शुक्र प्रदोष व्रत पर पढ़ें शिव चालीसा, दूर होंगे सभी दोष, बरसेगी भोलेनाथ की कृपा

Shukra Pradosh Vrat: आज 12 जून, शुक्रवार को भगवान शिव को समर्पित शुक्र प्रदोष व्रत रखा जा रहा है. मान्यता है कि शुक्र प्रदोष व्रत करने से महादेव के साथ-साथ शुक्रदेव की कृपा भी प्राप्त होती है. इस दिन भगवान शिव की आराधना के दौरान शिव चालीसा का पाठ अत्यंत फलदायी माना गया है. ऐसे में इस लेख में हम आपके लिए शिव चालीसा के संपूर्ण लिरिक्स प्रस्तुत कर रहे हैं.

Shukra Pradosh Vrat: आज ज्येष्ठ अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि है. इस पावन अवसर पर अत्यंत शुभ और फलदायी शुक्र प्रदोष व्रत का संयोग बना है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो भक्त आज के दिन श्रद्धा और सच्चे मन से भगवान शिव की पूजा-अर्चना करता है तथा व्रत रखता है, उसके जीवन के सभी दोष दूर हो जाते हैं. साथ ही जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का आगमन होता है. प्रदोष व्रत की पूजा में शिव चालीसा के पाठ का विशेष महत्व बताया गया है. मान्यता है कि शिव चालीसा का श्रद्धापूर्वक पाठ करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और साधक को पूजा-व्रत का कई गुना अधिक फल प्राप्त होता है.

शिव चालीसा 

॥ दोहा ॥

जय गणेश गिरिजा सुवन,मंगल मूल सुजान.

कहत अयोध्यादास तुम,देहु अभय वरदान॥

श्री शिव चालीसा पाठ

जय गिरिजा पति दीन दयाला.सदा करत सन्तन प्रतिपाला॥

भाल चन्द्रमा सोहत नीके.कानन कुण्डल नागफनी के॥

अंग गौर शिर गंग बहाये.मुण्डमाल तन क्षार लगाए॥

वस्त्र खाल बाघम्बर सोहे.छवि को देखि नाग मन मोहे॥

मैना मातु की हवे दुलारी.बाम अंग सोहत छवि न्यारी॥

कर त्रिशूल सोहत छवि भारी.करत सदा शत्रुन क्षयकारी॥

नन्दि गणेश सोहै तहँ कैसे.सागर मध्य कमल हैं जैसे॥

कार्तिक श्याम और गणराऊ.या छवि को कहि जात न काऊ॥

देवन जबहीं जाय पुकारा.तब ही दुख प्रभु आप निवारा॥

किया उपद्रव तारक भारी.देवन सब मिलि तुमहिं जुहारी॥

तुरत षडानन आप पठायउ.लवनिमेष महँ मारि गिरायउ॥

आप जलंधर असुर संहारा.सुयश तुम्हार विदित संसारा॥

त्रिपुरासुर सन युद्ध मचाई.सबहिं कृपा कर लीन बचाई॥

किया तपहिं भागीरथ भारी.पुरब प्रतिज्ञा तासु पुरारी॥

दानिन महँ तुम सम कोउ नाहीं.सेवक स्तुति करत सदाहीं॥

वेद माहि महिमा तुम गाई.अकथ अनादि भेद नहिं पाई॥

प्रकटी उदधि मंथन में ज्वाला.जरत सुरासुर भए विहाला॥

कीन्ही दया तहं करी सहाई.नीलकण्ठ तब नाम कहाई॥

पूजन रामचन्द्र जब कीन्हा.जीत के लंक विभीषण दीन्हा॥

सहस कमल में हो रहे धारी.कीन्ह परीक्षा तबहिं पुरारी॥

एक कमल प्रभु राखेउ जोई.कमल नयन पूजन चहं सोई॥

कठिन भक्ति देखी प्रभु शंकर.भए प्रसन्न दिए इच्छित वर॥

जय जय जय अनन्त अविनाशी.करत कृपा सब के घटवासी॥

दुष्ट सकल नित मोहि सतावै.भ्रमत रहौं मोहि चैन न आवै॥

त्राहि त्राहि मैं नाथ पुकारो.येहि अवसर मोहि आन उबारो॥

लै त्रिशूल शत्रुन को मारो.संकट ते मोहि आन उबारो॥

मात-पिता भ्राता सब होई.संकट में पूछत नहिं कोई॥

स्वामी एक है आस तुम्हारी.आय हरहु मम संकट भारी॥

धन निर्धन को देत सदा हीं.जो कोई जांचे सो फल पाहीं॥

अस्तुति केहि विधि करैं तुम्हारी.क्षमहु नाथ अब चूक हमारी॥

शंकर हो संकट के नाशन.मंगल कारण विघ्न विनाशन॥

योगी यति मुनि ध्यान लगावैं.शारद नारद शीश नवावैं॥

नमो नमो जय नमः शिवाय.सुर ब्रह्मादिक पार न पाय॥

जो यह पाठ करे मन लाई.ता पर होत है शम्भु सहाई॥

ॠनियां जो कोई हो अधिकारी.पाठ करे सो पावन हारी॥

पुत्र होन कर इच्छा जोई.निश्चय शिव प्रसाद तेहि होई॥

पण्डित त्रयोदशी को लावे.ध्यान पूर्वक होम करावे॥

त्रयोदशी व्रत करै हमेशा.ताके तन नहीं रहै कलेशा॥

धूप दीप नैवेद्य चढ़ावे.शंकर सम्मुख पाठ सुनावे॥

जन्म जन्म के पाप नसावे.अन्त धाम शिवपुर में पावे॥

कहैं अयोध्यादास आस तुम्हारी.जानि सकल दुःख हरहु हमारी॥

॥ दोहा ॥

नित्त नेम उठि प्रातः ही,पाठ करो चालीसा.

तुम मेरी मनोकामना,पूर्ण करो जगदीश॥

मगसिर छठि हेमन्त ॠतु,संवत चौसठ जान.

स्तुति चालीसा शिवहि,पूर्ण कीन कल्याण॥

शुक्र प्रदोष व्रत का शुभ मुहूर्त और योग

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, आज यानी 12 जून को प्रदोष व्रत के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग का निर्माण हो रहा है, जो इस दिन को किसी भी शुभ कार्य और पूजा-पाठ के लिए अत्यंत फलदायी बनाता है.

पूजा का विवरणसमय 
त्रयोदशी तिथि का प्रारंभ12 जून, शाम 07:36 बजे से
त्रयोदशी तिथि का समापन13 जून,  शाम 04:07 बजे तक
प्रदोष काल पूजा मुहूर्तशाम 07:36 बजे से रात 09:20 बजे तक

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By Neha kumari

नेहा कुमारी वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में धर्म बीट पर कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. वह व्रत-त्योहार, राशिफल, पंचांग, ज्योतिष, शुभ मुहूर्त, पौराणिक कथाओं और भारतीय संस्कृति से जुड़े विषयों पर लेख लिखती हैं. उन्होंने वेस्ट बंगाल स्टेट यूनिवर्सिटी से मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन की डिग्री प्राप्त की है.

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