Vaishakh Month 2024 : वैशाख के समान कोई दूसरा मास नहीं, जानें क्या करना है पुण्यदायी

चैत्र पूर्णिमा (24 अप्रैल) से शुरू हुआ वैशाख मास वैशाखी पूर्णिमा (23 मई) को समाप्त होगा. इसे सनातन धर्म में सबसे उत्तम मास बताया गया है. वैशाख माह में किये जाने वाले कुछ विधान हैं, जो भगवान मधुसूदन को प्रसन्न कर देते हैं. जानिए क्या हैं वैशाख मास के पुण्यदायी नियम-धरम...

Vaishakh Month 2024 : पुराणों में वैशाख मास को ब्रह्मा जी ने सभी महीनों से उत्तम बताया है. 27 नक्षत्रों में से एक विशाखा नक्षत्र से संबंधित होने पर इस माह का नाम वैशाख पड़ा. यह मास माता के समान सभी जीवों को सदा अभीष्ट प्रदान करने वाला है. साथ ही भगवान श्री हरि को प्रसन्न करने वाला सबसे ‘माधव मास’ भी कहा गया है. इस माह में लोकाचार जीवन के लिए शास्त्रों में कुछ पुण्यदायी विधान बताये गये हैं, जिनमें जन-कल्याण की भावना निहित है.

सलिल पाण्डेय, मिर्जापुर

शास्त्रों में तो हर माह और हर तिथि की महत्ता वर्णित है. इसके पीछे ऋषियों-मुनियों का मनुष्य को श्रेष्ठ जीवन जीने की कला से अवगत कराना प्रमुख उद्देश्य था. लोग हर दिन और हर पल सदाचार का पालन करें, ताकि समाज में प्रेम, सौहार्द्र का भाव बना रहे. इसी क्रम में गर्मी के इस मौसम में अशक्त और असहाय लोगों की मदद का विधान है. वास्तव में इस विधान के पीछे जन-कल्याण की भावना निहित है.
समाज में जो लोग सामर्थ्यवान हैं, वे अपने से नीचे का जीवन जीने वाले लोगों की मदद जब करेंगे, तो वक्त-जरूरत पर इन लोगों की मदद प्राप्त कर सकेंगे. इस स्थिति में पूरा गांव या इलाका कुटुंब बन जायेगा और भाई-चारा का वातावरण बनेगा. गांव या इलाके में किसी पर दैवी, प्राकृतिक या जंगली हिंसक जीव-जंतुओं से कोई विपत्ति आती है, तो उसका मुकाबला सामूहिक भावना से पूरा इलाका करने में लग जायेगा.

Also Read : Vaishakh Purnima 2024: वैशाख पूर्णिमा पर करें सत्यनारायण पूजा, बरसेगी भगवान की कृपा, जानें पूजा विधि व मुहूर्त

विभिन्न पुराणों में व्रत-उपवास के साथ दान का विधान किया गया है. स्कन्दपुराण के वैष्णवखण्ड में वैशाख माह की श्रेष्ठता के लिए 13 अध्यायों में राजा कीर्तिमान को वशिष्ठ के उपदेश, नारद का अपने सभासदों को उपदेश तथा ऋषि श्रुतदेव का जनक से संवाद का उल्लेख अत्यंत रोचक ढंग से वर्णित है. इसमें विभिन्न तिथियों में नदी-सरोवर में स्नान, भगवान विष्णु का पूजन तथा ग्रीष्म ऋतु से बचाव के लिए वस्तुओं के दान की बात कही गयी है. इस माह की महत्ता के संदर्भ में स्कंदपुराण में कहा गया है-

न माधवसमो मासो न कृतेन युगं समम्, न च वेदसमम् शास्त्रं न तीर्थं गंगया समम् ।

अर्थात्- वैशाख के समान कोई मास नहीं है. सतयुग के समान कोई युग नहीं है, वेद के समान कोई शास्त्र नहीं है और गंगा जी के समान कोई तीर्थ नहीं है.

