Magh Gupt Navratri 2026: माघ शुक्ल प्रतिपदा के अवसर पर सोमवार से उत्तराषाढ़ा नक्षत्र व सर्वार्थ अमृत सिद्धि योग में गुप्त नवरात्र का शुभारंभ हो गया है. यह नवरात्र कलश स्थापना के साथ आरंभ होकर 27 जनवरी को संपन्न होगा. घरों एवं मंदिरों में कलश स्थापना के साथ शक्ति उपासना का विशेष आयोजन किया जायेगा. गुप्त नवरात्र में तंत्र साधना की विशेष प्रधानता मानी जाती है. तंत्र व शाक्ति के लिए यह काल अत्यंत सिद्धिदायी माना गया है. इस दौरान साधक उपवास, संयम, नियम, भजन, पूजन, जप और योग साधना के माध्यम से आध्यात्मिक एवं मानसिक शक्ति की वृद्धि करते हैं. मां वैष्णो देवी, कामाख्या देवी, हिंगलाज देवी एवं पराम्बा देवी की उपासना का विशेष महत्व बताया गया है.
Magh Gupt Navratri 2026: गुप्त नवरात्र कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त
गुप्त नवरात्र का पहला दिन आज 19 जनवरी को है. आज प्रातः काल में घटस्थापना या कलश स्थापना की जाएगी. 19 जनवरी को सुबह 06:41 से लेकर सुबह 08:01 बजे तक कलश स्थापना का मुहूर्त है. आप चाहें तो दोपहर 11:39 से लेकर दोपहर 12:22 के बीच अभिजीत मुहूर्त में भी कलश स्थापना कर सकते हैं.
Gupt Navratri Muhurat: दिन का चौघड़िया (पटना)
अमृत (अत्यंत शुभ): 06:41 AM से 08:01 AM तक
काल (हानि): 08:01 AM से 09:21 AM तक
शुभ (शुभ): 09:21 AM से 10:41 AM तक
रोग (अशुभ): 10:41 AM से 12:00 PM तक
उद्वेग (अशुभ): 12:00 PM से 01:20 PM तक
चर (सामान्य): 01:20 PM से 02:40 PM तक
लाभ (शुभ): 02:40 PM से 04:00 PM तक
अमृत (अत्यंत शुभ): 04:00 PM से 05:19 PM तक
Gupt Navratri 2026 Shubh Samay शुभ समय (मुहूर्त)
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:39 AM से 12:22 PM तक
विजय मुहूर्त: दोपहर 01:48 PM से 02:30 PM तक
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 05:00 AM से 05:51 AM तक
Gupt Navratri Asubh Samay अशुभ समय
राहुकाल: सुबह 08:01 AM से 09:21 AM तक
गुलिक काल: दोपहर 01:20 PM से 02:40 PM तक
यमगण्ड: सुबह 10:41 AM से 12:00 PM तक
गुप्त नवरात्र में दस महाविद्याओं की साधना
गुप्त नवरात्र में दस महाविद्याओं-मां काली, तारा, त्रिपुरसुंदरी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, भैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला देवी की विशेष साधना की जाती है. धार्मिक मान्यता है कि देवी उपासना से शनि, राहु और केतु जैसे कष्टकारी ग्रहों के अशुभ प्रभाव से भी मुक्ति मिलती है.
सामान्य और गुप्त नवरात्र में अंतर
ज्योतिषाचार्य चंद्रशेखर सहस्त्रबाहु: ने बताया कि सामान्य नवरात्र में सात्विक पूजा के साथ-साथ तांत्रिक उपासना भी की जाती है, जबकि गुप्त नवरात्र में मुख्य रूप से तांत्रिक साधनाओं पर विशेष जोर दिया जाता है. गुप्त नवरात्र के दौरान पूजा-पाठ का अधिक प्रचार नहीं किया जाता और साधना को निजी व गोपनीय रखा जाता है. धार्मिक मान्यता है कि जितनी अधिक साधना गुप्त रखी जाती है, उतनी ही अधिक सिद्धि और सफलता प्राप्त होती है.
गुप्त नवरात्र की पूजन विधि
शारदीय और चैत्र नवरात्र की तरह गुप्त नवरात्र की शुरुआत भी कलश स्थापना से की जाती है. कलश स्थापित करने के बाद सुबह और शाम देवी की विधिवत पूजा करनी चाहिए. इन पावन दिनों में मंत्र जाप, दुर्गा चालीसा या दुर्गा सप्तशती का पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है. दोनों समय माता की आरती करें और दिन में दो बार भोग अर्पित करें. भोग में लौंग और बताशा को सरल और श्रेष्ठ माना गया है. पूजा के दौरान लाल रंग के फूल अर्पित करना उत्तम होता है, जबकि आक, मदार, दूब और तुलसी माता को नहीं चढ़ानी चाहिए. पूरे नौ दिनों तक खान-पान पूरी तरह सात्विक और संयमित रखना चाहिए.
ज्योतिषाचार्य चंद्रशेखर सहस्त्रबाहु:
ज्योतिष एवं हस्त रेखा विशेषज्ञ | 12 साल का अनुभव
Mo- +91 8620920581
