पुराणों से आयुर्वेद तक: मेंहदी क्यों है इतनी खास

Mehendi mythological importance: मेहंदी, जिसे हिना के नाम से भी जाना जाता है, हिंदू धर्म के सोलह श्रंगारों में से एक महत्वपूर्ण तत्व है. यह वास्तव में एक पत्ते से प्राप्त होती है. इसे हाथों, पैरों, नाखूनों और बाजुओं पर लगाया जाता है. वनस्पति विज्ञान के अनुसार, मेंहदी का वैज्ञानिक नाम 'लॉसोनिया इनर्मिस' है, और यह लिथेसिई परिवार का एक कांटेदार पौधा है.

Mehndi mythological importance: मेहंदी, जिसे हिना के नाम से भी जाना जाता है, हिंदू धर्म के सोलह श्रंगारों में से एक महत्वपूर्ण तत्व है. यह वास्तव में एक पत्ते से प्राप्त होती है. इसे हाथों, पैरों, नाखूनों और बाजुओं पर लगाया जाता है. वनस्पति विज्ञान के अनुसार, मेंहदी का वैज्ञानिक नाम ‘लॉसोनिया इनर्मिस’ है, और यह लिथेसिई परिवार का एक कांटेदार पौधा है.

पुराणों में मेंहदी का महत्व

हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब मां दुर्गा देवी काली के रूप में राक्षसों का विनाश कर रही थीं, तब उनके क्रोध के कारण उन्हें यह एहसास नहीं हुआ कि उनका कपाल दैत्यों के रक्त से पूरी तरह भर गया है और सभी राक्षसों का संहार हो चुका है. इस स्थिति में उनका रूप अत्यंत भयावह था.

देवी के इस रूप को देखकर ऋषि-मुनि और अन्य देवता चिंतित हो गए. सभी देवताओं के राजा इन्द्र के पास गए, जिन्होंने ऋषि-मुनियों को बताया कि मां काली के क्रोध को केवल भगवान शिव ही शांत कर सकते हैं.

प्रभात खबर प्रीमियम स्टोरी यहां पढ़ें: झारखंड के इस मंदिर में पूरी होती है मनोकामना, पाहन करते हैं मुंडारी भाषा में मंत्रोच्चार

सभी भगवान शिव के पास पहुंचे. उनकी बात सुनकर भगवान शंकर ने देवी को बताया कि उनका काली रूप सभी को भयभीत कर रहा है. यह सुनकर मां महाकाली ने अपनी इच्छा शक्ति से एक देवी को प्रकट किया, जो सुरसुंदरी के नाम से जानी गईं और मां काली के आदेश पर औषधि बनकर हाथ-पैरों में सज गईं. तभी से मेहंदी को औषधि माना जाने लगा है.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Shaurya Punj

मैंने डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. पिछले 6 वर्षों से मैं विशेष रूप से धर्म और ज्योतिष विषयों पर सक्रिय रूप से लेखन कर रहा हूं. ये मेरे प्रमुख विषय हैं और इन्हीं पर किया गया काम मेरी पहचान बन चुका है. हस्तरेखा शास्त्र, राशियों के स्वभाव और उनके गुणों से जुड़ी सामग्री तैयार करने में मेरी निरंतर भागीदारी रही है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद. इसके साथ साथ कंटेंट राइटिंग और मीडिया से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में काम करते हुए मेरी मजबूत पकड़ बनी. इसके अलावा, एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी मैंने गहराई से लेखन किया है, जिससे मेरी लेखन शैली संतुलित, भरोसेमंद और पाठक-केंद्रित बनी है.

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >