Jaminton Campaz: फीफा वर्ल्ड कप 2026 में कोलंबिया के स्विट्जरलैंड से हारकर बाहर होने के बाद, टीम के मिडफील्डर जामिंटन कैंपाज (Jaminton Campaz) और उनके परिवार को जान से मारने की धमकियां मिलने का गंभीर मामला सामने आया है. हार के बाद फैली निराशा के बीच कुछ अज्ञात लोगों ने खिलाड़ी और उनके परिजनों को निशाना बनाया है, जो कि अत्यंत चिंताजनक है. इस घटना के संज्ञान में आने के बाद कोलंबियाई फुटबॉल महासंघ (FCF) ने कड़ा रुख अपनाते हुए इन धमकियों की तीखी निंदा की है. महासंघ ने इसे खेल भावना के विपरीत करार देते हुए संबंधित अधिकारियों से मामले की तत्काल जांच करने और दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की है.
पेनाल्टी शूटआउट में टूटा कोलंबिया का सपना
राउंड ऑफ-16 में कोलंबिया और स्विट्जरलैंड के बीच मुकाबला बेहद रोमांचक रहा. निर्धारित 90 मिनट के बाद मैच अतिरिक्त समय (Extra Time) तक पहुंचा. इसी दौरान जामिंटन कैंपाज के पास गोल करने का सुनहरा मौका था, लेकिन वह उसे भुनाने में असफल रहे. इसके बाद मैच पेनाल्टी शूटआउट तक पहुंचा, जहां स्विट्जरलैंड ने बाजी मारते हुए कोलंबिया को टूर्नामेंट से बाहर कर दिया.
हार के बाद सोशल मीडिया पर शुरू हुई अभद्रता
मैच खत्म होने के बाद कैंपाज को सोशल मीडिया पर भारी आलोचना का सामना करना पड़ा. रिपोर्ट्स के मुताबिक, आलोचना जल्द ही गाली-गलौज और जान से मारने की धमकियों में बदल गई. इतना ही नहीं, उनके परिवार को भी निशाना बनाया गया. इस घटना ने खिलाड़ियों की सुरक्षा और सोशल मीडिया पर बढ़ती नफरत को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
FCF ने जारी किया कड़ा बयान
कोलंबियाई फुटबॉल महासंघ ने आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि वह जामिंटन कैंपाज और उनके परिवार के खिलाफ दी गई धमकियों की कड़े शब्दों में निंदा करता है. महासंघ ने कहा कि किसी भी खिलाड़ी या उसके परिवार को केवल इसलिए डराया-धमकाया नहीं जा सकता क्योंकि उसने अपने देश का प्रतिनिधित्व किया है. FCF ने अपने बयान में कहा कि कार्यकारी समिति जामिंटन कैंपज, उनके परिवार और पूरी कोलंबियाई राष्ट्रीय टीम के साथ मजबूती से खड़ी है.
अटॉर्नी जनरल कार्यालय से जांच तेज करने की मांग
महासंघ ने कोलंबिया के अटॉर्नी जनरल कार्यालय से अपील की है कि मामले की जांच में तेजी लाई जाए और धमकियां देने वालों की पहचान कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए. FCF का कहना है कि इस तरह की घटनाएं न केवल खिलाड़ियों की सुरक्षा के लिए खतरा हैं, बल्कि खेल भावना के भी पूरी तरह खिलाफ हैं.
एंड्रेस एस्कोबार की दर्दनाक यादें फिर हुईं ताजा
जामिंटन कैंपाज के साथ हुई यह घटना 1994 फीफा वर्ल्ड कप की उस दर्दनाक घटना की याद दिलाती है, जिसने पूरी फुटबॉल दुनिया को झकझोर दिया था. 1994 वर्ल्ड कप में अमेरिका में आयोजित टूर्नामेंट के दौरान कोलंबिया के डिफेंडर एंड्रेस एस्कोबार ने मेजबान अमेरिका के खिलाफ दुर्भाग्यपूर्ण आत्मघाती गोल (Own Goal) कर दिया था, जिसके कारण टीम ग्रुप चरण से ही बाहर हो गई थी. वर्ल्ड कप से लौटने के कुछ दिनों बाद मेडेलिन शहर में एस्कोबार की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी.
खिलाड़ियों की सुरक्षा पर फिर उठे सवाल
जामिंटन कैंपज को मिली धमकियों ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि खेल में हार-जीत को लेकर खिलाड़ियों और उनके परिवारों के खिलाफ हिंसा, नफरत और ऑनलाइन उत्पीड़न को कैसे रोका जाए. विशेषज्ञों का मानना है कि खेल में प्रदर्शन के आधार पर आलोचना स्वीकार्य हो सकती है, लेकिन धमकी और हिंसा किसी भी स्थिति में उचित नहीं है.
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