Sankashti Ganesh Chaturthi 2026: आषाढ़ कृष्ण पक्ष की संकष्टी गणेश चतुर्थी इस वर्ष आज 3 जुलाई 2026 (शुक्रवार) को मनाई जा रही है. इस बार का पर्व इसलिए भी विशेष माना जा रहा है क्योंकि इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग और कृष्णपिंगल योग का दुर्लभ संयोग बन रहा है. ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस शुभ योग में भगवान गणेश की पूजा-अर्चना करने से विघ्न दूर होते हैं और मनोकामनाओं की पूर्ति होती है.
सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 5:54 बजे से 11:46 बजे तक रहेगा, जबकि प्रीति योग में भी गणेश पूजन को अत्यंत फलदायी माना गया है. चतुर्थी तिथि का प्रारंभ 11:21 बजे होगा और यह दिन-रात तक प्रभावी रहेगी.
कृष्णपिङ्गल संकष्टी चतुर्थी पूजा विधि
- प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें और व्रत का संकल्प लें.
- भगवान गणेश का शुद्ध जल से अभिषेक कर विधिवत पूजन करें.
- पीला चंदन, दूर्वा, पुष्प, फल और अक्षत अर्पित करें.
- तिल के लड्डू, मोदक या प्रिय नैवेद्य का भोग लगाएं.
- कृष्णपिङ्गल संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा का श्रद्धापूर्वक पाठ या श्रवण करें.
- “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का यथाशक्ति जाप करें.
- दीप-धूप के साथ गणेश जी की आरती कर सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें.
- रात्रि में चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत का पारण करें.
- अंत में पूजा में हुई त्रुटियों के लिए क्षमा-याचना करें.
गणेश मंदिरों में होंगे धार्मिक आयोजन
आज देशभर के गणेश मंदिरों में भी दिनभर विशेष पूजा-अर्चना होगी. श्रद्धालु भगवान गणेश को दूर्वा, लड्डू, पुष्प और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करेंगे. कुछ मंदिरों में शाम की आरती के बाद महाप्रसाद और सामूहिक गणेश मंत्र जाप का आयोजन भी किया जाएगा.
संकष्टी चतुर्थी का महत्व
धार्मिक मान्यता है कि संकष्टी गणेश चतुर्थी का व्रत रखने, भगवान गणेश की विधि-विधान से पूजा करने और रात्रि में चंद्रमा को अर्घ्य अर्पित करने से जीवन के सभी संकट दूर होते हैं. सर्वार्थ सिद्धि योग में की गई आराधना विशेष रूप से शुभ और मनोकामना पूर्ण करने वाली मानी जाती है.
