Kali Puja 2025: गुड़हल के फूल के बिना अधूरी है काली पूजा, जानें माता को क्यों प्रिय है यह फूल

Kali Puja 2025: इस साल काली पूजा 20 अक्टूबर को मनाई जाएगी. इस दिन घरों में माता काली की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है. इस दिन पूजा के दौरान लाल गुड़हल का फूल चढ़ाना बेहद शुभ माना जाता है. चलिए जानते हैं माता काली को लाल गुड़हल के अर्पित करने के पीछे छिपे धार्मिक महत्व के बारे में.

Kali Puja 2025: काली पूजा बंगाल, उड़ीसा और असम में दिवाली की रात मनाया जाने वाला एक विशेष हिंदू धर्म का पर्व है. इस दिन माता दुर्गा के उग्र स्वरूप मां काली की पूजा की जाती है. माता काली को मां चंडी के नाम से भी जाना जाता है. वह शक्ति, साहस और सौंदर्य की देवी मानी जाती हैं. माना जाता है कि जो भी इस दिन सच्चे मन से माता की आराधना करता है, उस पर माता की कृपा सदा बनी रहती है. काली पूजा में कुछ विशेष सामग्रियों की आवश्यकता होती है, जिनमें से एक है लाल गुड़हल का फूल. कहा जाता है कि इस फूल के बिना माता की आराधना अधूरी है. आइए जानते हैं कि काली माता की पूजा में लाल गुड़हल के फूल को इतना अधिक महत्व क्यों दिया जाता है.

काली पूजा में गुड़हल फूल का महत्व क्या है?

काली पूजा में लाल गुड़हल फूल का विशेष महत्व है. माना जाता है कि लाल गुड़हल का फूल माता काली को सबसे अधिक प्रिय है. यह फूल वातावरण से नकारात्मक ऊर्जा को दूर करके सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, काली पूजा के दिन भक्तों को 108 गुड़हल के फूल माता को अर्पित करना चाहिए. ऐसा करने से माता रानी प्रसन्न होती हैं और भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं.

माता को गुड़हल का फूल अर्पित करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

  • माता को अर्पित करने वाला फूल मुड़ाया हुआ या सूखा नहीं होना चाहिए.
  • हमेशा ताज़ा फूल ही चढ़ाएं.
  • फूल कहीं से टूटा हुआ न हो, इस पर विशेष ध्यान दें.
  • सबसे पहले फूल माता के चरणों में अर्पित करें, उसके बाद उन्हें फूल पहनाएं.
  • फूल अर्पित करने से पहले उसे एक बार पानी से धो लें, ताकि उस पर लगी धूल या मिट्टी साफ हो जाए.

काली पूजा कब है?

वर्ष 2025 में काली पूजा 20 अक्टूबर को पड़ रही है.

काली पूजा का महत्व क्या है?

माना जाता है कि इस दिन माता की पूजा-अर्चना से भय और संकट का नाश होता है, शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है, शक्ति का आशीर्वाद मिलता है और घर में सुख-शांति बनी रहती है.

काली पूजा किस तिथि को मनाई जाती है?

पंचांग के अनुसार, काली पूजा हर वर्ष कार्तिक मास की अमावस्या तिथि को मनाई जाती है.

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By Neha kumari

नेहा कुमारी वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में धर्म बीट पर कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. वह व्रत-त्योहार, राशिफल, पंचांग, ज्योतिष, शुभ मुहूर्त, पौराणिक कथाओं और भारतीय संस्कृति से जुड़े विषयों पर लेख लिखती हैं. उन्होंने वेस्ट बंगाल स्टेट यूनिवर्सिटी से मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन की डिग्री प्राप्त की है.

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