Varalakshmi Vrat 2025:वरलक्ष्मी व्रत, जिसे वरलक्ष्मी पूजा भी कहा जाता है, माता लक्ष्मी को समर्पित एक महत्वपूर्ण और पवित्र हिन्दू पर्व है. यह व्रत मुख्य रूप से विवाहित महिलाएं अपने परिवार के सुख, समृद्धि, सौभाग्य और ऐश्वर्य की प्राप्ति के लिए करती हैं.
व्रत पूजन के शुभ मुहूर्त 2025
- सिंह लग्न (प्रातः) – सुबह 06:58 से 09:06 बजे तक
- वृश्चिक लग्न (अपराह्न) – दोपहर 01:24 से 03:38 बजे तक
- कुंभ लग्न (संध्या) – शाम 07:33 से 09:10 बजे तक
- वृषभ लग्न (मध्यरात्रि) – रात 12:28 से 02:28 बजे तक (9 अगस्त)
वरलक्ष्मी व्रत की पूजा विधि
- स्नान और संकल्प – प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें. इसके बाद व्रत का संकल्प लें.
- कलश स्थापना – लकड़ी के पाटे पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं. उस पर थोड़ा चावल रखें और ऊपर कलश स्थापित करें. कलश में जल, सुपारी, हल्दी, अक्षत और एक सिक्का डालें. कलश के मुंह पर आम के पत्ते रखें और ऊपर नारियल स्थापित करें.
- माता लक्ष्मी की स्थापना – कलश के समीप माता लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र रखें. उन्हें फूल, चावल, कुमकुम, हल्दी आदि अर्पित करें.
- आरती और कथा – विधिवत पूजा के बाद वरलक्ष्मी व्रत कथा पढ़ें या सुनें. कथा में माता चारुमती की कथा वर्णित है, जिनके व्रत से संपूर्ण नगर समृद्ध हो गया था.
- भोग अर्पण – माता को खीर, पायसम, फल, नारियल, मिठाई और पारंपरिक दक्षिण भारतीय व्यंजन अर्पित करें.
- सौभाग्य सामग्री का आदान-प्रदान – व्रतधारी महिलाएं एक-दूसरे को चूड़ियां, बिंदी, सिंदूर, मेहंदी जैसी सुहाग सामग्री भेंट कर आशीर्वाद लेती हैं.
- प्रसाद वितरण और व्रत समापन – अंत में प्रसाद सभी को बांटें और व्रत का समापन करें. कुछ महिलाएं व्रत का पारण अगले दिन करती हैं, जबकि कुछ संध्या में ही भोजन ग्रहण करती हैं.
वरलक्ष्मी व्रत का पौराणिक महत्व
यह व्रत देवी पार्वती और भगवान शिव से संबंधित है. मान्यता है कि एक बार माता पार्वती ने शिवजी से पूछा कि स्त्रियों के लिए सबसे कल्याणकारी व्रत कौन-सा है. तब शिवजी ने वरलक्ष्मी व्रत की महिमा बताई. विश्वास है कि जो महिलाएं इस व्रत को श्रद्धा और नियम से करती हैं, उनके जीवन में अष्टलक्ष्मी – धन, धान्य, संतान, विद्या, धैर्य, विजय, वीरता और गजलक्ष्मी – का स्थायी वास होता है.
