Holi 2026 Date: होली का पर्व (Holi 2026) हर साल फाल्गुन पूर्णिमा के अवसर पर मनाया जाता है और इसके अगले दिन चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा को रंगोत्सव होता है. यह त्योहार केवल रंगों और उत्साह का नहीं, बल्कि बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है. हालांकि इस साल होली की तारीख को लेकर लोगों के बीच काफी भ्रम बना हुआ है. पूर्णिमा तिथि दो दिनों में पड़ रही है और इसी दौरान चंद्रग्रहण भी लग रहा है, जिसके कारण होलिका दहन और रंगवाली होली की तिथि को लेकर अलग-अलग मत सामने आ रहे हैं. आइए विस्तार से समझते हैं कि 2026 में होली कब मनाई जाएगी और भ्रम की असली वजह क्या है.
पूर्णिमा तिथि कब शुरू और कब समाप्त होगी?
- पंचांग की गणना के अनुसार फाल्गुन पूर्णिमा तिथि 2 मार्च 2026 को शाम 5 बजकर 56 मिनट पर प्रारंभ होगी और 3 मार्च 2026 को शाम 5 बजकर 8 मिनट पर समाप्त हो जाएगी.
- शास्त्रों के अनुसार होलिका दहन पूर्णिमा तिथि में, विशेष रूप से प्रदोष काल में किया जाता है. 2 मार्च की शाम से पूर्णिमा तिथि आरंभ हो रही है, इसलिए प्रदोष काल 2 मार्च को उपलब्ध रहेगा.
- 2 मार्च को भद्रा मुख मध्यरात्रि 2 बजकर 38 मिनट से सुबह 4 बजकर 34 मिनट तक रहेगा. भद्रा काल में होलिका दहन वर्जित माना जाता है. चूंकि भद्रा रात के समय है और प्रदोष काल में भद्रा नहीं है, इसलिए 2 मार्च की शाम को होलिका दहन करना शास्त्रसम्मत और शुभ माना जा रहा है.
- 3 मार्च को पूर्णिमा तिथि तो शाम 5:08 बजे तक रहेगी, लेकिन इसी दिन दोपहर 3 बजकर 20 मिनट से शाम 6 बजकर 47 मिनट तक चंद्रग्रहण लगेगा. ग्रहण के कारण शुभ कार्य वर्जित हो जाते हैं, इसलिए 3 मार्च को होलिका दहन उचित नहीं माना जा रहा.
होलिका दहन और रंगवाली होली का सही क्रम
धार्मिक परंपरा के अनुसार पहले होलिका दहन होता है और उसके अगले दिन रंगों की होली खेली जाती है. इस वर्ष 2 मार्च 2026 को होलिका दहन किया जाएगा. इसके बाद चैत्र कृष्ण प्रतिपदा तिथि 3 मार्च को शाम 5:07 बजे से शुरू होकर 4 मार्च को शाम 4:48 बजे तक रहेगी. उदयातिथि के आधार पर 4 मार्च 2026 को चैत्र कृष्ण प्रतिपदा मानी जाएगी. इसलिए रंगवाली होली 4 मार्च बुधवार को मनाना शास्त्रसम्मत है. यही होली का पारंपरिक और सही क्रम है—पहले होलिका दहन, फिर अगले दिन रंगोत्सव.
अलग-अलग राज्यों में अलग तारीख क्यों बताई जा रही है?
देश के अलग-अलग हिस्सों में पंचांग की गणना में थोड़ा अंतर हो सकता है. उत्तर भारत, महाराष्ट्र, गुजरात, बंगाल या दक्षिण भारत के पंचांगों में सूर्योदय और चंद्रमा की स्थिति के आधार पर कुछ मिनटों का अंतर हो सकता है. इसके अलावा, कुछ लोग केवल अंग्रेजी कैलेंडर की तारीख देखकर निर्णय लेते हैं, जबकि कुछ लोग उदयातिथि को आधार मानते हैं. यही कारण है कि कुछ स्थानों पर 3 मार्च और कुछ जगहों पर 4 मार्च की चर्चा हो रही है. लेकिन ज्योतिषीय सिद्धांतों के अनुसार उदयातिथि और प्रदोष काल को ध्यान में रखकर ही अंतिम निर्णय लिया जाता है, और इस आधार पर 2 मार्च को होलिका दहन तथा 4 मार्च को रंगवाली होली उचित मानी जा रही है.
