Sankashti Chaturthi 2020: संकष्टी चतुर्थी व्रत आज, जानिए पूजा विधि और शुभ मुहूर्त

Sankashti Chaturthi 2020 : पूर्णिमा के बाद कृष्ण पक्ष में आने वाले चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी कहते हैं. संकष्टी चतुर्थी का दिन भगवान गणेश की पूजा-अर्चना करते है. आज हम आपको संकष्टी चतुर्थी 2020 में कब है (Sankashti Chaturthi 2020 Me kab hai), क्या है संकष्टी चतुर्थी का महत्व (sankashti chaturthi subh mahurat), क्या है संकष्टी चतुर्थी का महत्व (Sankashti Chaturthi ke Mahatva), क्या है संकष्टी चतुर्थी की पूजा विधि Sankashti Chaturthi Puja Vidhi.

By Radheshyam Kushwaha | May 10, 2020 10:28 AM

Sankashti Chaturthi 2020: संकष्टी चतुर्थी व्रत आज है. हिन्दू धर्म के अनुसार प्रत्येक माह के शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष में चतुर्थी तिथि आती हैं. इस दिन भगवान गणेश की पूजा की जाती है. बुद्ध पूर्णिमा के बाद आने वाली चतुर्थी को ये व्रत रखा जाता है. जो इस बार 10 मई यानि आज संकष्टी चतुर्थी व्रत. इस दिन व्रत रखने के बाद चांद के दर्शन जरूरी माना जाता हैं. शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी के नाम से जाना जाता है, और कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है.

संकष्टी चतुर्थी शुभ मुहूर्त

साल 2020 में संकष्टी चतुर्थी का व्रत 10 मई रविवार के दिन रखा जाएगा.

संकष्टी चतुर्थी तिथि प्रारंभ – सुबह 8.04 बजे से 10 मई

संकष्टी चतुर्थी तिथि समाप्त – सुबह 6.35 बजे तक 11 मई.

संकष्टी चतुर्थी पूजा विधि

संकष्टी चतुर्थी के दिन सुबह में स्नान कर गणेश जी की पूजा की जाती है. हाथ में जल, अक्षत् और फूल लेकर व्रत का संकल्प लिया जाता है, इसके बाद पूजा स्थल पर एक चौकी पर गणेश जी की प्रतिमा या तस्वीर को स्थापित किया जाता है. दिनभर उपवास रखें. गणेश की प्रतिमा स्थापित कर सिंदूर चढ़ाये. उन्हें पुष्प, अक्षत्, चंदन, धूप-दीप, और शमी के पत्ते अर्पित करें. व्रत का संकल्प लेकर घी का दीपक जलाकर श्रद्धा भाव से आरती करें. गणेश जी को दुर्वा जरूर चढ़ाएं और लड्डुओं का भोग लगाएं.

गणपति जी को अक्षत्, रोली, फूलों की माला, धूप, वस्त्र आदि से सुशोभित करें. इसके बाद गणेश जी के मंत्रों का जाप करें. रात में चंद्रमा को जल से अर्घ्य दें. इसके बाद उनके अतिप्रिया 21 दूर्वा अर्पित करें और उनके पसंदीदा लड्डूओं वा मोदकों का भोग लगाएं। श्री गणेश जी को दूर्वा अर्पित करते समय ओम गं गणपतय: नम: मंत्र का जाप करें. व्रत कथा पढ़े अंत में सभी लोगों को प्रसाद वितरित कर पूजा संपन्न करें.

संकष्टी चतुर्थी का महत्व

संकष्टी चतुर्थी पर श्री गणेश की पूजा दिन में दो बार करने का विधान है. संकष्टी चतुर्थी के दिन गणेश जी की उपासना करने से में सुख-समृद्धि, आर्थिक संपन्नता के साथ-साथ ज्ञान एवं बुद्धि प्राप्ति होती है. भगवान गणेश जी को विघ्नहर्ता भी कहा जाता है. इसलिए संकष्टी चतुर्थी के दिन की गई पूजा से व्यक्ति के सभी कार्य निर्विघ्न संपन्न होते हैं.

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