Sneeze Astrology: भारतीय धार्मिक और लोक मान्यताओं में छींक को भी एक तरह का शकुन माना गया है. इसकी दिशा, समय और परिस्थिति के आधार पर अलग-अलग शुभ-अशुभ फल बताए गए हैं.
जानिए छींक आने के शुभ और अशुभ फल
छींक आना शरीर की स्वाभाविक प्रक्रिया है, लेकिन प्राचीन भारतीय परंपराओं और शकुन शास्त्र में इसे कई तरह के संकेतों से जोड़कर देखा गया है. मान्यता है कि छींक किस दिशा में, किस समय और किस परिस्थिति में आती है, उसके आधार पर उसका फल अलग हो सकता है.
पंडित पुरनेंदु पाठक ने बताया कि परंपरागत मान्यताओं के अनुसार बाईं ओर या पीछे की ओर छींक को दोषरहित माना गया है, जबकि सामने की ओर छींक आने को विवाद या लड़ाई का संकेत माना जाता है. वहीं दाहिनी ओर छींक को धन हानि से जोड़ने की मान्यता मिलती है.
ऊंची दिशा में आने वाली छींक को प्रतिष्ठा और सम्मान मिलने का संकेत माना गया है. इसके विपरीत नीचे की ओर होने वाली छींक को भय उत्पन्न करने वाली बताया गया है. कुछ पुरानी मान्यताओं में गाय की छींक को भी अत्यंत अशुभ संकेत माना गया है.
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इन समयों पर छींक शुभ मानी जाती है
शकुन संबंधी मान्यताओं में कुछ विशेष अवसरों पर छींक को शुभ फल देने वाला बताया गया है. आसन ग्रहण करते समय, शयन के समय, शौच, दान, भोजन और औषधि सेवन के समय छींक आना शुभ माना गया है.
इसी तरह विद्यारंभ, बीज बोने, युद्ध या विवाह के लिए जाते समय छींक आने को भी शुभ संकेत माना जाता है. ऐसी छींक को कार्य की सफलता से जोड़कर देखा जाता है.
किन छींक को माना गया है निष्फल?
कुछ परंपरागत मान्यताओं में शराबी, बच्चों और बुजुर्गों की छींक को निष्फल माना गया है. इसी तरह जानबूझकर या हठपूर्वक छींकने को भी कोई विशेष शकुन नहीं माना जाता.
मान्यता यह भी है कि यदि व्यक्ति कोशिश करने के बावजूद छींक को रोक न पाए और लगातार छींक आती रहे, तो जिस काम के लिए वह जा रहा है, उसमें बाधा आने की संभावना मानी जाती है.
क्या कहती हैं ये मान्यताएं?
छींक से जुड़े ये संकेत प्राचीन शकुन और लोक परंपराओं का हिस्सा हैं. अलग-अलग क्षेत्रों और ग्रंथों में इनके अर्थों में अंतर भी मिलता है. इसलिए इन्हें निश्चित भविष्यवाणी के बजाय पारंपरिक मान्यता के रूप में ही देखना उचित है.
नोट: छींक आना सामान्य शारीरिक प्रक्रिया है. ऊपर बताए गए शुभ-अशुभ फल धार्मिक, ज्योतिषीय और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं, प्रभात खबर इसकी वैज्ञानिक पुष्टि नहीं करता है.
