Bel Patra Rules: सावन में भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है. इस दौरान शिवलिंग पर बेलपत्र अर्पित करने से महादेव प्रसन्न होते हैं. लेकिन शास्त्रों में बेलपत्र चढ़ाने के कुछ विशेष नियम और मंत्र बताए गए हैं, जिनका पालन करने से पूजा का पूर्ण फल प्राप्त होता है.
शिवलिंग पर कितने बेलपत्र चढ़ाएं?
शिव पुराण के अनुसार भगवान शिव को 3, 5, 7, 11, 21, 51 या 101 बेलपत्र अर्पित करना शुभ माना जाता है. कम से कम तीन पत्तियों वाला एक अखंड बेलपत्र अवश्य चढ़ाएं. यह त्रिदेव और त्रिगुण का प्रतीक माना जाता है.
बेलपत्र चढ़ाने का सही तरीका
पूजा से पहले बेलपत्र को स्वच्छ जल से धो लें. बेलपत्र का चिकना भाग शिवलिंग को स्पर्श करना चाहिए और डंठल आपकी ओर होना चाहिए. बेलपत्र उलटा रखकर अर्पित करने की परंपरा है. यदि नया बेलपत्र उपलब्ध न हो तो पहले चढ़ाए गए बेलपत्र को धोकर पुनः अर्पित किया जा सकता है.
बेलपत्र कैसा होना चाहिए?
भगवान शिव को हमेशा ताजा, हरा-भरा और तीन पत्तियों वाला अखंड बेलपत्र अर्पित करें. कटा-फटा, छेद वाला, सूखा या दाग-धब्बेदार बेलपत्र पूजा में उपयोग नहीं करना चाहिए. ऐसी मान्यता है कि शुद्ध बेलपत्र अर्पित करने से शिवजी शीघ्र प्रसन्न होते हैं.
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बेलपत्र चढ़ाते समय कौन-सा मंत्र बोलें?
बेलपत्र अर्पित करते समय "ॐ नमः शिवाय" का जाप करना सबसे सरल और प्रभावी माना गया है. इसके अलावा "त्रिदलं त्रिगुणाकारं त्रिनेत्रं च त्रिधायुधम्. त्रिजन्मपापसंहारं बिल्वपत्रं शिवार्पणम्॥" मंत्र का जाप भी अत्यंत शुभ माना जाता है. श्रद्धा और भक्ति के साथ किया गया मंत्र जाप शिव कृपा प्राप्त करने का श्रेष्ठ माध्यम माना गया है.
