ज्येष्ठ अधिक अमावस्या आज, पितरों की कृपा पाने के लिए करें इन चीजों का दान

Adhik Amavasya: ज्येष्ठ अधिक अमावस्या पर पितरों के निमित्त तर्पण, श्राद्ध और दान का विशेष महत्व बताया गया है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन श्रद्धापूर्वक किए गए दान-पुण्य से पितृ दोष शांत होता है और परिवार में सुख, शांति तथा समृद्धि का वास होता है.

Adhik Amavasya: आज 15 जून, सोमवार को ज्येष्ठ मास की अधिक अमावस्या मनाई जा रही है. शास्त्रों में अमावस्या तिथि को पितरों के स्मरण, तर्पण और श्राद्ध कर्म के लिए समर्पित माना गया है. मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा से किए गए कर्म और दान पितृ दोष को शांत करते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि का मार्ग खोलते हैं. आइए जानते हैं कि इस दिन किन-किन चीजों का दान करना शुभ माना जाता है.

क्यों खास है ‘ज्येष्ठ अधिक अमावस्या’?

हिंदू कैलेंडर में हर तीन वर्ष में एक बार एक अतिरिक्त महीना जुड़ता है, जिसे अधिक मास, मलमास या पुरुषोत्तम मास कहा जाता है. यह पूरा महीना भगवान श्रीहरि विष्णु को समर्पित होता है. इस पवित्र महीने के अंतिम दिन पड़ने वाली अमावस्या को अधिक अमावस्या कहा जाता है.

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, अधिक मास में किए गए दान, तप और तर्पण का फल सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक मिलता है. आज के दिन पितरों के निमित्त तर्पण करने से वंश वृद्धि होती है और घर में सुख-शांति का वास होता है.

पितरों की शांति के लिए करें इन चीजों का दान

गरुड़ पुराण और अन्य धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, अमावस्या के दिन अपनी क्षमता के अनुसार जरूरतमंदों और ब्राह्मणों को दान देना चाहिए. आज के दिन निम्नलिखित चीजों का दान महादान माना गया है:

  • काले तिल का दान: पितृ पूजा में काले तिल का विशेष महत्व माना गया है. ऐसे में आज काले तिल का दान अवश्य करें. कहा जाता है कि इससे पितर प्रसन्न होते हैं और कुंडली में राहु-केतु के अशुभ प्रभाव भी कम होते हैं.
  • अन्न दान: अमावस्या के दिन अन्न दान करना अत्यंत शुभ माना गया है. आज के दिन किसी जरूरतमंद व्यक्ति या ब्राह्मण को अनाज का दान करें. मान्यता है कि इससे पितर अत्यंत तृप्त होते हैं.
  • जल और घड़े का दान: ज्येष्ठ मास में भीषण गर्मी पड़ती है. ऐसे में प्यासे लोगों के लिए पानी की व्यवस्था करना या मिट्टी के घड़े का दान करना भी अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है.
  • गाय और कौए को भोजन कराएं: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कौए और गाय को भोजन कराने से पितरों की कृपा प्राप्त होती है. माना जाता है कि इनके माध्यम से अर्पित भोजन पूर्वजों तक पहुंचता है.

अमावस्या के दिन न करें ये काम

चूंकि अमावस्या की ऊर्जा आत्मचिंतन, ध्यान और आध्यात्मिक शुद्धि से जुड़ी मानी जाती है, इसलिए आज के दिन कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए:

  • मांसाहार और शराब से दूर रहें: आज के दिन केवल सात्विक भोजन करें. लहसुन, प्याज और अन्य तामसिक खाद्य पदार्थों के सेवन से बचें.
  • विवादों से बचें: घर में कलह न करें और किसी का अपमान न करें, विशेषकर बड़े-बुजुर्गों का. मान्यता है कि इससे पितर रुष्ट हो सकते हैं.
  • नए मांगलिक कार्य न करें: अधिक मास और अमावस्या के संयोग में विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्य वर्जित माने जाते हैं. इसलिए आज कोई नया मांगलिक या शुभ कार्य आरंभ करने से बचें.

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Published by: Neha Kumari

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