आधी रात में ही क्यों हुआ था श्रीकृष्ण का जन्म? चंद्रमा और रोहिणी नक्षत्र से जुड़ा है रहस्य

जन्माष्टमी पर आधी रात को भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया जाता है. मान्यता है कि उनका प्राकट्य अष्टमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र और मध्य रात्रि के विशेष संयोग में हुआ था. आखिर कृष्ण जन्म के लिए यही समय क्यों खास माना गया? जानिए इससे जुड़ी धार्मिक मान्यताएं.

Janmashtami 2026: धार्मिक मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मध्य रात्रि में हुआ था. इसी वजह से हर साल जन्माष्टमी की रात 12 बजे भगवान कृष्ण के जन्म का उत्सव मनाया जाता है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि श्रीकृष्ण का जन्म आधी रात में ही क्यों हुआ था? इसके पीछे अष्टमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र और श्रीकृष्ण के चंद्रवंशी होने से जुड़ी खास मान्यताएं हैं. आइए इस आर्टिकल में इसके बारें में विस्तार से जानते है. 

जन्माष्टमी (AI Image)

कंस के कारागार में हुआ था श्रीकृष्ण का जन्म

भगवान श्रीकृष्ण देवकी और वसुदेव के आठवें पुत्र थे.  मान्यता है कि देवकी और वसुदेव के विवाह के बाद आकाशवाणी हुई थी कि देवकी का आठवां पुत्र कंस का वध करेगा. यह सुनकर कंस ने दोनों को कारागार में बंद कर दिया. 

समय बीतने के साथ देवकी के सात पुत्रों की कंस ने हत्या कर दी. इसके बाद भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को आधी रात में भगवान कृष्ण का जन्म हुआ. मान्यता है कि उनके जन्म के समय कारागार के सभी दरवाजे अपने आप खुल गए और वहां तैनात सैनिक गहरी नींद में सो गए.

श्रीकृष्ण का जन्म आधी रात में ही क्यों हुआ?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, श्रीकृष्ण चंद्रवंशी थे. चंद्रमा का संबंध रात्रि से माना जाता है, इसलिए श्रीकृष्ण के जन्म का समय भी मध्य रात्रि बताया गया है. मान्यता है कि चंद्रदेव की इच्छा थी कि भगवान विष्णु उनके कुल में अवतार लें. इसी कारण श्रीकृष्ण के जन्म के समय को विशेष महत्व दिया जाता है. श्रीकृष्ण के जन्म का समय केवल रात होने की वजह से खास नहीं था. उनके प्राकट्य के समय अष्टमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र और मध्य रात्रि का संयोग भी बताया जाता है.

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रोहिणी नक्षत्र का श्रीकृष्ण से क्या संबंध है?

ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार, रोहिणी चंद्रमा का प्रिय पत्नी और नक्षत्र है. चूंकि श्रीकृष्ण का संबंध चंद्रवंश से माना जाता है, इसलिए उनके जन्म के समय रोहिणी नक्षत्र का होना विशेष माना जाता है.

वहीं, अष्टमी तिथि को शक्ति से जुड़ी तिथि माना जाता है. ऐसे में अष्टमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र और मध्य रात्रि का संयोग श्रीकृष्ण के प्राकट्य से विशेष रूप से जुड़ा माना जाता है.

मध्य रात्रि में ही वसुदेव श्रीकृष्ण को गोकुल ले गए

भगवान कृष्ण के जन्म के बाद उन्हें कंस से बचाकर गोकुल पहुंचाना भी जरूरी था. इसलिए आधी रात का समय उनके लिए सुरक्षित माना गया. कथा के अनुसार, कृष्ण के जन्म के तुरंत बाद कारागार के दरवाजे खुल गए और पहरेदार सो गए. इसके बाद वसुदेव भगवान कृष्ण को लेकर यमुना पार करते हुए गोकुल पहुंचे और उन्हें नंद बाबा के घर पहुंचाया. इस तरह आधी रात का समय भगवान को कंस की कैद से बाहर निकालने में भी सहायक बना.

यही वजह है कि जन्माष्टमी की रात भगवान कृष्ण के जन्म का उत्सव मध्य रात्रि में मनाया जाता है. भक्त रात 12 बजे तक व्रत और पूजा करते हैं. इसके बाद भगवान कृष्ण के बाल स्वरूप का पूजन कर उनका जन्मोत्सव मनाया जाता है.

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Disclaimer: इस लेख में दी गई सभी जानकारियां धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित हैं. प्रभात खबर इन मान्यताओं की पुष्टि नहीं करता है.

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By नेहा कुमारी

नेहा कुमारी वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में धर्म बीट पर कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. वह व्रत-त्योहार, राशिफल, पंचांग, ज्योतिष, शुभ मुहूर्त, पौराणिक कथाओं और भारतीय संस्कृति से जुड़े विषयों पर लेख लिखती हैं. उन्होंने वेस्ट बंगाल स्टेट यूनिवर्सिटी से मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन की डिग्री प्राप्त की है.

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