताया.

विहारी ने बताया वो सचिन तेंदुलकर को खेलते देखकर बड़े हुए हैं. उन्‍होंने बताया उनकी बढ़ती उम्र में सचिन तेंदुलकर का बड़ा महत्‍व रहा है. विहारी ने बताया सचिन को क्रिकेट खेलते देखना उन्‍हें बहुत अच्‍छा लगता था और उन्‍हीं से उन्‍हें क्रिकेट खेलने की प्रेरणा मिली है. इसमें कोई शक नहीं है कि कई युवा क्रिकेटरों के लिए सचिन तेंदुलकर रॉल मॉडल रहे हैं, उन्‍हें खेलते देखकर कई युवा क्रिकेट में अपना कैरियर बनाया.

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हनुमा विहारी ने सचिन से जुड़ा एक किस्‍सा शेयर किया. उन्‍होंने बताया, उन्‍हें सचिन की बल्‍लेबाजी देखना काफी अच्‍छा लगता था. विहारी उस पल को याद करते हुए बताते हैं कि सचिन तेंदुलकर के आउट होते ही वह गुस्‍से में टीवी बंद कर दिया कर देते थे और फूट-फूटकर रोने लगते थे.

हनुमा विहारी ने बताया, सचिन सर मेरे आदर्श हैं. मेरे क्रिकेट शुरू करने का कारण ही वही हैं. जब भी वह आउट हो जाते थे तो मैं खूब रोता था और टीवी बंद कर देता था.

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मालूम हो विहारी सचिन से 20 साल छोटे हैं. जब विहारी ने जन्‍म लिया था उस समय अंतरराष्‍ट्रीय क्रिकेट में अपना झंडा गाड़ दिया था. सचिन ने पाकिस्‍तान के खिलाफ 15 नवंबर 1989 में पहला टेस्‍ट मैच खेला था. वहीं विहारी ने 8 सितंबर 2018 में भारत की ओर से पहला टेस्‍ट मैच खेला.

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By Arbindkumar mishra

अरबिंद कुमार मिश्रा मुख्यधारा की पत्रकारिता में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले एक वरिष्ठ पत्रकार और लेखक हैं. वर्तमान में, वह प्रभात खबर डॉट कॉम (Prabhat Khabar) में सीनियर कंटेंट राइटर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. अरबिंद नेशनल, इंटरनेशनल और स्पोर्ट्स कैटेगरी में अपनी लेखनी के लिए जाने जाते हैं. गहरी रिसर्च पर आधारित स्पेशल स्टोरीज, रिपोर्टिंग और जटिल मुद्दों पर आसान भाषा में 'एक्सप्लेनर' लिखना उनकी मुख्य यूएसपी (USP) है.

झारखंड की समृद्ध संस्कृति और लोक परंपराओं में उनकी गहरी रुचि है. अपनी उत्कृष्ट और सरोकार से जुड़ी रिपोर्टिंग के लिए उन्हें संस्थान स्तर पर कई बार सम्मानित और पुरस्कृत भी किया जा चुका है.

करियर का सफरनामा

अरबिंद ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत देश की प्रतिष्ठित बहुभाषी न्यूज एजेंसी 'हिंदुस्थान समाचार' से बतौर रिपोर्टर की थी. इसके बाद उन्होंने प्रसार भारती के अंग दूरदर्शन और आकाशवाणी के साथ भी काम किया, जहां उन्होंने एंकरिंग, वॉइस-ओवर और रिपोर्टिंग के गुर सीखे. साल 2011 में वह 'प्रभात खबर डॉट कॉम' से जुड़े और तब से लगातार डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.

प्रमुख उपलब्धियां और ग्राउंड रिपोर्टिंग

खेल पत्रकारिता और जमीनी रिपोर्टिंग में अरबिंद का योगदान उल्लेखनीय रहा है. उनकी कुछ सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हैं:

34वें राष्ट्रीय खेल: झारखंड में आयोजित ऐतिहासिक 34वें नेशनल गेम्स की बेहतरीन और व्यापक ग्राउंड रिपोर्टिंग.

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट: रांची के जेएससीए (JSCA) स्टेडियम में आयोजित कई इंटरनेशनल क्रिकेट मैचों को करीब से कवर किया.

पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप (2018): भुवनेश्वर में आयोजित वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले की शानदार स्पोर्ट्स रिपोर्टिंग.

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शैक्षणिक योग्यता (Education & Credentials)

UGC NET: साल 2019 में यूजीसी नेट (UGC NET) की परीक्षा उत्तीर्ण की.

बैचलर ऑफ जर्नलिज्म (BJMC): रांची विश्वविद्यालय से साल 2011 में पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की.

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लेखन शैली और विशेषज्ञता: एक्सप्लेनर, रिसर्च बेस्ड स्टोरीज, स्पोर्ट्स जर्नलिज्म, इंटरनेशनल अफेयर्स और झारखंड की लोक-संस्कृति.

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