Mahashivratri 2026 Upay: महाशिवरात्रि भगवान शिव को समर्पित एक अत्यंत पवित्र पर्व है. यह पर्व भगवान शिव और माता पार्वती के मिलन का प्रतीक माना जाता है. मान्यता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तप किया था और अनेक कठिनाइयों का सामना किया था. उनके तप से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया.इसी कारण ऐसा माना जाता है कि जिन भक्तों का विवाह योग बन रहा होता है, यदि वे महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा करते हैं और व्रत रखते हैं, तो उनका शीघ्र विवाह होता है. साथ ही प्रेम विवाह में आ रही परेशानियां दूर होती हैं और मनचाहा जीवनसाथी प्राप्त होता है.इस वर्ष महाशिवरात्रि 15 फरवरी 2026 को मनाई जाएगी.
महाशिवरात्रि के दिन करें ये उपाय
माता पार्वती को श्रृंगार अर्पित करें
महाशिवरात्रि के दिन शिव मंदिर जाकर माता पार्वती को सुहाग की सामग्री जैसे— लाल चुनरी, चूड़ियां, कुमकुम, मेहंदी आदि अर्पित करें. इसके बाद भगवान शिव से अपने प्रेम विवाह की प्रार्थना करें. मान्यता है कि ऐसा करने से विवाह में आ रही बाधाएं दूर होती हैं.
शिवलिंग का अभिषेक करें
यदि कुंडली में ग्रह दोष के कारण विवाह में देरी हो रही है, तो महाशिवरात्रि के दिन दूध में थोड़ा केसर मिलाकर शिवलिंग का अभिषेक करें. अभिषेक के दौरान निरंतर “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करते रहें. कहा जाता है कि इससे ग्रह दोष का प्रभाव कम होता है और विवाह के योग बनते हैं.
अपराजिता के फूल चढ़ाएं
महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव को अपराजिता के फूल अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है. अपराजिता का फूल विजय, शक्ति, सकारात्मकता और अजेयता का प्रतीक है. मान्यता है कि इसके अर्पण से विवाह में आ रही पारिवारिक समस्याएं और अन्य बाधाएं दूर होती हैं.
शहद और जल से अभिषेक करें
यदि प्रेम विवाह में परिवार की सहमति नहीं मिल रही है, तो शिवलिंग पर शहदअर्पित करें और बाद में जल से स्नान कराएं. शहद मिठास का प्रतीक है, जो रिश्तों में आई कड़वाहट को दूर करने में सहायक माना जाता है.
भगवान शिव और माता पार्वती का संयुक्त मंत्र
महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव और माता पार्वती के संयुक्त मंत्र का जाप विवाह से जुड़ी सभी समस्याओं के निवारण के लिए शुभ माना जाता है.
मंत्र:
“हे गौरी शंकर अर्धांगिनी.
यथा त्वं शंकरप्रिया.
तथा मां कुरु कल्याणी,
कान्तकान्तां सुदुर्लभाम्॥”
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