गुरु पूर्णिमा 2026: क्या इस दिन बाल और नाखून काटना अशुभ होता है? जानें धार्मिक मान्यता और कारण

गुरु पूर्णिमा 2026 पर बाल और नाखून काटने को लेकर क्या मान्यता है? जानिए इस परंपरा का धार्मिक महत्व, इसके पीछे बताए गए कारण, क्या करें और किन कार्यों से परहेज करना शुभ माना जाता है.

Guru Purnima 2026: हिंदू धर्म में आषाढ़ पूर्णिमा का विशेष महत्व है. इस दिन को गुरु पूर्णिमा या व्यास पूर्णिमा के रूप में भी मनाया जाता है. इस साल गुरु पूर्णिमा 29 जुलाई 2026 को है. यह पर्व गुरु के प्रति श्रद्धा, सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर माना जाता है. मान्यता है कि इसी दिन महर्षि वेदव्यास का जन्म हुआ था, इसलिए इसे व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है. इस दिन गुरु की पूजा, आशीर्वाद प्राप्त करना, दान-पुण्य और आध्यात्मिक साधना का विशेष महत्व बताया गया है.

क्या गुरु पूर्णिमा पर बाल और नाखून काटना अशुभ माना जाता है?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गुरु पूर्णिमा के दिन बाल, नाखून और दाढ़ी काटने से बचने की सलाह दी जाती है. ज्योतिषाचार्य संजीत कुमार मिश्रा ने बताया कि इसका उल्लेख किसी प्रमुख धर्मग्रंथ में स्पष्ट निषेध के रूप में नहीं मिलता, लेकिन सनातन परंपराओं में इस दिन को पूर्ण रूप से आध्यात्मिक साधना, संयम और गुरु भक्ति के लिए समर्पित माना गया है.

मान्यता है कि इस दिन व्यक्ति को अपने बाहरी सौंदर्य से अधिक आंतरिक शुद्धि, विनम्रता और आत्मचिंतन पर ध्यान देना चाहिए. इसलिए बाल और नाखून काटने जैसे कार्यों को शुभ कार्यों से अलग रखने की परंपरा चली आ रही है.


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क्यों मानी जाती है यह परंपरा?

धार्मिक दृष्टि से इस मान्यता के पीछे कई कारण बताए जाते हैं—

  • गुरु पूर्णिमा का दिन तप, साधना और गुरु सेवा के लिए समर्पित माना जाता है.
  • इस दिन शरीर की नहीं, बल्कि मन और आत्मा की शुद्धि को अधिक महत्व दिया जाता है.
  • कई घरों में पूर्णिमा तिथि पर बाल और नाखून काटने से परहेज करने की पारिवारिक परंपरा भी होती है.
  • पूजा-पाठ, जप, दान और गुरु वंदना को प्राथमिकता देने की सलाह दी जाती है.

गुरु पूर्णिमा पर क्या करें?

यदि आप गुरु पूर्णिमा का पूरा आध्यात्मिक लाभ प्राप्त करना चाहते हैं, तो इन कार्यों को करना शुभ माना जाता है—

  • गुरु, माता-पिता और शिक्षकों का आशीर्वाद लें.
  • महर्षि वेदव्यास और अपने गुरु का पूजन करें.
  • जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या धार्मिक पुस्तकें दान करें.
  • गुरु मंत्र, गायत्री मंत्र या "गुरु ब्रह्मा गुरु विष्णु..." मंत्र का जाप करें.
  • अहंकार, क्रोध और नकारात्मक विचारों का त्याग करने का संकल्प लें.

आस्था का विषय है यह मान्यता

गुरु पूर्णिमा पर बाल और नाखून न काटने की परंपरा मुख्य रूप से धार्मिक आस्था और पारिवारिक परंपराओं से जुड़ी हुई है. इसे अनिवार्य धार्मिक नियम नहीं माना जाता, बल्कि श्रद्धा और विश्वास के आधार पर अपनाई जाने वाली परंपरा समझा जाता है. यदि कोई व्यक्ति इस दिन गुरु की पूजा, सेवा, दान और आत्मचिंतन को प्राथमिकता देता है, तो यही गुरु पूर्णिमा का वास्तविक संदेश माना जाता है. गुरु का सम्मान, विनम्रता और ज्ञान के प्रति समर्पण ही इस पावन पर्व का सबसे बड़ा महत्व है.


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लेखक के बारे में

By शौर्य पुंज

मैं धर्म, ज्योतिष और आध्यात्मिक विषयों पर लेखन में विशेषज्ञता रखता हूं. हस्तरेखा शास्त्र, राशिफल, ग्रह-नक्षत्र, धार्मिक परंपराओं और पौराणिक कथाओं से जुड़े विषयों पर मेरी विशेष रुचि और गहरी समझ है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया और कंटेंट राइटिंग के क्षेत्र में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. धर्म और ज्योतिष के अलावा एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी लगातार लेखन करता रहा हूं. मेरी कोशिश रहती है कि जटिल विषयों को आसान, रोचक और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाया जाए.

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