Amalaki Ekadashi 2026: फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को पड़ने वाले एकादशी व्रत को आमलकी एकादशी कहा जाता है. देश के कई हिस्सों में इसे रंगभरी एकादशी और आंवला एकादशी के नाम से भी जाना जाता है. इस दिन भगवान नारायण के साथ आंवले के पेड़ और फल की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है. श्रद्धालु आंवले के पेड़ की परिक्रमा कर जल, फूल, धूप-बाती और अक्षत अर्पित करते हैं तथा सुख-समृद्धि की कामना करते हैं. ऐसे तो आमलकी एकादशी के दिन आंवले के पेड़ की पूजा से जुड़ी कई प्रचलित कथाएं हैं, जिनमें से एक के बारे में इस आर्टिकल के माध्यम से हम जानेंगे.
आमलकी एकादशी पर क्यों की जाती है आंवले के पेड़ की पूजा
पौराणिक कथा के अनुसार, सृष्टि के आरंभिक समय में भगवान ब्रह्मा के मन में एक सवाल उत्पन्न हुआ. उनका प्रश्न था कि उन्होंने इस संसार की रचना की है, लेकिन उनकी स्वयं की रचना का आधार क्या है? उनकी स्वयं की उत्पत्ति कैसे हुई? इस सवाल का उत्तर जानने के लिए ब्रह्मा जी ने कई वर्षों तक कठोर तपस्या की.
तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु उनके सामने प्रकट हुए. भगवान विष्णु ने ब्रह्मा जी के मन में उठ रहे सभी प्रश्नों का उत्तर दिया और बताया कि उनकी उत्पत्ति स्वयं उनसे हुई है. यह जानने के बाद ब्रह्मा जी की आंखों से आंसू बहने लगे और वे भगवान विष्णु के चरणों में गिर पड़े. कहा जाता है कि उन्हीं आंसुओं से आंवले के पेड़ की उत्पत्ति हुई.
ब्रह्मा जी के स्नेह और प्रेम को देखकर भगवान विष्णु ने आशीर्वाद दिया कि वे आंवले के पेड़ में निवास करेंगे और जो भी इस वृक्ष की पूजा करेगा, उसके जीवन से सभी दुख-दर्द दूर हो जाएंगे. मान्यता है कि जिस दिन यह घटना हुई, वह फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि थी. तभी से इस दिन भगवान नारायण के साथ आंवले के पेड़ की पूजा की जाने लगी.
आमलकी एकादशी 2026 कब है?
आमलकी एकादशी 27 फरवरी 2026, दिन शुक्रवार को मनाई जाएगी.
- आमलकी एकादशी तिथि प्रारंभ — 26 फरवरी 2026, दिन गुरुवार, रात 12:06 बजे से
- आमलकी एकादशी तिथि समाप्त — 27 फरवरी 2026, दिन शुक्रवार, रात 09:48 बजे तक
- आमलकी एकादशी पूजा का शुभ समय — 27 फरवरी 2026 को सुबह 06:15 बजे से 09:09 बजे तक
- आमलकी एकादशी व्रत पारण का शुभ समय — 28 फरवरी 2026 को सुबह 07:41 बजे से 09:08 बजे तक
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