Pongal 2026: पोंगल का त्योहार क्यों और कैसे मनाया जाता है? जानें नियम और महत्व

Pongal 2026: पोंगल दक्षिण भारत में मनाया जाने वाला एक विशेष पर्व है. इस वर्ष यह 14 जनवरी से शुरू होगा और 17 जनवरी को समाप्त होगा. आइए जानते हैं कि इस पर्व को कैसे और क्यों मनाया जाता है.

By Neha Kumari | January 11, 2026 8:25 AM

Pongal 2026: पोंगल दक्षिण भारत में धूमधाम से मनाया जाने वाला चार दिवसीय फसल उत्सव है. यह पर्व हर वर्ष माघ महीने में मनाया जाता है. इसे नए वर्ष की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है. पोंगल शब्द का अर्थ होता है उबलना या फैलना. यह त्योहार विशेष रूप से अच्छी फसल और समृद्धि के लिए वर्षा के देवता इंद्र, सूर्यदेव और पशुओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए मनाया जाता है. इस दिन चावल से एक विशेष प्रकार का पकवान बनाया जाता है, जिसे पोंगल कहा जाता है.

कैसे मनाया जाता है पोंगल?

पोंगल की शुरुआत सूर्य उत्तरायण यानी मकर संक्रांति से होती है. यह त्योहार चार दिनों तक मनाया जाता है. पहले दिन भोगी पोंगल, दूसरे दिन थाई पोंगल, तीसरे दिन मट्टू पोंगल और चौथे दिन कानुम पोंगल मनाया जाता है.

भोगी पोंगल

भोगी पोंगल इस चार दिवसीय त्योहार का पहला दिन होता है. इस दिन लोग अपने घरों की सफाई करते हैं. घर से पुराने, खराब और उपयोग में न आने वाले सामान को बाहर निकाल दिया जाता है. यह दिन घर और जीवन से नकारात्मकता को दूर कर सकारात्मकता के साथ नई शुरुआत करने का प्रतीक माना जाता है. यह दिन इंद्र देव को समर्पित होता है.

थाई पोंगल

थाई पोंगल भगवान सूर्य को समर्पित होता है. इस दिन भगवान सूर्य और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है. साथ ही अच्छी फसल की खुशी में भोग के रूप में चावल की खीर और अन्य मीठे व्यंजन बनाए जाते हैं.

मट्टू पोंगल

मट्टू पोंगल पर्व का सबसे महत्वपूर्ण दिन माना जाता है. इस दिन खेतों और कृषि कार्यों में सहायक पशुओं जैसे गाय और बैल को सम्मान दिया जाता है और उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त की जाती है. इस अवसर पर पशुओं की पूजा की जाती है और उन्हें विशेष भोजन कराया जाता है.

कानुम पोंगल

कानुम पोंगल इस पर्व का अंतिम दिन होता है. इस दिन खुले में हल्दी के पत्तों पर सुपारी, गन्ने का रस और पोंगल पकवान रखा जाता है. इस अवसर पर लोग अपने परिवार और रिश्तेदारों से मिलने जाते हैं. साथ ही सामाजिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाता है.

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