Parshuram Ansh: परशुराम कैसे बने चिरंजीवी? माता के वध से कर्ण को श्राप देने तक, जानें पूरी कहानी

Parshuram Ansh: भगवान शिव के रुद्र अवतार हनुमान की तरह, भगवान विष्णु के अंशावतार परशुराम भी चिरंजीवी हैं. आइए जानते हैं परशुराम के जन्म, उनके माता के वध, भीष्म से युद्ध और कर्ण को दिए श्राप की पूरी.

Parshuram Ansh: इन दिनों 'हनुमान अंश' मूवी चर्चा में है. पुराणों में हनुमान जी को रुद्र अवतार कहा गया है. हनुमान जी भगवान शिव के 11वें अवतार हैं. शास्त्र-पुराणों के अनुसार, भगवान हनुमान आठ चिरंजीवियों में एक हैं. जिस प्रकार हनुमान जी को भगवान शिव का अंश माना जाता है, उसी तरह परशुराम भगवान विष्णु के अंशावतार हैं. इसके अलावा, हनुमान जी की तरह परशुराम जी को भी अमरता का वरदान प्राप्त है, यानी दोनों चिरंजीवी हैं. आज हम आपको 'परशुराम अंश' में उनके जन्म से लेकर अमर होने की कहानी बताते हैं.

कब और कैसे हुआ परशुराम का जन्म?

धर्मग्रंथों के मुताबिक, वैशाख शुक्ल तृतीया तिथि को रेणुका की कोख से भगवान विष्णु के अंशावतार परशुराम का जन्म हुआ था. उनके पिता ऋषि जमदग्नि को सप्त ऋषियों में एक माना गया है.

क्यों हुआ परशुराम और भीष्म के बीच युद्ध?

महाभारत के अनुसार, भीष्म को अस्त्र-शस्त्र की विद्या का ज्ञान परशुराम ने ही दिया था. एक बार भीष्म स्वयंवर से काशीराज की पुत्रियों (अंबा, अंबिका और अंबालिका) को अपने छोटे भाई (विचित्रवीर्य) से विवाह के लिए ले आए. इसके बाद अंबा ने भीष्म से कहा कि वह किसी दूसरे को अपना पति मान चुकी हैं. अंबा के ऐसा कहने पर भीष्म ने उन्हें सम्मानपूर्वक विदा कर दिया.

जिस व्यक्ति को अंबा अपना पति मान चुकी थीं, वह उनके हरण की घटना के बारे में जानकर उन्हें अपनाने से मना कर दिया. नाराज होकर अंबा परशुराम के पास पहुंचीं और घटना की जानकारी दी. अंबा की बात सुनकर भगवान परशुराम ने भीष्म को उनसे शादी करने के लिए कहा. मगर, ब्रह्मचारी होने की वजह से भीष्म ने विवाह करने से मना कर दिया. इसके बाद परशुराम और भीष्म के बीच भयानक युद्ध छिड़ गया. परशुराम ने अपने पूर्वजों की बात मानी और तत्काल अपने अस्त्र रख दिए.

परशुराम और भीष्म के बीच युद्ध (Image- AI Generated)

परशुराम ने क्यों किया अपनी माता का वध?

पौराणिक कथा के अनुसार, परशुराम की मां नदी में स्नान करके आश्रम वापस आ रही थीं. संयोगवश राजा चित्ररथ उसी नदी में तैर रहे थे. राजा को देखकर रेणुका के मन में विकार उत्पन्न हुआ और वह उसी स्थिति में आश्रम पहुंच गईं. जब जमदग्नि ऋषि को इस बात की जानकारी हुई, तो उन्होंने अपने बेटों से रेणुका (माता) का वध करने का आदेश दिया. लेकिन मोह के कारण किसी पुत्र ने अपने पिता की आज्ञा नहीं मानी.

तब परशुराम ने बिना विचार किए फरसे से अपनी माता का सिर धड़ से अलग कर दिया. इस घटना के बाद ऋषि जमदग्नि खुश होकर अपने पुत्र परशुराम से वरदान मांगने के लिए कहा. परशुराम ने अपने पिता से वरदान मांगा कि उनकी माता जीवित हो जाएं और उन्हें इस घटना की जानकारी न रहे. वरदान के फलस्वरूप उनकी माता जीवित हो गईं.

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परशुराम ने क्यों किया सहस्रबाहु अर्जुन का वध?

