वीरेंद्र सहवाग बोले- घर की मुर्गी दाल बराबर मानते हो, जब…, अब बेटे को समझ आईं पापा की बातें

Aaryavir Sehwag on Father Virender Sehwag: वीरेंद्र सहवाग अपने विस्फोटक बल्लेबाजी अंदाज और भारत के पहले टेस्ट तिहरे शतक के लिए याद किए जाते हैं. उनकी आक्रामकता ने उन्हें खास पहचान दिलाई. अब उनके बेटे आर्यवीर सहवाग ने बताया कि पापा की इस महान विरासत के बीच उनका बचपन कैसा रहा और उन्होंने इससे कितनी प्रेरणा पाई.

Aaryavir Sehwag on Father Virender Sehwag: वीरेंद्र सहवाग ने विश्व क्रिकेट में सबसे विस्फोटक ओपनर्स में से एक के रूप में अपनी पहचान बनाई. वे अपने बेखौफ शॉट्स और तेजी से विपक्षी गेंदबाजों पर हावी होने की क्षमता के लिए याद किए जाते हैं. उनके नाम पर भारत की तरफ से टेस्ट क्रिकेट में पहला तिहरा शतक लगाने का रिकॉर्ड है. उनका साहसी और आक्रामक बल्लेबाजी का अंदाज उन्हें खेल में अलग पहचान देता था और कई खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना. हालांकि घर में उन्हें उनकी उपलब्धियों को कम आंकते थे. अब उनके बेटे आर्यवीर सहवाग ने इस बात पर खुलकर चर्चा की है कि इस विरासत के बीच बड़ा होना कैसा था. 

आर्यवीर भी पिता के नक्शेकदम पर चलते हुए क्रिकेट में हाथ आजमा रहे हैं. दिल्ली प्रीमियर लीग में वे इस समय सेंट्रल दिल्ली किंग्स के लिए खेलते हैं. उन्होंने इंटरव्यू में आगे बताया, “बचपन से ही मेरी आदत प्लास्टिक बैट और बॉल से खेलने की थी. मैं और मेरा भाई बचपन में बहुत क्रिकेट खेलते थे क्योंकि हमने पापा को यही करते हुए देखा था.”

हाल ही में दिल्ली कैपिटल्स ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर साझा किए गए इंटरव्यू में आर्यवीर ने अपने क्रिकेटिंग सफर पर पिता के प्रभाव को लेकर खुलकर बात की. उन्होंने कहा कि पापा कहते थे, तुम लोग घर की मुर्गी दाल बराबर समझते हो, जब ग्राउंड में उतरोगे तब पता चलेगा. एक हल्का-फुल्का पल साझा करते हुए आर्यवीर ने घर की बात बताई, “पापा हमेशा कहते हैं कि घर की मुर्गी दाल बराबर.” आर्यवीर ने तुरंत इसका जवाब दिया, “लेकिन ऐसा नहीं है. पिछले 2-3 साल से मैं प्रोफेशनल क्रिकेट खेल रहा हूं, और अब धीरे-धीरे समझ पा रहा हूं कि मेरे डैड किस स्तर के खिलाड़ी थे. मैं सच में उन्हें अपना आदर्श मानता हूं.” 

फिलहाल दिल्ली प्रीमियर लीग का हिस्सा बने आर्यवीर ने स्वीकार किया कि अपने पिता की महानता को वे अब जाकर समझ पा रहे हैं. अपने पिता के करियर पर सोचते हुए आर्यवीर ने स्वीकार किया कि सहवाग की उपलब्धियां बिल्कुल साधारण नहीं थीं. उन्हें देखकर लगता है कि जो काम उन्होंने किए वो आसान नहीं थे. उनसे बहुत प्रेरणा और मोटिवेशन मिलता है. उन्होंने आईपीएल का एक और किस्सा सुनाते हुए कहा कि दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में होने वाले ज्यादातर मैच हम देखने जाते थे, खासतौर पर जब पापा दिल्ली डेयरडेविल्स (अब दिल्ली कैपिटल्स) की ओर से खेलते थे. उस समय हम काफी छोटे थे. मेरी सबसे पहली याद यह है कि दिल्ली में पापा मैच खेल रहे थे और हमारे स्टेडियम पहुंचने से पहले ही वे आउट हो गए थे. आईपीएल में पापा की मेरी यही पहली याद है.

17 वर्षीय आर्यवीर सहवाग पहली बार सुर्खियों में तब आए जब उन्होंने कूच बिहार ट्रॉफी में दिल्ली अंडर-19 के लिए खेलते हुए लगातार दो धमाकेदार पारियां खेलीं. पहले मेघालय के खिलाफ नाबाद 200 रन (34 चौके) और फिर अगले दिन 297 रन बनाए. इन पारियों ने उन्हें गंभीर प्रतिभा के रूप में पहचान दिलाई. फिलहाल वह दिल्ली प्रीमियर लीग (DPL) 2025 में सेंट्रल दिल्ली किंग्स (CDK) का हिस्सा हैं, जिन्होंने उन्हें 3 लाख रुपये के बेस प्राइस से बढ़ाकर 8 लाख रुपये में खरीदा. हालांकि अभी तक उन्हें प्लेइंग इलेवन में जगह नहीं मिली है, लेकिन संभावना है कि यश धुल के दलीप ट्रॉफी की तैयारियों में जाने पर CDK उन्हें मौका दे सकती है.

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