पंचांग बनाम अंग्रेजी कैलेंडर का अंतर
भ्रम का एक बड़ा कारण पंचांग और अंग्रेजी (ग्रेगोरियन) कैलेंडर के बीच का अंतर भी है. अंग्रेजी कैलेंडर में तारीख आधी रात 12 बजे बदलती है, जबकि हिंदू पंचांग में तिथि चंद्रमा की गति पर आधारित होती है. एक तिथि 24 घंटे की निश्चित नहीं होती. वह कभी कम तो कभी अधिक समय तक चल सकती है. यदि कोई तिथि दो दिनों में फैली हो, तो शास्त्रों के अनुसार यह देखा जाता है कि सूर्योदय के समय कौन-सी तिथि है. इसी सिद्धांत को उदयातिथि कहा जाता है. होली के रंगोत्सव के लिए उदयातिथि का महत्व होता है. इस वर्ष 4 मार्च को सूर्योदय के समय चैत्र कृष्ण प्रतिपदा रहेगी, इसलिए रंगों की होली उसी दिन मनाना उचित है.
सोशल मीडिया पर फैल रहे भ्रम की सच्चाई
आजकल सोशल मीडिया पर अलग-अलग तारीखों के पोस्ट वायरल हो जाते हैं. कोई 3 मार्च को होली बता रहा है तो कोई 4 मार्च को. कई बार बिना पूरी पंचांग गणना समझे ही जानकारी साझा कर दी जाती है. चंद्रग्रहण की खबर जुड़ जाने से भ्रम और बढ़ गया है. कुछ लोग यह मान रहे हैं कि ग्रहण के कारण पूरी तिथि बदल गई है, जबकि वास्तविकता यह है कि ग्रहण केवल 3 मार्च को लग रहा है और उसी दिन शुभ कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है. सही जानकारी के लिए अधिकृत पंचांग, ज्योतिषाचार्य या विश्वसनीय धार्मिक स्रोतों की सलाह लेना जरूरी है.
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होली का महत्व
होली (Holi 2026) बुराई पर अच्छाई की विजय का पर्व है. इसकी कथा भक्त प्रह्लाद और होलिका से जुड़ी है. हिरण्यकश्यप ने अपने पुत्र प्रह्लाद को भगवान विष्णु की भक्ति से रोकने का प्रयास किया, लेकिन वह सफल नहीं हुआ. अंततः होलिका, जिसे अग्नि से न जलने का वरदान था, प्रह्लाद को लेकर अग्नि में बैठी. भगवान की कृपा से प्रह्लाद सुरक्षित रहे और होलिका जलकर भस्म हो गई. होलिका दहन उसी घटना की स्मृति में किया जाता है. अगले दिन रंग खेलकर लोग इस विजय का उत्सव मनाते हैं.
साल 2026 में फाल्गुन पूर्णिमा 2 मार्च की शाम से शुरू होकर 3 मार्च की शाम तक रहेगी. शास्त्रीय गणना के अनुसार 2 मार्च को होलिका दहन और 4 मार्च को रंगवाली होली मनाई जाएगी. पूर्णिमा तिथि, चंद्रग्रहण, भद्रा काल और उदयातिथि—इन सभी को ध्यान में रखते हुए यही तिथि सर्वाधिक मान्य और शास्त्रसम्मत मानी जा रही है. इसलिए सोशल मीडिया के भ्रम से बचें और सही पंचांग आधारित जानकारी के अनुसार ही पर्व मनाएं.
आचार्य के गोपाल मिश्रा
स्वर्ण पदक विजेता
एस्ट्रो वास्तु सलाहकार
