Shardiya Navratri Day 2 Maa Brahmacharini Live Puja Vidhi: शारदीय नवरात्रि के दूसरे दिन ऐसे करें मां ब्रह्मचारिणी की पूजा, जानें शुभ मुहूर्त, मंत्र और आरती

Shardiya Navratri Day 2 Maa Brahmacharini Live Puja Vidhi: आज शारदीय नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा का खास महत्व है. सही पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, मंत्र और आरती के जरिए मां की कृपा पाकर साधक को तप, संयम और विजय का आशीर्वाद मिलता है. जानें इस दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा का सही तरीका.

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8:54 AM. 23 Sept 25 8:54 AM. 23 Sept

मां ब्रह्मचारिणी के शुभ रंग और पुष्प

मां ब्रह्मचारिणी को सफेद रंग अत्यंत प्रिय है. इसलिए इस दिन पूजा में सफेद रंग के कपड़े पहनें और मां को सफेद फूल अर्पित करें. इससे माता की प्रसन्नता बढ़ती है और घर में सुख-शांति बनी रहती है.

8:53 AM. 23 Sept 25 8:53 AM. 23 Sept

मां ब्रह्मचारिणी के प्रिय भोग

द्वितीया तिथि पर मां ब्रह्मचारिणी को बर्फी, चीनी, खीर और पंचामृत का भोग अर्पित करना शुभ माना जाता है. इन मिठाइयों से मां प्रसन्न होती हैं और भक्तों पर अपने आशीर्वाद की वर्षा करती हैं.

8:53 AM. 23 Sept 25 8:53 AM. 23 Sept

मां ब्रह्मचारिणी बीज मंत्र और साधना मंत्र

नवरात्रि के दूसरे दिन, मां ब्रह्मचारिणी को प्रसन्न करने के लिए बीज मंत्र “ह्रीं श्री अम्बिकायै नम:” का जाप करना चाहिए. इसके साथ ही साधना मंत्र “ऊँ ऐं ह्रीं क्लीं ब्रह्मचारिण्यै नम:” का कम से कम 108 बार जाप करने से माता की कृपा शीघ्र प्राप्त होती है.

7:39 AM. 23 Sept 25 7:39 AM. 23 Sept

मां ब्रह्मचारिणी पूजा विधि

मां ब्रह्मचारिणी की पूजा विधि इस प्रकार है: प्रातः सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें. पूजा स्थान को गंगा जल से शुद्ध करें. घर के मंदिर में दीपक जलाकर मां दुर्गा को अक्षत, सिंदूर और लाल फूल अर्पित करें. इसके बाद माता को भोग लगाएं. धूप व दीपक प्रज्वलित कर दुर्गा चालीसा का पाठ करें और अंत में माता रानी की आरती करें.

8:55 PM. 22 Sept 25 8:55 PM. 22 Sept

मां ब्रह्मचारिणी के नाम का अर्थ

मां ब्रह्मचारिणी का नाम दो शब्दों से मिलकर बना है.

पहला – ‘ब्रह्म’, जिसका अर्थ है तप, सत्य और परम शक्ति.
दूसरा – ‘चारिणी’, जिसका अर्थ है आचरण करने वाली या साधना करने वाली.

8:48 PM. 22 Sept 25 8:48 PM. 22 Sept

मां ब्रह्मचारिणी के हाथों में क्या रहता है?

मां ब्रह्मचारिणी के दाहिने हाथ में जपमाला (रुद्राक्ष की माला) रहता है . इसे साधना, तप और भक्ति का प्रतीक माना जाता है. वहीं, बाएं हाथ में कमंडल रहता है जो संयम, त्याग और सरलता का प्रतीक माना जाता है.

8:13 PM. 22 Sept 25 8:13 PM. 22 Sept

मां ब्रह्मचारिणी को कौन से फूल प्रिय हैं?

मान्यता है कि नवरात्रि के दूसरे दिन देवी को सफेद गुलाब, चमेली और कमल चढ़ाने से मां प्रसन्न होती हैं.

