Holika Dahan 2026: होली से एक दिन पहले होलिका दहन किया जाता है. इस दिन लोग लकड़ियों का ढेर जलाकर अग्नि प्रज्वलित करते हैं और उसकी परिक्रमा करते हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि अग्नि की परिक्रमा क्यों की जाती है? आइए इसे आसान शब्दों में समझते हैं.
बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक
होलिका दहन की कथा प्रह्लाद और होलिका से जुड़ी है. मान्यता है कि भक्त प्रह्लाद को जलाने के लिए होलिका अग्नि में बैठी थी, लेकिन भगवान की कृपा से प्रह्लाद सुरक्षित बच गए और होलिका जल गई. इसलिए अग्नि की परिक्रमा करना बुराई के अंत और अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है.
नकारात्मकता से मुक्ति की भावना
अग्नि को पवित्र और शुद्ध करने वाली शक्ति माना जाता है. जब लोग अग्नि की परिक्रमा करते हैं, तो वे यह संकल्प लेते हैं कि उनके जीवन की नकारात्मक ऊर्जा, रोग, दुख और कष्ट भी इसी अग्नि में भस्म हो जाएं. यह एक तरह से मानसिक और आध्यात्मिक शुद्धि का प्रतीक है.
सुख-समृद्धि और सुरक्षा की कामना
ग्रामीण क्षेत्रों में लोग नई फसल के दाने अग्नि में अर्पित करते हैं. ऐसा माना जाता है कि इससे घर में अन्न और धन की कमी नहीं होती. परिक्रमा करते समय परिवार की खुशहाली और सुरक्षा की प्रार्थना भी की जाती है.
सामाजिक एकता का संदेश
होलिका दहन केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सामाजिक एकता का भी प्रतीक है. लोग मिलकर अग्नि के चारों ओर परिक्रमा करते हैं, जिससे आपसी प्रेम और भाईचारा बढ़ता है. होलिका दहन की अग्नि की परिक्रमा आस्था, शुद्धि और सकारात्मकता का प्रतीक है. यह हमें सिखाती है कि चाहे कितनी भी बड़ी बुराई क्यों न हो, अंत में सत्य और भक्ति की ही जीत होती है.
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होलिका दहन कब होगा
इस साल होलिका दहन 3 मार्च 2026 को मनाया जाएगा. फाल्गुन माह की पूर्णिमा तिथि 2 मार्च को शाम 5 बजकर 55 मिनट से शुरू होगी. यह तिथि 3 मार्च को शाम 5 बजकर 7 मिनट पर समाप्त हो जाएगी. होलिका दहन करने का शुभ समय (मुहूर्त) 3 मार्च की शाम 6 बजकर 22 मिनट से रात 8 बजकर 50 मिनट तक रहेगा. इस समय के दौरान विधि-विधान से होलिका दहन करना शुभ माना जाता है.
