Gajanan Sankashti Chaturthi 2026: सावन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को गजानन संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है. इस दिन भगवान श्रीगणेश की विधि-विधान से पूजा करने और व्रत रखने की परंपरा है. वैदिक पंचांग के अनुसार चतुर्थी तिथि 1 अगस्त 2026 को रात 11:07 बजे शुरू होगी और 2 अगस्त 2026 को रात 11:15 बजे समाप्त होगी. उदयातिथि और चंद्रोदय के आधार पर गजानन संकष्टी चतुर्थी का व्रत 2 अगस्त, रविवार को रखा जाएगा. इस बार सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग भी बन रहा है. पूरे दिन पंचक रहेगा, लेकिन इसका व्रत और पूजा पर कोई अशुभ प्रभाव नहीं माना गया है. यहां जानिए गजानन संकष्टी चतुर्थी की के दिन गणेश जी को क्या अर्पित करें.
गणेश जी को क्या चढ़ाएं?
गजानन संकष्टी चतुर्थी पर भगवान गणेश को उनकी प्रिय वस्तुएं अर्पित करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है. ज्योतिषाचार्य डॉ एन के बेरा बताते हैं कि पूजा के दौरान इन चीजों का भोग अवश्य लगाएं—
- दूर्वा (21 या 11 गांठ)
- मोदक या लड्डू
- गुड़ और चना
- नारियल
- लाल या पीले फूल
- सिंदूर और अक्षत
- केले एवं मौसमी फल
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मान्यता है कि मोदक और दूर्वा अर्पित करने से गणपति शीघ्र प्रसन्न होकर भक्तों के विघ्न दूर करते हैं.
पूजा नियम और चंद्र अर्घ्य का महत्व
प्रातः स्नान के बाद व्रत का संकल्प लें और भगवान गणेश का अभिषेक कर विधिवत पूजा करें. गणेश मंत्रों का जाप करें तथा आरती के बाद भोग अर्पित करें. संकष्टी चतुर्थी का व्रत चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही पूर्ण माना जाता है. इसलिए चंद्रोदय के समय जल, अक्षत और पुष्प के साथ चंद्रदेव को अर्घ्य देकर व्रत का पारण करें. धार्मिक मान्यता है कि विघ्नहर्ता गणेश की श्रद्धापूर्वक पूजा करने से जीवन के संकट दूर होते हैं तथा सुख-समृद्धि और सफलता का आशीर्वाद प्राप्त होता है.
