Gupt Navratri: गुप्त नवरात्रि का शुभारंभ हो गया है. आज 20 जनवरी 2026 को गुप्त नवरात्रि का दूसरा दिन है. इस दिन महाविद्या माता तारा की आराधना की जाती है. माता तारा को माता काली का एक स्वरूप माना जाता है. इन्हें तारने वाली देवी, यानी मुक्ति प्रदान करने वाली देवी भी कहा जाता है. माता तारा और भगवान शिव से संबंधित एक प्रचलित पौराणिक कथा है, जिसमें माता तारा को भगवान शिव की माता माना गया है. इस आर्टिकल में हम उसी कथा के बारे में बता रहे हैं.
पौराणिक कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, महर्षि दुर्वासा के श्राप के कारण सभी देवता और संसार ऐश्वर्यहीन हो गया था. तब दोबारा ऐश्वर्य की प्राप्ति के लिए देवताओं और असुरों ने मिलकर समुद्र मंथन किया. मंथन के दौरान समुद्र से हलाहल विष निकला. यह विष इतना भयानक था कि इसकी एक बूंद से ही पूरी सृष्टि नष्ट हो सकती थी. तब संसार की रक्षा के लिए भगवान शिव ने इस विष को ग्रहण कर अपने कंठ में धारण कर लिया.
विष के प्रभाव से भगवान शिव का शरीर तपने लगा और उन्हें अत्यधिक कष्ट होने लगा. पीड़ा से मुक्ति पाने के लिए भगवान शिव ने आदिशक्ति का ध्यान किया. तभी आदिशक्ति माता तारा के रूप में प्रकट हुईं. माता तारा ने भगवान शिव को एक नन्हे बालक का रूप प्रदान किया और उन्हें अपनी गोद में बैठाकर स्तनपान कराया. इससे भगवान शिव के शरीर का विष प्रभाव कम हो गया. तभी से माता तारा को भगवान शिव की माता के रूप में जाना जाने लगा.
माता तारा के मंत्र
- ॐ त्रीं ह्रीं हुं
- ऐं ह्रीं श्रीं क्लीं सौः हुं उग्रतारे फट्
- ॐ हुं ह्रीं क्लीं हसौः हुं फट्
- ॐ हुं ह्रीं हुं ह्रीं फट्
