टांगीनाथ धाम, गुमला का अद्भुत शिवधाम जहां 17 फीट धंसा त्रिशूल

Tanginath Dham: झारखंड के गुमला में स्थित टांगीनाथ धाम भगवान परशुराम की तपोभूमि माना जाता है. यहां का 17 फीट धंसा त्रिशूल और प्राचीन मूर्तियां आज भी आस्था जगाती हैं.

Tanginath Dham: टांगीनाथ धाम झारखंड के गुमला जिले में स्थित एक प्राचीन और पवित्र धार्मिक स्थल है, जिसका संबंध भगवान परशुराम से जोड़ा जाता है. मान्यता है कि इसी स्थान पर भगवान परशुराम ने भगवान शिव की कठोर आराधना की थी. झारखंड और छत्तीसगढ़ की सीमा पर, गुमला जिला अंतर्गत डुमरी प्रखंड के मझगांव में स्थित यह धाम आज लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है. दूर-दूर से लोग यहां पूजा-अर्चना और दर्शन के लिए पहुंचते हैं.

भगवान परशुराम और टांगीनाथ का संबंध

पौराणिक कथाओं के अनुसार, त्रेता युग में जब भगवान श्रीराम ने जनकपुर में शिव धनुष तोड़ा, तब वहां उपस्थित भगवान परशुराम अत्यंत क्रोधित हो गए थे. लक्ष्मण और परशुराम के बीच तीखी बहस भी हुई. बाद में जब उन्हें ज्ञात हुआ कि श्रीराम स्वयं भगवान विष्णु के अवतार हैं, तो उन्हें आत्मग्लानि हुई. पश्चाताप स्वरूप वे वन-वन भटकते हुए इस पर्वतीय क्षेत्र में पहुंचे और यहां भगवान शिव की स्थापना कर तपस्या करने लगे.

कहा जाता है कि जहां वे तप कर रहे थे, उसी स्थान के समीप उन्होंने अपना परशु (फरसा) भूमि में गाड़ दिया. झारखंड में फरसा को ‘टांगी’ कहा जाता है, इसी कारण इस स्थान का नाम टांगीनाथ धाम पड़ा. यहां आज भी भगवान परशुराम के पदचिह्न होने की मान्यता है.

चमत्कारी त्रिशूल का रहस्य

टांगीनाथ धाम का सबसे बड़ा आकर्षण यहां स्थित प्राचीन त्रिशूल है. मान्यता है कि यह त्रिशूल लगभग 17 फीट तक जमीन में धंसा हुआ है, हालांकि इसकी वास्तविक गहराई का कोई प्रमाणित माप उपलब्ध नहीं है. आश्चर्य की बात यह है कि खुले आसमान के नीचे धूप, बारिश, ठंड और गर्मी सहने के बावजूद इस त्रिशूल पर कभी जंग नहीं लगता.

एक अन्य कथा के अनुसार, भगवान शिव ने शनिदेव को दंडित करने के लिए यहां त्रिशूल फेंका था, जो आकर इस पहाड़ी पर धंस गया. उसका ऊपरी भाग आज भी जमीन के ऊपर दिखाई देता है और श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रतीक बना हुआ है.

स्थापत्य और मूर्तिकला की विशेषताएं

टांगीनाथ पहाड़ पर अनेक देवी-देवताओं की मूर्तियां और शिवलिंग बिखरे हुए हैं. यहां शिवलिंग, दुर्गा, महिषासुर मर्दिनी, भगवती लक्ष्मी, गणेश, अर्धनारीश्वर, विष्णु, उमा, महेश्वर, सूर्यदेव और हनुमान की प्रतिमाएं देखी जा सकती हैं. इसके अतिरिक्त वृषभ, सिंह और गज की सुंदर पत्थर निर्मित मूर्तियां भी यहां मौजूद हैं.

यहां छोटे-छोटे ढांचों में बनी प्लास्टर मूर्तियां, पत्थर से निर्मित नालियां, पीसने की सिलवटें, प्राचीन ईंटें और असुर कालीन ईंटों के अवशेष भी पाए जाते हैं. टांगीनाथ की कुछ प्रतिमाओं की शैली ओडिशा के भुवनेश्वर स्थित मुक्तेश्वर और गौरी केदार मंदिरों में प्राप्त मूर्तियों से मिलती-जुलती बताई जाती है, जिससे इसके प्राचीन और समृद्ध इतिहास का संकेत मिलता है.

कैसे पहुंचे टांगीनाथ धाम

टांगीनाथ धाम तक पहुंचना अब पहले की तुलना में काफी आसान हो गया है. यहां तक अच्छी और सुगम सड़क बनी हुई है, जिससे सफर आरामदायक रहता है. रास्ते में पड़ने वाली नदी पर भी पुल का निर्माण हो चुका है, इसलिए आवागमन में किसी प्रकार की परेशानी नहीं होती.

हालांकि, धाम परिसर में रात्रि विश्राम की सुविधा उपलब्ध नहीं है. इसलिए यात्रियों और सैलानियों को ठहरने के लिए गुमला शहर में ही व्यवस्था करनी पड़ती है. गुमला में होटल और लॉज आसानी से मिल जाते हैं, जहां से अगले दिन टांगीनाथ के लिए प्रस्थान किया जा सकता है.

अगर आप सुबह लगभग छह बजे गुमला से निकलते हैं, तो करीब दो घंटे की यात्रा के बाद सुबह आठ बजे तक टांगीनाथ धाम पहुंच सकते हैं. सुबह का समय दर्शन और प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लेने के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है.

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धाम परिसर में पेयजल की समुचित व्यवस्था है, जिससे श्रद्धालुओं को असुविधा नहीं होती. पर्यटक यहां शाम चार बजे तक रुक सकते हैं. इसके बाद समय का ध्यान रखते हुए वापस गुमला के लिए प्रस्थान करना उचित रहता है, ताकि अंधेरा होने से पहले सुरक्षित रूप से पहुंचा जा सके.

टांगीनाथ धाम की दूरी

  • रांची से 175 किमी दूर है
  • डुमरी प्रखंड से 10 किमी
  • गुमला शहर से 75 किमी
  • सिमेडगा से 160 किमी
  • लोहरदगा से 125 किमी

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लेखक के बारे में

By Shaurya Punj

मैंने डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. पिछले 6 वर्षों से मैं विशेष रूप से धर्म और ज्योतिष विषयों पर सक्रिय रूप से लेखन कर रहा हूं. ये मेरे प्रमुख विषय हैं और इन्हीं पर किया गया काम मेरी पहचान बन चुका है. हस्तरेखा शास्त्र, राशियों के स्वभाव और उनके गुणों से जुड़ी सामग्री तैयार करने में मेरी निरंतर भागीदारी रही है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद. इसके साथ साथ कंटेंट राइटिंग और मीडिया से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में काम करते हुए मेरी मजबूत पकड़ बनी. इसके अलावा, एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी मैंने गहराई से लेखन किया है, जिससे मेरी लेखन शैली संतुलित, भरोसेमंद और पाठक-केंद्रित बनी है.

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