ब्रह्मवैवर्त और विष्णु पुराण की एक कथा के अनुसार, एक बार सहस्रबाहु अर्जुन (माहिष्मती देश के राजा) युद्ध में जीत हासिल करने के बाद आराम करने के लिए जमदग्नि ऋषि के आश्रम में ठहरे. उनकी नजर वहां स्थित एक कामधेनु पर पड़ी, जो बहुत आसानी से सैनिकों के लिए खाने की व्यवस्था कर देती थी. कामधेनु के गुण को देखकर सहस्रबाहु अर्जुन उसे अपने साथ ले गए. जब यह जानकारी परशुराम को हुई, तो उन्होंने सहस्रबाहु (1000 हाथ वाले) अर्जुन के सभी हाथ काटकर उसका वध कर दिया.

परशुराम और सहस्रबाहु के बीच युद्ध को दर्शाती तस्वीर (Image- AI)

कर्ण को क्यों दिया श्राप?

महाभारत की कथा के अनुसार, परशुराम भगवान विष्णु के अवतार हैं. कर्ण भी परशुराम के ही शिष्य थे. कहते हैं कि कर्ण ने परशुराम को अपना परिचय देते हुए 'सूतपुत्र' बताया था. एक बार परशुराम कर्ण की गोद में सिर रखकर सो रहे थे. तब कर्ण को एक कीड़ा काट लिया.

चूंकि कर्ण की गोद में परशुराम नींद में थे, ऐसे में उनकी नींद न टूटे, इसलिए कर्ण दर्द सहते रहे. जब परशुराम नींद से जागे, तो वो समझ गए कि कर्ण सूतपुत्र न होकर क्षत्रिय हैं. क्रोध में आकर परशुराम ने कर्ण को श्राप दिया- "मेरे द्वारा सिखाई गई विद्या की जब तुम्हें सबसे अधिक आवश्यकता होगी, तब तुम वह विद्या भूल जाओगे."

परशुराम ने क्यों तोड़ा था गणेश जी का दांत

ब्रह्मवैवर्त पुराण की कथा के अनुसार, परशुराम एक बार भगवान शिव के दर्शन करने कैलाश पर्वत पर पहुंचे. उस वक्त भगवान शिव ध्यान में थे. गणेश जी ने परशुराम को भगवान शिव से मिलने नहीं दिया. क्रोधित होकर परशुराम ने फरसे से गणेश जी पर वार कर दिया. चूंकि वह फरसा भगवान शिव का दिया हुआ था, इसलिए गणेश जी ने उसे खाली नहीं जाने दिया. परिणामस्वरूप, गणेश जी का एक दांत टूट गया. इस घटना के बाद ही गणेश जी का नाम 'एकदंत' पड़ा.

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अमरता का वरदान प्राप्त कर किस पर्वत पर विराजते हैं परशुराम?

महाभारत की एक कथा के मुताबिक, जब परशुराम क्रोध में आकर क्षत्रियों का संहार करने लगे, तो उनके सामने महर्षि ऋचिक प्रकट हुए. तब उन्होंने परशुराम को रोका. इसके बाद परशुराम ने क्षत्रियों का संहार करना छोड़ दिया. ब्राह्मणों को सारी पृथ्वी दान कर परशुराम ने महेंद्र पर्वत (ओडिशा) को अपना निवास स्थान बना लिया. मान्यता है कि भगवान विष्णु के अंश परशुराम आज भी उस पर्वत पर ध्यान मुद्रा में हैं.

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लेखक के बारे में

By दीपेश कुमार ठाकुर

दिपेश कुमार ठाकुर प्रभात खबर डिजिटल में धर्म और राशिफल सेक्शन लीड के तौर पर बतौर सीनियर कंटेंट राइटर काम कर रहे हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में लंबे अनुभव के दौरान उन्होंने धर्म-अध्यात्म, ज्योतिष, वास्तु शास्त्र और न्यूमेरोलॉजी से जुड़े विषयों पर व्यापक लेखन किया है. उन्होंने Zee News, News24, Bharat Express, NDTV, Jansatta और Hari Bhoomi जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया है. धर्म और ज्योतिष से जुड़े विषयों को सरल, तथ्यपरक और पाठकों की रुचि के अनुरूप प्रस्तुत करना उनकी लेखन शैली की खासियत है. उन्होंने संस्कृत साहित्य से स्नातक के साथ जर्नलिज्म एंड मास कम्यूनिकेशन में मास्टर्स डिग्री हासिल की है.

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