Premanand Ji Maharaj: कई बार ऐसा होता है कि जिस इंसान से हम प्रेम करते हैं, वह इंसान हमें प्रेम नहीं करता. उसके मन में किसी अन्य व्यक्ति के लिए प्यार होता है. यह जानने के बाद कई लोग बहुत दुखी हो जाते हैं और उसी इंसान से नफरत करने लगते हैं, जिससे उन्होंने कभी प्रेम किया था.प्रेमानंद महाराज इस विषय पर कहते हैं कि यदि आपने जिसे प्रेम किया, वह किसी और से प्रेम करे और यह जानने के बाद आप उससे नफरत करने लगें या उसे अपना दुश्मन मान लें, तो यह प्रेम नहीं है.
प्रेमानंद महाराज ने क्या कहा?
प्रेमानंद महाराज कहते हैं— मान लीजिए आप किसी से प्रेम करते हैं, लेकिन वह आपसे नहीं, किसी और से प्रेम करता है. तब आप क्या करेंगे? क्या आप उन्हें आशीर्वाद देंगे और उनके सुख की कामना करेंगे? यदि नहीं, तो यह सच्चा प्रेम नहीं है.
सच्चा प्रेम क्या होता है?
उनका कहना है कि यदि यह जानने के बाद आपका प्रेम बदल जाए और आप उस इंसान से द्वेष या नफरत करने लगें, जिससे आपने प्रेम किया था, तो वह प्रेम नहीं होता. वे कहते हैं कि सच्चा प्रेम वही है, जिसमें हर परिस्थिति में आप उस व्यक्ति की सुख-समृद्धि की कामना करें और उसे खुश देखना चाहें.
जिसे आप प्रेम करते हैं, यदि वह किसी और के साथ खुश है, तो उसे उसके पास जाने दें और उसके मंगल की कामना करें. उसकी खुशी में ही आप खुश रहें. प्रेमानंद महाराज कहते हैं कि यह करना सबके लिए संभव नहीं है, लेकिन जो इंसान भगवान में आस्था रखता है और उन पर विश्वास करता है, वही ऐसा कर पाता है.
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