मांगलिक दोष और वैवाहिक जीवन, क्या सच में यह डरावना है या सिर्फ एक भ्रान्तियां

Manglik Dosh: भारतीय समाज में 'मांगलिक दोष' का नाम सुनते ही लोग अक्सर घबरा जाते हैं. लेकिन ज्योतिषीय दृष्टिकोण से यह उतना डरावना नहीं है, जितना इसे बना दिया गया है. असल में, मांगलिक होना कोई "श्राप" नहीं, बल्कि एक विशेष ऊर्जा की स्थिति है. आइए, इसके पीछे के विज्ञान और सत्य को समझते हैं.

Manglik Dosh: क्या है, मांगलिक दोष?: जब मंगल ग्रह कुंण्डली के 1, 4, 7, 8 या 12वें भाव में बैठा होता है, तो उसे मंगली कहा जाता है. मंगल ऊर्जा, साहस और गर्मी का ग्रह है. आइए जानते है आचार्य विनोद त्रिपाठी से कि इन भावों में बैठकर मंगल वैवाहिक जीवन की शान्ति, स्वभाव की उग्रता और स्वास्थ्य पर प्रभाव डालता है या कुछ और…

यह डरावना क्यों लगता है? (भ्रान्तियां) मांगलिक की शादी गैर-मांगलिक से होने पर जीवनसाथी की मृत्यु हो जाती है.

सत्य:- यह एक बहुत बड़ी अतिशयोक्ति है. कुंण्डली में लम्बी उम्र के लिए ‘आयु भाव देखा जाता है, न कि सिर्फ मंगल. मंगल केवल आपसी तालमेल और स्वभाव में टकराव पैदा कर सकता है.

मंगल दोष का ‘सकारात्मक’ पक्ष

मांगलिक व्यक्ति स्वभाव से बहुत उत्साही, अनुशासित और कार्य के प्रति समर्पित होते हैं. यदि इस ऊर्जा को सही दिशा दी जाए, तो ऐसे जातक अपने कैरियर में बहुत सफल होते हैं.

दोष का प्रभाव कम करने वाले ज्योतिषीय नियम

ज्योतिष शास्त्र में ऐसे कई नियम हैं, जिनसे मांगलिक दोष स्वतः समाप्त हो जाता है:-

ग्रहों की युति:- यदि मंगल पर गुरु की दृष्टि हो या मंगल अपनी स्वराशि (मेष/वृश्चिक) या उच्च राशि (मकर) में हो, तो दोष का प्रभाव नगण्य हो जाता है. चन्द्रमा के साथ मंगल होने से भी यह दोष समाप्त हो जाता है.

उम्र का प्रभाव:- माना जाता है कि 28 वर्ष की आयु के बाद मंगल की उग्रता शान्त हो जाती है, जिससे दोष का असर कम हो जाता है.

परिहार:- यदि दूसरे साथी की कुण्डली में उन्हीं भावों में शनि, राहु या केतु बैठे हों, तो वे मंगल की ऊर्जा को सन्तुलित कर देते हैं (इसे ‘काट’ होना कहते हैं). अधिकांश मामलों (लगभग 80%) में मंगल दोष कुंण्डली में ही स्वतः समाप्त हो जाता है. यदि मंगल के साथ चन्द्र, गुरु या शनि हो, या शनि/गुरु की दृष्टि पड़े, तो दोष नहीं रहता. कुछ विशेष राशियों व भावों में मंगल होने पर भी दोष समाप्त हो जाता है. गुरु या चन्द्र की शुभ स्थिति, राहु का 6-11वें भाव में होना, या मंगल का कमजोर (नीच, वक्री, अस्त) होना भी दोष को खत्म कर देता है. अन्य पाप ग्रहों की उपस्थिति या मंगल की गुरु/चन्द्र से युति भी इसे निरस्त करती है.

क्या करना चाहिए? (सुझाव)

गुण मिलान:- केवल मंगल ही नहीं, बल्कि `भकूट’ और ‘गण’ मिलान पर भी ध्यान दें.
मानसिक सामन्जस्य:- मंगल दोष वाले व्यक्ति को एक ऐसे साथी की जरूरत होती है, जो उनकी ऊर्जा को समझ सके. बातचीत और धैर्य इसका सबसे बड़ा उपाय है.

कुम्भ विवाह:- यदि दोष बहुत भारी हो, तो शास्त्र सम्मत `कुम्भ विवाह या विष्णु प्रतिमा विवाह का सुझाव दिया जाता है.

नोट:- `मांगलिक दोष वैवाहिक जीवन में “तलाक” या “विनाश” का गारन्टी कार्ड नहीं है. यह सिर्फ दो लोगों के बीच ऊर्जा के असन्तुलन का संकेत है. सही समझ और थोड़े से धैर्य के साथ मांगलिक जातक एक अत्यन्त सुखी वैवाहिक जीवन व्यतीत कर सकते हैं. (आचार्य विनोद त्रिपाठी)

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लेखक के बारे में

Published by: Radheshyam Kushwaha

राधेश्याम कुशवाहा ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से MJ (मास्टर ऑफ जर्नलिज्म) की शिक्षा प्राप्त करने के बाद अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत भोपाल से प्रकाशित राज एक्सप्रेस समाचार पत्र से की. इसके बाद उन्होंने समय जगत, राजस्थान पत्रिका और हिंदुस्तान जैसे प्रतिष्ठित समाचार संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं. वर्तमान में वे प्रभात खबर के डिजिटल विभाग में धर्म, अध्यात्म एवं राशिफल डेस्क पर कार्यरत हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में 13 वर्षों का अनुभव रखने वाले राधेश्याम कुशवाहा को ज्योतिष शास्त्र, पंचांग गणना, ग्रह गोचर, नक्षत्र परिवर्तन, व्रत-त्योहारों की तिथियों तथा शुभ मुहूर्तों का गहन ज्ञान है. अपनी विशेषज्ञता के आधार पर वे धर्म-अध्यात्म और राशिफल से जुड़ी सटीक, तथ्यपरक एवं विश्वसनीय खबरें लिखते हैं. धार्मिक ग्रंथों के अध्ययन में उनकी विशेष रुचि है. इसके अलावा राजनीति, अपराध और प्रेरणादायक (पॉजिटिव) विषयों पर लेखन में भी उनकी गहरी रुचि है.

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