7:45 PM. 22 Sept 25 7:45 PM. 22 Sept

मां ब्रह्मचारिणी का प्रिय रंग

मान्यता है कि मां ब्रह्मचारिणी को सफेद रंग अतिप्रिय है. इसलिए भक्तों को इस दिन सफेद वस्त्र धारण करना चाहिए और मां को सफेद रंग के पुष्प अर्पित करना चाहिए.

7:16 PM. 22 Sept 25 7:16 PM. 22 Sept

मां ब्रह्मचारिणी की कथा

मां ब्रह्मचारिणी का जन्म हिमालय में एक पुत्री के रूप में हुआ था. नारदजी के कहने पर उन्होंने भगवान शंकर को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या शुरू की. इस कठिन साधना के कारण उन्हें तपश्चरिणी, यानी ब्रह्मचारिणी कहा गया. एक हजार सालों तक उन्होंने केवल फल और फूल खाए, सौ वर्षों तक जमीन पर रहकर कठिन जीवन व्यतीत किया. उन्होंने कठिन उपवास रखे, खुले आकाश के नीचे वर्षा और धूप सहा. तीन हजार वर्षों तक टूटे हुए बिल्व पत्र खाकर भगवान शंकर की आराधना की. इसके बाद उन्होंने सूखे बिल्व पत्र भी नहीं खाए और कई हजार वर्षों तक निर्जल और निराहार तपस्या करती रहीं. पत्तों को छोड़ देने के कारण उन्हें अपर्णा नाम से भी जाना गया. उनकी कठोर तपस्या देखकर देवता, ऋषि हैरान रह गए और कहा कि ऐसा तप कोई और नहीं कर सका. देवताओं ने देवी से कहा की उनकी मनोकामना पूरी होगी और भगवान शंकर उन्हें पति रूप में प्राप्त होंगे. इस कथा का संदेश यह है कि जीवन में कठिन परिस्थितियों में भी मन विचलित नहीं होना चाहिए. मां ब्रह्मचारिणी की कृपा से साधक को सफलता प्राप्त होती हैं. नवरात्रि के दूसरे दिन इसी स्वरूप की पूजा की जाती है.

6:26 PM. 22 Sept 25 6:26 PM. 22 Sept

शारदीय नवरात्रि के दूसरे दिन करें ये उपाय

मान्यता है कि शारदीय नवरात्रि के दूसरे दिन से हाथों में थोड़ी-सी मिश्री लेकर “या देवी सर्वभूतेषु शक्ति-रूपेण संस्थिता. नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥” मंत्र का 108 बार जाप करने से बच्चे में बुद्धि, मेधा और कार्यकुशलता बढ़ती है. इसे रोज़ाना सात दिनों तक करना चाहिए.

5:55 PM. 22 Sept 25 5:55 PM. 22 Sept

मां ब्रह्मचारिणी की आरती लिरिक्स (Brahmacharini mata Aarti lyrics)

जय अंबे ब्रह्माचारिणी माता।
जय चतुरानन प्रिय सुख दाता॥

ब्रह्मा जी के मन भाती हो।
ज्ञान सभी को सिखलाती हो॥

ब्रह्मा मंत्र है जाप तुम्हारा।
जिसको जपे सकल संसारा॥

जय गायत्री वेद की माता।
जो मन निस दिन तुम्हें ध्याता॥

कमी कोई रहने न पाए।
कोई भी दुख सहने न पाए॥

उसकी विरति रहे ठिकाने।
जो तेरी महिमा को जाने॥

रुद्राक्ष की माला ले कर।
जपे जो मंत्र श्रद्धा दे कर॥

आलस छोड़ करे गुणगाना।
मां तुम उसको सुख पहुंचाना॥

ब्रह्माचारिणी तेरो नाम।
पूर्ण करो सब मेरे काम॥

भक्त तेरे चरणों का पुजारी।
रखना लाज मेरी महतारी॥

5:18 PM. 22 Sept 25 5:18 PM. 22 Sept

नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी को प्रसन्न करने के लिए इन मंत्रों का जाप करें

