Makar Sankranti 2026: मकर संक्रांति के दिन क्यों खाई जाती है खिचड़ी? शास्त्रों में छिपा है रहस्य

Makar Sankranti 2026: मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी खाने की खास परंपरा है. इस दिन विशेष तौर पर उत्तर भारत में तरह-तरह की सब्जियों और मसालों का इस्तेमाल कर खिचड़ी बनाकर खाई जाती है. साथ ही, इसका दान भी किया जाता है. आइए जानते हैं इस परंपरा के पीछे छिपे धार्मिक रहस्य के बारे में.

By Neha Kumari | January 12, 2026 9:48 AM

Makar Sankranti 2026: हर साल पूरे देश में मकर संक्रांति का पावन त्योहार उत्साह और उमंग के साथ धूमधाम से मनाया जाता है. इस दिन भगवान सूर्य की विशेष पूजा की जाती है और भोग के रूप में तिल, गुड़ और दही अर्पित किए जाते हैं. भारत के कुछ राज्यों, जैसे बिहार और उत्तर प्रदेश, में इस दिन खिचड़ी भी भोग के रूप में अर्पित की जाती है और बाद में इसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करने के साथ-साथ दान में भी दिया जाता है.

मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी क्यों खाई जाती है?

मकर संक्रांति को उत्तर भारत में खिचड़ी पर्व के नाम से भी जाना जाता है. धार्मिक मान्यता है कि इस दिन खिचड़ी का सेवन और दान करने से कुंडली के सभी ग्रहों का शुभ प्रभाव साधक पर पड़ता है. मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी बनाने में इस्तेमाल की जाने वाली प्रत्येक सामग्री का संबंध किसी न किसी ग्रह से होता है.

खिचड़ी में इस्तेमाल किया गया चावल चंद्रमा से संबंधित माना जाता है, जो मन की शांति, स्थिरता और शीतलता का कारक है. वहीं, इस दिन खिचड़ी बनाने के लिए विशेष रूप से उड़द की दाल का उपयोग किया जाता है, जिसका संबंध शनिदेव से माना जाता है. कहा जाता है कि खिचड़ी के सेवन से शनिदोष का प्रभाव कम होता है.

इसके अलावा, खिचड़ी में उपयोग की जाने वाली सब्जियों का संबंध बुध ग्रह से जोड़ा जाता है, जो बुद्धि और ज्ञान के कारक माने जाते हैं. खिचड़ी में प्रयोग होने वाली हल्दी का संबंध बृहस्पति ग्रह से होता है, जबकि घी का संबंध सूर्य देव से माना जाता है. ऐसे में मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी का सेवन न केवल शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है, बल्कि कुंडली में ग्रहों की स्थिति को भी मजबूत करने में सहायक माना जाता है.

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