Nirjala Ekadashi 2026: निर्जला एकादशी को भीमसेनी एकादशी और पांडव एकादशी के नाम से भी जाना जाता है. सालभर में आने वाली सभी 24 एकादशियों में निर्जला एकादशी को सबसे कठिन और महत्वपूर्ण माना जाता है. यह हर वर्ष ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति पूरे वर्ष सभी एकादशियों का व्रत नहीं रख पाता है, तो केवल निर्जला एकादशी का व्रत करने से उसे वर्षभर की सभी एकादशियों के समान पुण्य फल प्राप्त होता है.
निर्जला एकादशी पर क्या न करें?
पानी और अन्न का सेवन न करें
इस व्रत के नाम के अनुरूप सूर्योदय से लेकर अगले दिन द्वादशी तिथि पर पारण तक जल और अन्न का त्याग किया जाता है. हालांकि, बीमार, बुजुर्ग और गर्भवती महिलाओं के लिए नियमों में छूट दी गई है.
चावल और नमक खाने से बचें
यदि आप व्रत नहीं भी रख रहे हैं, तब भी एकादशी के दिन चावल का सेवन नहीं करना चाहिए. इस दिन घर में चावल बनाना और खाना वर्जित माना गया है. इसके अलावा, भोजन में साधारण नमक का प्रयोग भी नहीं करना चाहिए.
तामसिक भोजन से दूरी रखें
यदि घर में कोई व्रत नहीं रख रहा है, तब भी इस दिन लहसुन, प्याज, मांस और मदिरा जैसी तामसिक वस्तुओं का सेवन नहीं करना चाहिए. घर का वातावरण पूरी तरह सात्विक बनाए रखें.
दोपहर में न सोएं
शास्त्रों के अनुसार, किसी भी व्रत के दौरान दोपहर में सोने से व्रत का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता. इस समय को भगवान विष्णु के भजन, कीर्तन और ध्यान में लगाना चाहिए.
काले वस्त्र और विवाद से बचें
पूजा-पाठ के दौरान काले रंग के वस्त्र पहनने से बचना चाहिए. साथ ही, इस दिन अपनी वाणी पर संयम रखें. किसी का अपमान न करें और घर में कलह या विवाद से दूर रहें.
निर्जला एकादशी पर क्या करें?
दान-पुण्य का विशेष महत्व
ज्येष्ठ मास में भीषण गर्मी पड़ती है, इसलिए इस दिन जलदान को सर्वोत्तम पुण्य माना गया है. राहगीरों के लिए प्याऊ लगवाना, मिट्टी के मटके, तरबूज, आम और पंखे का दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है.
पशु-पक्षियों के लिए पानी की व्यवस्था करें
अपने घर की छत या बालकनी में पक्षियों के लिए दाना-पानी रखें तथा आवारा पशुओं के लिए भी पानी की व्यवस्था अवश्य करें.
सूर्योदय से पहले उठें
इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें, पीले रंग के स्वच्छ वस्त्र धारण करें और सूर्य देव को जल अर्पित करने के बाद व्रत का संकल्प लें.
व्रत कथा और मंत्र जाप करें
भगवान विष्णु की पूजा के दौरान “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करें. शाम की आरती के समय निर्जला एकादशी व्रत कथा का पाठ अवश्य करें.
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