Gemstone Astrology: माणिक रत्न किसके लिए होता है शुभ? सूर्य से जुड़े इस रत्न को पहनने से पहले जानें ये 10 जरूरी बातें

ज्योतिष में माणिक को सूर्य का प्रमुख रत्न माना जाता है. जानें किन परिस्थितियों में माणिक धारण करना शुभ होता है और इससे क्या लाभ मिलते हैं.

Gemstone Astrology: ज्योतिष शास्त्र में माणिक को सूर्य ग्रह से संबंधित प्रमुख रत्न माना जाता है. कुंडली में सूर्य की स्थिति अनुकूल होने पर माणिक धारण करने से इसके शुभ प्रभाव प्राप्त हो सकते हैं. हालांकि, हर व्यक्ति के लिए माणिक पहनना उचित नहीं माना जाता है. इसलिए इसे धारण करने से पहले जन्म कुंडली में सूर्य की स्थिति को देखना जरूरी माना जाता है. ज्योतिषाचार्य संजीत कुमार मिश्रा के अनुसार, माणिक धारण करने से पहले कुंडली में सूर्य की स्थिति, भाव और अन्य ग्रहों के साथ उसके संबंध को देखना जरूरी है. सही स्थिति में माणिक धारण करने से आत्मविश्वास, मान-सम्मान और यश में वृद्धि हो सकती है.

माणिक रत्न किसके लिए माना जाता है शुभ?

माणिक को सूर्य से संबंधित रत्न माना जाता है. सूर्य में आत्मा, आत्मविश्वास, मान-सम्मान, यश और नेतृत्व क्षमता का कारक है. कुंडली में सूर्य की स्थिति अनुकूल हो या अनुकूल न हो, दोनों ही स्थितियों में माणिक धारण करने से पहले कुंडली का विश्लेषण करना जरूरी माना जाता है.

माणिक धारण करने के लाभ

नौकरी में परेशानी, प्रमोशन न मिलना, यश की कमी या आत्मविश्वास में कमी जैसी स्थितियों में भी माणिक को उपयोगी माना जाता है.

कुंडली में सूर्य की स्थिति से तय होता है माणिक का प्रभाव

माणिक धारण करने से पहले कुंडली में सूर्य किस भाव में स्थित है, यह देखना जरूरी है. अलग-अलग भावों में सूर्य की स्थिति के आधार पर माणिक को अलग-अलग परिस्थितियों में उपयोगी माना गया है.

दूसरे भाव में सूर्य

कुंडली के दूसरे भाव में सूर्य होने पर धन प्राप्ति, स्वास्थ्य और नौकरी से जुड़ी परेशानियों की स्थिति बन सकती है. ऐसी स्थिति में माणिक धारण करना लाभदायक माना जाता है.

चौथे भाव में सूर्य

चौथे भाव में सूर्य होने पर पारिवारिक सुख में कमी और आजीविका से जुड़ी बाधाएं आने की मान्यता है. ऐसे में माणिक धारण करने से लाभ मिल सकता है.

पंचम भाव में सूर्य

यदि सूर्य पंचम भाव का स्वामी हो और शिक्षा, प्रेम संबंध, संतान सुख या व्यापार में लाभ से जुड़ी परेशानियां हों, तो माणिक धारण करने की सलाह दी जा सकती है. मान्यता के अनुसार, इससे उन्नति के अवसर बन सकते हैं.

सातवें भाव में सूर्य

सातवें भाव में सूर्य की स्थिति को स्वास्थ्य, वैवाहिक जीवन और व्यापार से जुड़ी परेशानियों से जोड़कर देखा जाता है. ऐसी स्थिति में भी माणिक धारण करना उपयोगी माना गया है.

एकादश भाव में सूर्य

एकादश भाव में सूर्य होने पर संतान को लेकर चिंता, बड़े भाई से जुड़ी परेशानी, यश की कमी और धन संबंधी दिक्कतों की स्थिति बनने की मान्यता है. ऐसे में माणिक को लाभकारी माना गया है.