वैशाख में स्नान के साथ दान से होगी अभीष्ट पुण्य की प्राप्ति

वैशाख माह में सूर्योदय में नदी-सरोवर स्नान करने से भगवान मधुसूदन प्रसन्न होते हैं. वैसे तो वैशाख माह के लिए कई विधान बताये गये हैं, मगर जल का दान को सबसे ऊपर बताया गया है. यह अश्वमेध यज्ञ के समान माना गया है. इस महीने में प्याऊ लगाना, छाता, सत्तू, चटाई का दान सामाजिक समरसता की दृष्टि से भी जरूरी है.
खास कर भूख-प्यास से पीड़ित वैसे सदाचारी लोग जो समाज के लोकहित के लिए शास्त्रादि अध्ययन में लगे रहते हैं, उन्हें गर्मी से बचाव के लिए वस्त्र, शीतल हवाओं के लिए पंखा, जूता-चप्पल, खाद्य-पदार्थ आदि देने का विधान सनातन धर्म में बताया गया है, जो अति पुण्यदायी है.
वहीं भगवान शंकर के मंदिर पर जलधारा (जलहरी) की व्यवस्था भी सूक्ष्म जीव-जंतुओं के लिए आवश्यक बताया गया है. ये जीव-जंतु पर्यावरण संरक्षण में योगदान करते हैं.

ग्रीष्म ऋतु से बचाव के लिए शारीरिक एवं मानसिक तैयारी भी करें

श्रद्धालुजन इस मास में आध्यात्मिक विधानों का पालन कर समाज में भाईचारा का संदेश देते हुए ग्रीष्म ऋतु की जटिलताओं से मुकाबला करने के लिए शारीरिक एवं मानसिक स्तर पर तैयारी भी करें. इन तौर-तरीकों में ब्रह्म-मुहूर्त में स्नान पहली अनिवार्यता है. यह मुहूर्त स्वास्थ्य की दृष्टि से अति लाभप्रद है. चिकित्सा विज्ञान के साथ देश के कोने-कोने में एक लोकोक्ति प्रचलित है- ‘‘जो सोवत है ‘सो’ खोवत है, जो जागत है ‘सो’ पावत है’’.
इस लोकोक्ति में ‘सो’ का आशय ‘सौ’ से है. यानी सौ प्रतिशत खोना या सौ प्रतिशत पाना इसका आशय लेना चाहिए. पूरे विश्व के चिकित्सक तक अब यही कहने लगे हैं कि ब्रह्म-मुहूर्त में शरीर के हार्मोंस स्वास्थ्य के अनुकूल शरीर को बनाते हैं.

Also Read : Anusuiya Jayanti 2024 : तीन देवियां भी माता अनसूया के पतिव्रत धर्म को न कर सकीं विचलित

Vaishakh Upay 2024 : वैशाख मास में इन उपायों से कटेंगे पाप, होगी श्री हरि की कृपा

वैशाख महीने में भगवान विष्णु की उपासना के साथ स्नान-दान का विशेष महत्व बताया गया है. इससे साधक पर भगवान विष्णु की असीम कृपा होती है. इस मास अपनी दैनिक दिनचर्या में निम्न बातों का पालन अवश्यक करें –

  • पद्म पुराण के अनुसार, वैशाख मास में प्रात: स्नान करना अश्वमेध यज्ञ के समान है. इसके बाद सूर्य को जल अर्पित करें.
  • इस माह में भगवान विष्णु की पूजा-आराधना करें. ‘ॐ माधवाय नमः’ मंत्र का जाप करें.
  • पूजा में विष्णु भगवान को तुलसी दल अर्पित करें. संध्या बेला तुलसी के सामने दीपक जलाएं.
  • वैशाख माह में जरूरतमंद लोगों को जल, छाता, चप्पल, सत्तू-गुड़ आदि का दान करें. इन चीजों के दान से पितृदोष से छुटकारा मिलता है, साथ ही अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है.
  • पशु-पक्षियों के लिए घर के आस-पास दाना-पानी की व्यवस्था करें. पौधों-वृक्ष को रोज पानी दें.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >