Karam Puja 2025: आज मनाया जा रहा है झारखंड का प्रकृति पर्व करमा, जानें पूजा विधि और महत्व

Karam Puja 2025: झारखंड का प्रकृति पर्व करमा आदिवासी समुदाय की आस्था और संस्कृति का प्रतीक है. यह त्योहार खासकर झारखंड, बिहार, ओडिशा और मध्य प्रदेश में धूमधाम से मनाया जाता है. करमा पूजा में बहनें अपने भाइयों की लंबी उम्र और समृद्धि के लिए व्रत रखती हैं और कलम देव की पूजा करती हैं.

Karam Puja 2025: झारखंड का प्रमुख प्रकृति पर्व करमा आदिवासी संस्कृति और आस्था से जुड़ा हुआ है. यह पर्व खासतौर पर झारखंड, बिहार, ओडिशा और मध्य प्रदेश के आदिवासी इलाकों में बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है. इस वर्ष 3 सितंबर 2024 को करमा पर्व मनाया जा रहा है. आइए जानते हैं इसकी पूजा विधि और महत्व.

करमा पूजा विधि

करमा पूजा से पहले घर की अच्छी तरह साफ-सफाई की जाती है. इसके बाद पूजा स्थल को शुद्ध करने के लिए गाय का गोबर लगाया जाता है. पूजा में कर्म वृक्ष की डालियां गाड़कर उनकी पूजा की जाती है. महिलाएं थाली सजाकर करम देव का पूजन करती हैं और अपने भाइयों की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और उन्नति की कामना करती हैं.

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पूजा के समय कर्म और धर्म से जुड़ी लोककथाएं सुनाई जाती हैं, जिनमें अच्छे कर्मों का महत्व और उनके फल बताए जाते हैं. इस त्योहार की खास परंपरा यह है कि विवाहित महिलाएं अपने मायके आकर इसे मनाती हैं. पूजा समाप्त होने पर भाई बहनों से व्रत का कारण पूछते हैं और खीरे के साथ आशीर्वाद देते हैं.

करमा पर्व का महत्व

आदिवासी समाज में करमा पर्व को बहुत शुभ माना गया है. मान्यता है कि अविवाहित कन्याएँ इस दिन उपवास रखकर फसलों की रक्षा करती हैं और पूरे वर्ष भर अच्छी उपज की कामना करती हैं. ऐसा माना जाता है कि सच्ची निष्ठा से व्रत करने वाली कन्याओं को योग्य पति की प्राप्ति होती है. इसके अलावा, यह पर्व परिवार की भलाई, समृद्धि और संतान सुख की मंगलकामनाओं से भी जुड़ा हुआ है.

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Author: Shaurya Punj

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