1. ऊँ ऐं ह्रीं क्लीं ब्रह्मचारिण्यै नम:

2. ब्रह्मचारयितुम शीलम यस्या सा ब्रह्मचारिणी।

सच्चीदानन्द सुशीला च विश्वरूपा नमोस्तुते|

3. या देवी सर्वभेतेषु मां ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

4. दधाना कर मद्माभ्याम अक्षमाला कमण्डलू।

देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा।।

4:37 PM. 22 Sept 25 4:37 PM. 22 Sept

मां ब्रह्मचारिणी की सवारी क्या हैं?

मां दुर्गा के स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी की सवारी गाय है.

4:32 PM. 22 Sept 25 4:32 PM. 22 Sept

मां ब्रह्मचारिणी का स्वरूप कैसा है?

नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है. उनका स्वरूप शांत, सरल और ध्यानमग्न माना जाता है. मां सफेद वस्त्रों में सुसज्जित होती हैं, जो ज्ञान, शांति और संयम का प्रतीक हैं. उनके दाएं हाथ में माला और बाएँ हाथ में कमंडल होता है, जिसमें माला सतत भक्ति और ध्यान का, और कमंडल तपस्या और संयम का प्रतीक है.

4:07 PM. 22 Sept 25 4:07 PM. 22 Sept

मां ब्रह्मचारिणी का स्वरूप कैसा है?

नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है. उनका स्वरूप शांत, सरल और ध्यानमग्न माना जाता है. मां सफेद वस्त्रों में सुसज्जित होती हैं, जो ज्ञान, शांति और संयम का प्रतीक हैं. उनके दाएं हाथ में माला और बाएँ हाथ में कमंडल होता है, जिसमें माला सतत भक्ति और ध्यान का, और कमंडल तपस्या और संयम का प्रतीक है.

3:38 PM. 22 Sept 25 3:38 PM. 22 Sept

देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा का शुभ मुहूर्त

सुबह- 04:54 से 05:41 बजे तक पूजा का ब्रह्म मुहूर्त रहेगा.

दोपहर में- 12:08 से 12:56 बजे तक अभिजीत मुहूर्त रहेगा.

शाम को- 06:35 से 07:46 बजे तक सायाह्न संध्या मुहूर्त रहेगा.

3:03 PM. 22 Sept 25 3:03 PM. 22 Sept

मां ब्रह्मचारिणी की आराधना का महत्व

नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की आराधना की जाती है. मां ब्रह्मचारिणी को ज्ञान, संयम और तपस्या की प्रतीक माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन उनकी पूजा करने से मानसिक शांति, बुद्धि और ज्ञान की वृद्धि होती है.

2:31 PM. 22 Sept 25 2:31 PM. 22 Sept

मां ब्रह्मचारिणी को करें इस चीज का भोग अर्पित

मान्यता है कि मां ब्रह्मचारिणी को मिश्री और फलों का भोग अर्पित करना बेहद शुभ होता है. इसके अलावा, सादा दूध या हलवे का भोग लगाना भी अच्छा माना जाता है.

1:28 PM. 22 Sept 25 1:28 PM. 22 Sept

मंत्र जाप की सही विधि

देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा करते समय हाथ में लाल रंग का पुष्प लें, मां का ध्यान करें और श्रद्धा-भक्ति के साथ यह मंत्र उच्चारित करें. हाथ जोड़कर प्रार्थना करने से मन और आत्मा में शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है.

