सावन का आखिरी मंगला गौरी व्रत आज, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त, पूजन विधि, सामग्री और आरती

श्रावण माह का अंतिम मंगला गौरी व्रत आज, 25 अगस्त को रखा जाएगा. यह व्रत माता पार्वती को समर्पित है और मुख्य रूप से अखंड सौभाग्य, सुखी वैवाहिक जीवन और संतान सुख की कामना के लिए किया जाता है. इस लेख में जानें पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और पूजन सामग्री.

Mangla Gauri Vrat: श्रावण माह के हर मंगलवार को मंगला गौरी व्रत रखा जाता है. यह व्रत माता पार्वती को समर्पित है. धार्मिक मान्यता है कि जो भी व्यक्ति इस दिन मां मंगला गौरी की सच्चे मन से पूजा करता है और व्रत रखता है, उस पर माता की कृपा सदैव बनी रहती है. साथ ही, मान्यता है कि साधक को अखंड सौभाग्य, सुखी वैवाहिक जीवन और संतान सुख की प्राप्ति होती है. यह व्रत सुहागिन महिलाओं के साथ-साथ अविवाहित कन्याओं के लिए भी बेहद फलदायी माना जाता है. यदि किसी कन्या के विवाह में देरी हो रही हो या कुंडली में मंगल दोष की स्थिति हो, तो उनके लिए इस दिन मां गौरी का व्रत और पूजन विशेष फलदायी माना जाता है.

मंगला गौरी व्रत पूजन सामग्री

मां मंगला गौरी (एआई तस्वीर)
  • मां मंगला गौरी का चित्र या प्रतिमा
  • लकड़ी की चौकी
  • लाल या पीला वस्त्र
  • गंगाजल
  • कलश
  • सोलह श्रृंगार की सामग्री
  • अक्षत
  • लाल फूल
  • फल
  • मिठाई
  • गेहूं के आटे के दीपक
  • 16 प्रकार के सूखे मेवे
  • 16 प्रकार की भोग सामग्री
  • घी
  • दीपक
  • आरती की थाली

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मंगला गौरी व्रत पूजा का शुभ मुहूर्त

  • अभिजित मुहूर्त: 25 अगस्त, दोपहर 12:03 बजे से 12:54 बजे तक.
  • अमृत काल: 25 अगस्त, दोपहर 3:48 बजे से शाम 5:33 बजे तक.
  • पूजा का महत्व: इन शुभ समय में मां गौरी और भगवान शिव की पूजा करना मंगलकारी माना जाता है.

मंगला गौरी व्रत पूजा की विधि

मां मंगला गौरी की पूजा करती हुई महिला की सांकेतिक तस्वीर (एआई)
  1. ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ लाल या पीले वस्त्र धारण करें. इसके बाद मां मंगला गौरी के सामने व्रत का संकल्प लें.
  2. उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करके लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं. उस पर भगवान गणेश, माता पार्वती और भगवान शिव की प्रतिमा स्थापित करें.
  3. देसी घी का दीपक जलाएं. इस व्रत में 16 बत्तियों वाले या आटे से बने चार मुख वाले दीपक का विशेष महत्व माना जाता है.
  4. सबसे पहले विघ्नहर्ता भगवान गणेश का पूजन करें.
  5. इसके बाद मां मंगला गौरी को जल, रोली, अक्षत, चंदन और सोलह श्रृंगार की सामग्री अर्पित करें.
  6. पूजन के दौरान मंगला गौरी व्रत कथा का पाठ करें या उसका श्रवण करें. इसके बाद आरती करें और मां गौरी से परिवार की सुख-समृद्धि, पति की दीर्घायु और संतान सुख की प्रार्थना करें.

मां गौरी की आरती

जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी. तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥ ॐ जय अम्बे गौरी॥

मांग सिंदूर विराजत, टीको मृगमद को. उज्ज्वल से दोउ नैना, चंद्रवदन नीको॥ ॐ जय अम्बे गौरी॥

कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै. रक्तपुष्प गल माला, कंठन पर साजै॥ ॐ जय अम्बे गौरी॥

केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्पर धारी. सुर-नर-मुनिजन सेवत, तिनके दुखहारी॥ ॐ जय अम्बे गौरी॥

कानन कुंडल शोभित, नासाग्रे मोती. कोटिक चंद्र दिवाकर, सम राजत ज्योति॥ ॐ जय अम्बे गौरी॥

शुंभ-निशुंभ बिदारे, महिषासुर घाती. धूम्रविलोचन नैना, निशदिन मदमाती॥ ॐ जय अम्बे गौरी॥

चंड-मुंड संहारे, शोणित बीज हरे. मधु-कैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे॥ ॐ जय अम्बे गौरी॥

ब्रह्माणी, रुद्राणी, तुम कमला रानी. आगम निगम बखानी, तुम शिव पटरानी॥ ॐ जय अम्बे गौरी॥

चौंसठ योगिनी मंगल गावत, नृत्य करत भैरों. बाजत ताल मृदंगा, अरु बाजत डमरू॥ ॐ जय अम्बे गौरी॥

तुम ही जग की माता, तुम ही हो भर्ता. भक्तन की दुख हरता, सुख-संपत्ति करता॥ ॐ जय अम्बे गौरी॥

भुजा चार अति शोभित, वर मुद्रा धारी. मनवांछित फल पावत, सेवत नर-नारी॥ ॐ जय अम्बे गौरी॥

कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती. श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योति॥ ॐ जय अम्बे गौरी॥

श्री अम्बेजी की आरती, जो कोई नर गावे. कहत शिवानंद स्वामी, सुख-संपत्ति पावे॥

ॐ जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी॥

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लेखक के बारे में

By नेहा कुमारी

नेहा कुमारी वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में धर्म बीट पर कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. वह व्रत-त्योहार, राशिफल, पंचांग, ज्योतिष, शुभ मुहूर्त, पौराणिक कथाओं और भारतीय संस्कृति से जुड़े विषयों पर लेख लिखती हैं. उन्होंने वेस्ट बंगाल स्टेट यूनिवर्सिटी से मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन की डिग्री प्राप्त की है.

डिजिटल पत्रकारिता में उन्होंने धर्म, ज्योतिष और भारतीय परंपराओं से जुड़े विषयों पर विशेष अनुभव हासिल किया है. उनका उद्देश्य पाठकों तक सरल भाषा में सटीक, विश्वसनीय और उपयोगी जानकारी पहुंचाना है, ताकि वे धार्मिक और सांस्कृतिक विषयों को आसानी से समझ सकें.

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