Rahu Ketu Story: राहु-केतु के नाम से अक्सर लोग भयभीत हो जाते हैं, लेकिन हकीकत यह है कि राहु अचानक मिलने वाली सफलता का कारक है और केतु को ‘मोक्ष’ का कारक माना गया है. कुंडली में कमजोर राहु जहां जीवन में मानसिक तनाव और पारिवारिक कलह का कारण बनता है, वहीं शुभ स्थिति में बैठा राहु व्यक्ति को राजनीति और कूटनीति का बादशाह बना देता है. राहु जब सूर्य या चंद्रमा के साथ युति करता है, तब ‘ग्रहण दोष’ बनता है, जो जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में उतार-चढ़ाव लाता है.
Rahu Ketu: ‘मोक्ष’ का कारक ग्रह हैं केतु
केतु को ज्योतिष में ‘मोक्ष’ का कारक ग्रह माना गया है. यह जितना रहस्यमयी है, उतना ही परोपकारी भी है. यदि केतु कुंडली के तीसरे, छठे या ग्यारहवें भाव में बैठा है, तो उस व्यक्ति को शत्रुओं पर विजय और समाज में उच्च पद मिलता है. राहु की तरह यह भी सूर्य-चंद्रमा के साथ ग्रहण दोष बनाता है, लेकिन सही स्थिति में होने पर यह व्यक्ति को गहरी आध्यात्मिक सोच और मन की आवाज सुनने की काबिलियत बना देता है.
Rahu Ketu Story: पौराणिक कथा
राहु और केतु के जन्म की कहानी उस समय की है, जब देवताओं और असुरों के बीच अमृत प्राप्ति के लिए समुद्र मंथन के दौरान भीषण संघर्ष चल रहा था. पौराणिक कथा के अनुसार, सिंहिका के चतुर पुत्र ‘स्वरभानु’ ने भेष बदलकर चुपके से अमृत पान करने के लिए देवताओं की पंक्ति में छुप गया, जिसे सूर्य और चंद्रमा ने पहचान लिया, जैसे ही अमृत की कुछ बूंदें स्वरभानु के गले तक पहुंचीं, सूर्य-चंद्रमा ने उसकी असलियत उजागर कर दी और भगवान विष्णु ने पलक झपकते ही सुदर्शन चक्र से उसका सिर धड़ से अलग कर दिया. लेकिन अमृत के स्पर्श ने उसे मरने नहीं दिया. स्वरभानु का सिर ‘राहु’ कहलाया और उसका धड़ ‘केतु’ के नाम से जाना गया. पहचान उजागर करने के कारण राहु-केतु सूर्य और चंद्रमा को अपना शत्रु मानते हैं और बदला लेने के लिए सूर्य और चंद्रमा को अपनी छाया से जकड़ लेते हैं, जिसे हम ग्रहण कहते हैं.
राहु-केतु की शांति के सरल उपाय
राहु के लिए: “ॐ रां राहवे नमः” मंत्र का जाप करें और शनिवार को काले तिल का दान करें.
केतु के लिए: “ॐ कें केतवे नमः” मंत्र का जाप करें और कुत्तो को रोटी खिलाएं.
शिव उपासना: भगवान शिव की पूजा इन दोनों ग्रहों के नकारात्मक प्रभाव को कम करने का सबसे उत्तम मार्ग है.