1:28 PM. 22 Sept 25 1:28 PM. 22 Sept

मां ब्रह्मचारिणी की पूजा विधि और मंत्र जाप

यदि आप किसी कार्य में सफलता और विजय पाना चाहते हैं, तो मां ब्रह्मचारिणी के मंत्र का जाप करना बेहद शुभ माना जाता है. पूजा करते समय साफ स्थान पर आसन लगाकर बैठें, देवी का स्मरण करें और फूल, अक्षत व चंदन अर्पित करें. फिर नीचे दिए गए मंत्र का कम से कम एक माला (108 बार) जाप करें:

ऊं ऐं ह्रीं क्लीं ब्रह्मचारिण्यै नमः।

इस मंत्र का नियमित जाप करने से साधक को जीवन में विजय और सभी बाधाओं से मुक्ति प्राप्त होती है।

1:28 PM. 22 Sept 25 1:28 PM. 22 Sept

पूजा से मिलने वाले फल

नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की उपासना साधक को असाधारण फल देती है. इस दिन साधक अपने मन को स्वाधिष्ठान चक्र में स्थित कर देवी का ध्यान करते हैं. उनकी कृपा से तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार और संयम जैसे गुणों की वृद्धि होती है. जीवन के कठिन संघर्षों में भी व्यक्ति अपने कर्तव्य से डिगता नहीं और उसे सर्वत्र सिद्धि एवं विजय की प्राप्ति होती है. लालसाओं से मुक्ति और मन की शुद्धि के लिए भी मां ब्रह्मचारिणी का ध्यान अत्यंत लाभकारी माना जाता है.

1:28 PM. 22 Sept 25 1:28 PM. 22 Sept

नवरात्रि में लौंग चढ़ाने का महत्व

नवरात्रि के दौरान लौंग चढ़ाना अत्यंत शुभ माना जाता है. यह न केवल मां दुर्गा की कृपा पाने का माध्यम है, बल्कि नकारात्मकता को दूर करके घर में सकारात्मक ऊर्जा भी लाता है. नवरात्रि के नौ दिनों तक हर शाम दीपक में लौंग के जोड़े को डालकर जलाएं और उसका धुआं पूरे घर में फैलाएं. आरती के समय कपूर के साथ लौंग डालकर आरती करने से भी मां की विशेष कृपा प्राप्त होती है.

1:28 PM. 22 Sept 25 1:28 PM. 22 Sept

मां ब्रह्मचारिणी का प्रिय भोग

मां ब्रह्मचारिणी को मिश्री और पंचामृत का भोग बेहद प्रिय है. भक्त पंचामृत तैयार कर माता को अर्पित करते हैं. इसके अलावा, सफेद रंग की मिठाइयाँ और मौसमी फल भी अर्पित करना शुभ माना जाता है.

1:28 PM. 22 Sept 25 1:28 PM. 22 Sept

मां ब्रह्मचारिणी की पूजा विधि

सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहन लें. इसके बाद आसन पर बैठकर माता ब्रह्मचारिणी का ध्यान करें. उन्हें फूल, अक्षत, चंदन, रोली आदि अर्पित करें. दूध, दही, घृत, शहद और शक्कर से माता का स्नान कराएं. भोग में पिस्ते की मिठाई, पान, सुपारी और लौंग अर्पित करें. फिर मंत्रजाप और आरती करें. इससे मां की कृपा से संयम और साधना की शक्ति प्राप्त होती है.

Shardiya Navratri Day 2 Maa Brahmacharini Live Puja Vidhi: आज 23 सितंबर 2025 को शारदीय नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा का विशेष महत्व है. ‘ब्रह्म’ का अर्थ है तपस्या और ‘चारिणी’ का अर्थ है आचरण करने वाली देवी. माता ब्रह्मचारिणी के हाथों में अक्ष माला और कमंडल होते हैं, जो तपस्या और संयम के प्रतीक हैं. मान्यता है कि सच्चे मन से उनकी पूजा करने पर व्यक्ति को धैर्य और आत्मसंयम की शक्ति प्राप्त होती है. आइए जानते हैं मां ब्रह्मचारिणी की पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, मंत्र और आरती…

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लेखक के बारे में

By Neha Kumari

प्रभात खबर डिजिटल के जरिए मैंने पत्रकारिता की दुनिया में अपना पहला कदम रखा है. यहां मैं धर्म और राशिफल बीट पर बतौर जूनियर कंटेंट राइटर के तौर पर काम कर रही हूं. इसके अलावा मुझे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों से जुड़े विषयों पर लिखने में रुचि है.

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