Vijaya Ekadashi 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार, फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को ‘विजया एकादशी’ कहा जाता है. साल 2026 में यह व्रत 13 फरवरी को किया जाएगा. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्रीराम ने लंका पर विजय प्राप्त करने के लिए समुद्र किनारे इसी व्रत को विधि-पूर्वक किया था. यदि आप भी अपने जीवन में बाधाओं को दूर कर सफलता प्राप्त करना चाहते हैं, तो इस व्रत को अवश्य करें. इस व्रत के दौरान कुछ विशेष नियमों का पालन करना और कुछ चीजों से परहेज करना बेहद जरूरी माना जाता है.
विजया एकादशी पर क्या करें?
- ब्रह्म मुहूर्त में स्नान: सुबह जल्दी उठकर पवित्र नदी में स्नान करें या घर पर गंगाजल मिले पानी से स्नान करें.
- सात्विक भोजन: विजया एकादशी के दिन केवल सात्विक और शुद्ध भोजन ग्रहण करें.
- जागरण: एकादशी के दिन रातभर भजन-कीर्तन करते हुए जागरण करना चाहिए.
- दान: एकादशी के दिन दान करने का विधान है. इस दिन दान करने से मानसिक शांति और पुण्य की प्राप्ति होती है.
- पीले वस्त्र: मान्यता है कि पीला रंग भगवान नारायण को प्रिय है, इसलिए इस दिन पीले रंग के वस्त्र धारण करना शुभ माना जाता है.
- पीले रंग का भोग: इस दिन भगवान विष्णु को पीले रंग की मिठाइयाँ और फल भोग के रूप में अर्पित करने चाहिए.
विजया एकादशी के दिन क्या न करें?
- चावल का सेवन: एकादशी के दिन चावल खाना पूरी तरह वर्जित माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन चावल खाने वाला व्यक्ति अगले जन्म में रेंगने वाले जीव की योनि में जन्म लेता है.
- तुलसी के पत्ते न तोड़ें: एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए. पूजा के लिए पत्ते एक दिन पहले तोड़कर रख सकते हैं.
- तामसिक भोजन: इस दिन लहसुन, प्याज, मांस या मदिरा का सेवन बिल्कुल न करें.
- अपशब्द और क्रोध: मन में किसी के प्रति द्वेष न रखें, वाद-विवाद से बचें और ब्रह्मचर्य का पालन करें.
- बाल और नाखून काटना: इस दिन बाल कटवाना, नाखून काटना या दाढ़ी बनाना वर्जित माना जाता है.
तिथि और शुभ मुहूर्त
13 फरवरी 2026 को मनाई जाएगी.
- एकादशी तिथि प्रारंभ: 12 फरवरी 2026, दोपहर 12:22 बजे से.
- एकादशी तिथि समाप्त: 13 फरवरी 2026, दोपहर 02:25 बजे तक.
- उदयातिथि के अनुसार व्रत: 13 फरवरी 2026 (शुक्रवार).
- व्रत पारण का समय: 14 फरवरी 2026, सुबह 07:00 बजे से 09:14 बजे के बीच.
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