द्वादश भाव में सूर्य

द्वादश भाव में सूर्य की स्थिति को स्वास्थ्य के लिए अनुकूल नहीं माना जाता. ज्योतिषीय मान्यता में इसे आंखों से जुड़ी परेशानियों से भी जोड़कर देखा जाता है. ऐसी स्थिति में माणिक धारण करने की सलाह दी जाती है.

किन लग्न वालों के लिए माणिक माना जाता है शुभ?

ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार, कुछ विशेष लग्न वाले जातकों के लिए माणिक धारण करना लाभकारी माना जाता है.

  • मेष लग्न: मेष लग्न वालों के लिए माणिक को सुख-संपत्ति, संतान और राज्य सुख से जोड़कर देखा जाता है.
  • सिंह लग्न: सिंह लग्न वालों के लिए माणिक को शत्रु भय कम करने तथा मानसिक और शारीरिक लाभ के लिए उपयोगी माना जाता है.
  • वृश्चिक लग्न: वृश्चिक लग्न वाले जातकों के लिए माणिक को मान-सम्मान, व्यापार और नौकरी में उन्नति से जोड़कर देखा जाता है.
  • धनु लग्न: धनु लग्न वालों के लिए माणिक को आर्थिक लाभ, पिता के सुख और भाग्य में उन्नति के लिए लाभकारी माना जाता है.
  • मीन लग्न: मीन लग्न वालों के लिए भी माणिक को लाभकारी माना गया है.

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किस धातु में पहनें माणिक?

माणिक को सोना, पंचधातु या तांबे में धारण किया जा सकता है. हालांकि, माणिक के लिए सोने की धातु को विशेष रूप से उपयुक्त माना जाता है.

माणिक कब पहनना चाहिए?

माणिक को शुक्ल पक्ष की तृतीया, पंचमी, अष्टमी, दशमी या एकादशी तिथि को रविवार के दिन धारण करना शुभ माना जाता है. इसे सूर्योदय के समय पहनना चाहिए. माणिक पहनने से पहले इसे शुद्ध कर सूर्य देव की पूजा और मंत्र जाप करने की परंपरा है.

माणिक किस उंगली में पहनना चाहिए?

ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार, माणिक को अनामिका उंगली में धारण करना शुभ माना जाता है.

माणिक पहनने से पहले कैसे करें शुद्ध?

माणिक को धारण करने से पहले कच्चे दूध या गंगाजल में रखने के बाद साफ पानी से स्नान कराने की परंपरा है. इसके बाद इसे पुष्प, चंदन और धूप-बत्ती से पूजा की जाती है.

माणिक धारण करते समय सूर्य के मंत्र का जाप भी किया जाता है:

“ॐ घृणि सूर्याय नमः”

इसके बाद माणिक को दाहिने हाथ की अनामिका उंगली में धारण करना चाहिए है.

माणिक कब खरीदना चाहिए?

माणिक की खरीदारी के लिए रविवार, सोमवार या गुरुवार का दिन शुभ माना गया है.

किन लोगों को माणिक नहीं पहनना चाहिए?

शनि और शुक्र से प्रभावित लोगों को बिना ज्योतिषीय सलाह के माणिक धारण नहीं करना चाहिए.

माणिक पहनने से पहले इस बात का रखें ध्यान

माणिक धारण करने से पहले कुंडली में सूर्य की स्थिति, भाव, अन्य ग्रहों के साथ उसका संबंध और दशा-अंतरदशा जैसी बातों को ध्यान में रखना जरूरी माना जाता है. इसलिए माणिक पहनने से पहले किसी ज्योतिष विशेषज्ञ से कुंडली का विश्लेषण जरूर करवाएं. बिना विशेषज्ञ की सलाह के इसे न पहनें.

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लेखक के बारे में

By नेहा कुमारी

नेहा कुमारी वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में धर्म बीट पर कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. वह व्रत-त्योहार, राशिफल, पंचांग, ज्योतिष, शुभ मुहूर्त, पौराणिक कथाओं और भारतीय संस्कृति से जुड़े विषयों पर लेख लिखती हैं. उन्होंने वेस्ट बंगाल स्टेट यूनिवर्सिटी से मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन की डिग्री प्राप्त की है.

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